सरकारी अस्पतालो के 38 व दूकानो के 25 फिसद दवाएं नकली होने की रिपोर्ट
बैकुंठपुर।
देश में हुए जांच में 25 फिसद नकली दवाओ के बाजार में बिकने की बात ने लोगो को हिला कर रख दिया है। आज शायद ही एैसा कोई घर हो जहा पर दवा कर जरुरत न हो । आज हर घर में बीपी और शुगर मरिज है एैसे में जरुरत है सावधान रह कर दवा लेने की । 53 दवाओं के सैंपल फेल होने के बाद आम लोगों के मन में डर बैठ गया है कि वे जो दवाएं ले रहे हैं कहीं वे नकली तो नहीं हैं। उनका डर जायज भी है क्योंकि एक अध्ययन के मुताबिक देश में बिकने वाली करीब 25 फीसदी दवाएं नकली हैं। जानकार बता रहे हैं कि फर्जी कंपनियों द्वारा नामी कंपनियों के लेबल की नकल कर इन दवाओं की बाजार में सप्लाई की जा रही है। इससे बचने के लिए जानकार बाजार में बिक रहे नकली दवाओ से बचने क्यूआर कोड स्कैन कर दवा लेने की बात कह रहे हैं।
सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन की रिपोर्ट सामने आई है जिसमें बताया गया है कि आम बुखार की दवा पैरासिटामोल सहित 53 दवाएं ऐसी हैं जिनके सैंपल लैब जांच में फेल हो गये। दवाओं के नाम पर सब-स्टैंडर्ड सॉल्ट बेचे जा रहे थे इनमें पेनकिलर डिक्लोफेनेक, एंटीफंगल दवा फ्लुकोनाजोल, विटामिन डी सप्लीमेंट, बीपी और डायबिटीज की दवा, एसिड रिफलक्स आदि शामिल हैं। सभी दवाएं नामी कंपनियों के लेबल में आई थीं।
सरकारी अस्पतालों में भी नकली की रिपोर्ट
रिपोर्ट में यह बताया गया था कि सरकारी अस्पतालों में सबसे ज्यादा 38 प्रतिशत दवाएं नकली पाई गई थीं। जो बेहद चौकाने वाला है। गरिबो के लिए सरकारी अस्पतालो की दवाईयो पर निर्भरता किसी से छिपी नही है। रिपोर्ट में कहा गया है कि देश में नकली दवाओं का कारोबार सलाना 33 प्रतिशत की औसत दर से बढ़ रहा है।
कैसे करें नकली दवा की पहचान?
ध्यान से देखने पर भी ये नकली दवाएं बिल्कुल असली जैसी ही लगती हैं, लेकिन अधिकतर मामलों में लेबलिंग में कुछ न कुछ कमियां होती हैं, जिससे इनकी पहचान की जा सकती है। यदि आपने पहले यह दवा इस्तेमाल की हुई है तो पुरानी और नई पैकेजिंग की तुलना कर अंतर जानने का प्रयास कर सकते हैं। कई मामलों में नकली दवाओं के लेबलिंग में स्पेलिंग या व्याकरण संबंधी गलतियां होती हैं जो असली दवाओं के मामले में नहीं होती हैं।
एक क्यूआर पर मिलेगी पूरी जानकारी
केंद्र सरकार ने शीर्ष 300 ब्रांडेड नाम से बिकने वाली दवाओं को नोटिफाई किया हुआ है। अगस्त 2023 के बाद बनी इन सभी दवाओं की पैकेजिंग पर बारकोड या क्यूआर कोड होता है। उसे स्कैन करते ही उसकी पूरी जानकारी सामने आ जाती है। नकली दवाओं के बारकोड या क्यूआर कोड को स्कैन करने पर कोई रिस्पॉन्स नहीं मिलता है। दवाएं खरीदते समय जांच लें कि उनकी सीलिंग सही है और पैकेजिंग भी ठीक है।

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