आचार संहिता लागू, 24 फरवरी तक रहेगा असर
पंचायत एवं नगरीय निर्वाचन हेतु आदर्श आचार संहिता प्रभावी होते ही प्रशिक्षण सत्र प्रारंभ
बैकुंठपुर।
प्रदेश में निकाय और पंचायत चुनाव की तारीखों का ऐलान हो चुका है। सोमवार 20 जनवरी से आचार संहिता लग चुकी है। निकाय चुनाव 11 फरवरी को होंगे। वहीं 15 फरवरी को नगर निगम, नगर पालिका और नगर पंचायत के नतीजे आ जाएंगे। इस बार नगरीय निकाय के चुनाव ईवीएम से ही होंगे। वहीं, 3 चरण में 17, 20 और 23 फरवरी को पंचायत चुनाव के लिए मतदान होगा। इसके नतीजे 18, 21 और 24 फरवरी को आएंगे। त्रि-स्तरीय पंचायत चुनाव बैलेट पेपर से होंगे। आचार संहिता के दौरान किसी भी काम का नया ठेका नहीं दिया जा सकता है। सांसद निधि, विधायक निधि या जन प्रतिनिधियों के कोष से होने वाले काम रोक दिए जाएंगे। कोई भी नया काम शुरू नहीं होगा। किसी नए काम के लिए टेंडर भी नहीं खोले जाएंगे। किसी नए काम की घोषणा नहीं होगी।
सार्वजनिक धन का इस्तेमाल किसी ऐसे आयोजन में नहीं किया जा सकता। जिससे किसी विशेष दल को फायदा पहुंचता हों। सरकारी गाड़ी, सरकारी विमान या सरकारी मशीनरी का इस्तेमाल चुनाव प्रचार के लिए नहीं किया जा सकता है। सरकारी वाहन किसी दल या प्रत्याशी के हितों को लाभ पहुंचाने के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। सभी तरह की सरकारी घोषणाएं, लोकार्पण, शिलान्यास या भूमिपूजन के कार्यक्रम नहीं किए जा सकते हैं। प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े हुए सभी अधिकारियों/पदाधिकारियों के ट्रांसफर और तैनाती पर प्रतिबंध होगा। सत्ताधारी पार्टी की उपलब्धियों वाली होर्डिंग/विज्ञापन हटा दिया जाएगा।
किसी भी पार्टी, प्रत्याशी या समर्थकों को रैली- जुलूस निकालने या चुनावी सभा करने की पूर्व अनुमति पुलिस से लेना अनिवार्य होगा। कोई भी राजनीतिक दल जाति या धर्म के आधार पर मतदाताओं से वोट नहीं मांग सकता है। राज्य-केंद्रीय सरकार की आधिकारिक वेबसाइटों से मंत्रियों, राजनेताओं और राजनीतिक दलों के सभी संदर्भों को निकाल दिया जाता है।
क्यों लागू होती है आचार संहिता ?
किसी भी राज्य में आचार संहिता लागू होने के बाद कई कामों पर पाबंदियां लग जाती हैं। राज्य में चुनाव की तारीखों के ऐलान के साथ आचार संहिता यानी मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट लागू हो जाता है। आचार संहिता को लागू करने का मकसद है कि चुनाव स्वतंत्र और निष्पक्ष रूप से हो सकें। अगर कोई राजनीतिक दल इस आचार संहिता का उल्लंघन करता है, तो चुनाव आयोग उसके खिलाफ कार्रवाई कर सकता है। ऐसे हालातों में उसके चुनाव लड़ने पर पाबंदी भी लगा सकता है।

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