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बाघ की मौत पर घिरे वनमण्डल कोरिया और गुरु घासीदास राष्ट्रीय उद्यान ने प्रेस विज्ञप्ति जारी दी सफाई
हाइलाइटस………
01 – अधिकारियो ने अपनी निगरानी में मृत बाघ का पीएम कर कराया अंतिम संस्कार
02 – अंगो को जॉच के लिए यूपी के बरेली की प्रयोगशाला में भेजने की बात कही
03 – विगत तीन वर्षो में तीन बाघो की मौत….जवाब रटा-रटाया एक ही जहरख्ुारानी

बैकुंठपुर।
कोरिया जिले में बाघ की संदिग्ध अवस्था में हुई मौत के बाद पिछले दो दिनो चौतरफा आलोचना होने के बाद पहली बार वनमण्डलाधिकारी, कोरिया वनमण्ड़ल और संचालक, गुरु घासीदास राष्ट्रीय उद्यान के अधिकारियो द्वारा संयुक्त विज्ञप्ति जारी कर अपनी सफाई दी गई। जिसमें बताया गया कि दिनांक 08.11.2024 को समय अपरान्ह 01 बजे ग्रामीणों से परिसर रक्षक गरनई को सूचना प्राप्त हुई कि ग्राम कटवार के पास खनखोपड़ नाला के किनारे एक बाघ की मृत्यु हुई है। घटना स्थल बीट गरनई, सर्किल रामगढ़, परिक्षेत्र सोनहत, कोरिया वनमण्डल के असीमांकित वनक्षेत्र (कक्ष कमांक पी 196) के समीप है। संबंधित वनरक्षक के द्वारा वरिष्ठ अधिकारियों को सूचित किया गया।
जारी विज्ञपति में कहा गया कि तत्काल वनमण्डलाधिकारी कोरिया, संचालक गुरु घासीदास राष्ट्रीय उद्यान बैकुंठपुर, उपवनमण्डलाधिकारी उत्तर बैकुन्ठपुर, मुख्य वन संरक्षक सरगुजा वन वृत्त अम्बिकापुर, वन संरक्षक (वन्यप्राणी) सरगुजा मौके पर पहुंचे। वन विभाग के कर्मचारियों की टीम के द्वारा घटना स्थल के आसपास 1.5 से 2 कि.मी. परिधि में तलाशी की गई। प्रथम दृष्टया शव 2-3 दिन पुराना प्रतीत होता है। दिनांक 09.11.2024 को वन विभाग, पुलिस विभाग, छज्ब्। प्रतिनिधि एवं ग्रामीणों की उपस्थिति में 4 सदस्यीय पशु चिकित्सकों की टीम द्वारा शव विच्छेदन किया गया। उक्त टीम के अभिमत अनुसार बाघ की मृत्यु का कारण जहरखुरानी संभावित है।

विभाग ने बताया कि शव विच्छेदन उपरांत शव को नियमानुसार दाह संस्कार किया गया। शव विच्छेदन के दौरान मृत टाईगर के आवश्यक अंगों को प्रयोगशाला परीक्षण के लिए प्रिजर्व किया गया। घटना स्थल के आसपास के क्षेत्र में गोमार्डा अभ्यारण्य के डॉग स्क्वायड टीम द्वारा पतासाजी किया गया तथा कोरिया वनमण्डल एवं गुरु घासीदास राष्ट्रीय उद्यान बैकुन्ठपुर की संयुक्त टीम के 4 दलों के द्वारा आसपास के क्षेत्रों में निरीक्षण किया गया।
सम्पूर्ण कार्यवाही के दौरान अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) रायपुर उपस्थित रहे एवं समस्त वन अधिकारियों/कर्मचारियों को अपराधियों की पतासाजी करने एवं वाईल्ड लाईफ काईम नियंत्रण के लिए निर्देश दिया गया। क्या बताया है विज्ञप्ति में मृत टाईगर के स्किन, नाखून, दॉत एवं सभी अंग सुरक्षित थे, किसी भी प्रकार का अंग-भंग नहीं पाया गया। टाईगर मृत्यु के सभी संभावित कारणों की विवेचना की जा रही है।

इससे पूर्व शनिवार को कड़ी सुरक्षा में 3 वेटनरी ऑफिसर से शव का पीएम कराया गया। वहीं रायपुर व सरगुजा से पहुंची एक्सपर्ट टीम की मौजूदगी में बाघ का नदी में दाह संस्कार करा दिया गया है। रायपुर से खोजी कुत्ते के साथ संरक्षण शाखा प्रमुख संदीप सिंह और सरगुजा सीसीएफ पहुंचे थे। उनकी निगरानी में पूरी प्रक्रिया हुई। पीएम रिपोर्ट आने के बाद बाघ की मौत के कारणों का खुलासा होगा। बाघ के शव वाले स्थल से लेकर आसपास एरिया को बेरिकेडिंग करा आवाजाही बंद कराई गई है। गौरतलब हो कि 8 नवंबर को दोपहर बाद सोशल मीडिया में बाघ की मौत की तस्वीरें वायरल हुई थी। वनांचल रामगढ़ क्षेत्र के ग्राम पंचायत देवसिल मार्ग पर खनकोपर नदी के पास बाघ का शव मिला था। सूचना मिलने के बाद कोरिया वन मंडल और गुरु घासीदास राष्ट्रीय उद्यान के अफसर मौके पर पहुंचे थे।

क्या बोले जिम्मेदार……….
सरगुजा के मुख्य वन्य संरक्षक वी माथेश्वरन ने बताया कि छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले में जहरखुरानी से बाघ की मौत हो गई। शुक्रवार को बाघ का शव गुरुघासीदास टाइगर रिजर्व के नजदीक मिला था। शव दो-तीन दिन पुराना था। उसमें से दुर्गंध आने लगा था। पोस्टमार्टम में बाघ को जहर देने की पुष्टि हुई है। दो वर्ष पूर्व जनवरी 2022 में भी जहर से एक बाघ की मौत हुई थी। उन्होने कहा कि पोस्टमार्टम करने वाले चिकित्सकों ने प्रथम दृष्टया बाघ की मौत जहर खुरानी से होना बताया है। जानवरों के शिकार के कारण ग्रामीणों द्वारा ही जहर देने की संभावना है। बाघ के नाखून, दांत,मूंछ पूरी तरह सुरक्षित थे। कोई अंग-भंग भी नहीं था।





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