बाबा भोलनशाह के मजार दो जून को चादर चढाने के साथ 3 दिवसीय उर्स का होगा आरम्भ…..हिन्दू-मुश्लिम एकता और कई ऐतिहासिक परंपराओ का प्रतिक उर्स

Estimated read time 1 min read

बैकुंठपुर।

कोरिया जिले के सोनहत में तीन दिवसीय उर्स का आयोजन होने जा रहा है। संबंध में जानकारी देते हुए कमेटी के मेंबर फिरदोस अहमद ने बताया कि सालाना उर्फ शरीफ 2025 के लिए हजरत बाबा भोलन शाह की मजार पर सोनहत में तीन दिवसीय उर्स कार्यक्रम का आयोजन आगामी 02, 03 एवं 04 जून को होगा । जिसमें इस बार दिल्ली के इन्तजार साबरी और झारखण्ड हजारी बाग की शाहिन शबा भारती अपने कव्वाली प्रस्तुत करेंगे । कार्यक्रम के संबंध में बताया गया की 02 जून सोमवार को शाम जमा मस्जिद बैकुंठपुर से संदल व चादर का जुलूस सोनहत दरगाह शरीफ के लिए रवाना होगा । किसके उपरांत चादर पेश की जाएगी । वहीं पर 03 व 04 जून को कव्वाली का आयोजन होगा । जिसमें कई नाम चिन कव्वाल अपनी हुनर का प्रदर्शन करेंगे। विदित हो कि उर्स कमेटी में सोनहत, बैकुंठपुर, सूरजपुर, पटना एवं चरचा के मेंबर वर्षों से अपनी भागीदारी निभाते रहे हैं । कार्यक्रम के पूर्वमंत्री एवं बैकुंठपुर विधायक भैयालाल राजवाड़े, मुख्य अतिथि एवं संरक्षक के तौर पर भरतपुर सोनहत विधायक रेणुका सिंह, मुख्य अतिथि के तौर पर भाजपा जिलाध्यक्ष देवेन्द्र तिवारी मौजूद रहेंगे । जबकि अन्य अतिथियों में पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष शैलेश शिवहरे, बैकुंठपुर नगर पालिका अध्यक्ष नविता शिवहरे, पूर्व विधायक गुलाब कमरों, कांग्रेस के पीसीसी सदस्य योगेश शुक्ला, कांग्रेस कोरिया के जिला अध्यक्ष प्रदीप गुप्ता कांग्रेस, कोरिया के पूर्व जिला अध्यक्ष नजर अजहर, अंबिकापुर से सफी अहमद और कांग्रेस के नेता व जिला पंचायत उपाध्यक्ष वेदांती तिवारी, बैकुंठपुर नगर पालिका उपाध्यक्ष आशीष यादव, बैकुंठपुर नगर पालिका के पूर्व अध्यक्ष अशोक जायसवाल उपस्थित रहेंगे।

ॐ लिखी चादर चढ़ाने की मान्यता

ॐ लिखी चादर चढ़ाने के पीछे मान्यता है कि यादव समाज के एक व्यक्ति के कोई संतान नहीं होने पर इस स्थल पर पूजा-अर्चना कर मन्नत मांगी थी। फिर उसे पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई। इसके बाद उसने यहां मजार बनाया था। तब से यह परंपरा चली आ रही है। पिछले कई साल से हिंदू-मुस्लिम समाज द्वारा मिल-जुलकर उर्स मनाया जाता है। सोनहत में उर्स के दौरान भारी भीड़ रहती है। इसे देखते हुए जिला प्रशासन द्वारा भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है।

यादव परिवार चढ़ता है पहली चादर

यादव परिवार के लोग बताते हैं कि उनके दादा रामदेव यादव बनारस से आए थे और अविभाजित सरगुजा एवं वर्तमान में सोनहत और सूरजपुर जिले की सीमा पर स्थित ग्राम किरवाही में रह कर व्यापार करते थे। उनकी कोई औलाद नहीं थी और उन्होंने उक्त स्थान पर पूजा-अर्चना कर पुत्र रत्न की प्राप्ति की मन्नत मांगी थी। इसके बाद उन्हे पुत्र रत्न प्राप्त हुआ था। इससे वहां पर यथाशक्ति मजार का निर्माण कराया और उसके बाद से आज तक हर साल सालाना उर्स के मौके पर पहली चादर उनके परिवार की चढ़ाई जाती है और उसके बाद कमेटी की चादरपोशी होती है।

1970 में पहली बार हुआ था उर्स कार्यक्रम

माना जाता है कि पार्क परिक्षेत्राधिकारी सोनहत निवासी स्व. आर यू पाण्डेय द्वारा मजार पर मन्नत मांगी गई थी और उन्हे पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई थी। इससे सोनहत एवं बैकुंठपुर के ग्रामीणों के साथ बाबा के मजार स्थल पर सालाना उत्सव मनाए जाने का निर्णय लिया गया और उनकी अगुवाई में सन 1970 में पहली बार सालाना उर्स का कार्यक्रम शुरू कराया गया था। मजार में धीरे धीरे सुविधाएं बढऩे लगी और सन् 1990 से 1995 के आस-पास पुरानी मजार का जीर्णोंधार कराया गया था। इसमें नया मजार एवं कुआं समेत अन्य निर्माण शामिल है।

You May Also Like

More From Author

+ There are no comments

Add yours