वक्फ विधेयक के संशोधन पर हाय-तौबा विधवा विलाप – भइयालाल राजवाडे

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बैकुंठपुर

बैकुंठपुर विधायक व पूर्वमंत्री भइयालाल राजवाडे ने वक्फ विधेयक के पारित होने प्रसन्नता प्रकट की है। उन्होंने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार का स्पष्ट सिद्धांत है कि वोट बैंक के लिए हम कोई कानून नहीं लाएंगे, क्योंकि कानून न्याय और जन के कल्याण के लिए होता है। यह तुष्टीकरण का माध्यम नहीं होना चाहिए।

मुसलमान समाज में कुछ लोगो के द्धारा फैलाई जा रही भ्रांती पर उन्होने कहा कि वक्फ विधेयक के संशोधन में कहीं भी धार्मिक स्वतंत्रता में हस्तक्षेप नहीं किया गया है। इस विधेयक के माध्यम से जो बदलाव किए गए हैं, वह विशुद्ध रूप से प्रशासनिक प्रकृति के हैं। वक्फ बोर्ड में धार्मिक दान से जुड़े कार्यों में किसी गैर-इस्लामिक सदस्य को जगह नहीं दी गई है।

वक्फ बोर्ड या इसके परिसरों में जिन गैर-मुस्लिम सदस्यों को रखने की बात कही गई है, उनका काम धार्मिक क्रियाकलापों से संबंधित नहीं होगा। चौरिटी कमिश्नर किसी भी धर्म का व्यक्ति बन सकता है, वह सुनिश्चित करेगा कि बोर्ड का संचालन चौरिटी कानून के मुताबिक हो।

केंद्र ने किया संवैधानिक मूल्यों का सम्मान

श्री राजवाडे ने कहा कि वक्फ विधेयक में संशोधन के माध्यम से मोदी की सरकार ने न्यायपालिका के आदेश एवं संवैधानिक मूल्यों की अवहेलना नहीं, बल्कि उसका सम्मान किया हैं। इसलिए इसका विरोध करने वाले देश के संविधान, देश के कानून एवं किसी भी समुदाय के हितैषी कतई नहीं हो सकते हैं।

जिनके मन में चोरी है वह वक्फ संशोधन विरोधि

विधायक राजवाडे ने कहा कि वक्फ संशोधन विधेयक के संसद के दोनों सदन में पारित होने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह एवं अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री किरण रिजिजू के समर्थन में खड़े सभी सांसदों को बधाई दी है। उन्होंने कहा है कि जिनकी बेइमानी की दुकान बंद हुई है, वहीं लोग इस विधेयक के संशोधन पर हाय-तौबा मचा कर विधवा विलाप कर रहे है। सच्चाई यह है कि विधेयक के पास होने से मुस्लिम महिलाओं के साथ-साथ पिछड़े और गरीब मुस्लिमों की जिदंगी में खुशहाली आएगी।

पूरी दूनिया में एैसा कानून नही

श्री राजवाडे ने कहा कि दुनिया में कहीं किसी अल्पसंख्यक या बहुसंख्यक के लिए ऐसा कोई कानून नहीं है। यही नहीं, मुस्लिम देशों में भी ऐसा कोई कानून नहीं है तो भारत को ऐसे कानून को ढोने की जरूरत क्या है? वक्फ के पास इतनी संपति होने के बावजूद भी अल्पसंख्यक वर्ग सबसे ज्यादा पिछड़ा हुआ क्यों है? इन सभी पक्षों को जानने के बाद स्पष्ट है कि देश में इस कानून में बदलाव की जरूरत देशहित के लिए आवश्यक था।

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