लगातार बाघ की चहलकदमी से ग्रामिण और विभाग में दहशत
बाघ मानव संर्घष और पिछले दिनो हुई घटनाओ से विभाग सशंकित
बैकुंठपुर।
कोरिया जिला मुख्यालय से 20 किलो मीटर दूर कटकोना, टेमरी, नानभान, करहियाखांड, पाण्डवपारा, झिलमिली के आसपास गॉव से लगे जंगलो में विगत दो महिने से बाघ का लगातार आवाजाही देखी जा रही है। दूसरी ओर पडोसी जिले सूरजपुर के बड़सरा, बसकर, कुधरी, धरसेड़ी सहित आसपास के गांवों में भी बाघ का विचरण करने की बात लगातार सामने आ रही है।
यही कारण है कि ग्रामिण दहशत में जीने को मजबूर है। कहा तो यह भी जा रहा है कि बाघ के डर से ग्रामीणों ने रात में घर से निकलना तक बंद कर दिया है और दिन में भी जंगलो में जाना बंद कर दिया है। कोरिया वन विभाग की टीम एक पखवाड़े पूर्व सूरजपुर से आये बाघ को टेमरी जंगल में कैमरा लगाकर उसके विचरण की पुष्टि की थी।
दूसरी ओर ग्रामिणो के द्धारा बताया जा रहा है कि बाघ के दहाडऩे की आवाज आये दिनरात में सुनाई दे जाती है। दूसरी ओर जंगलो में अपने जानवरो को चरने जाने वालो पशुपालको के लिए अब नई समस्या सामने आ गई है कि वो अपने जानवरो को चरवाही कहा करें।
जंगल से दूर रहने की समझाइश
कोरिया वनमंडल की डीएफओ प्रभाकर खलखो का कहना है कि सूरजपुर से सटे जंगल क्षेत्र में बाघ का मूवमेंट है। ग्रामीणों को जंगल न जाने की समझाइश लगातार दी जा रही है। पशुओ के नुकसान होने पर पंचनामा तैयार कर शासन से तय मुआवजा दिया जाता है। किन्तु बेहतर होगा कि वर्तमान में पशुपालक जगंलो में पशु लेकर न जाये और खुद भी वनो में जाने से परहेज करें।

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