गौ सेवा आयोग के जिलाध्यक्ष बने रेवा यादव……..विकास खण्ड स्तरीय समिति का भी गठन
बैकुंठपुर।
छत्तीसगढ़ सरकार ने कोरिया जिले में गौसेवा आयोग अधिनियम 2004 और नियम 2005 के तहत जिला स्तरीय एवं विकासखंड स्तरीय गौसेवा समितियों का गठन किया है। राज्य शासन द्वारा जारी आदेश के अनुसार, ये समितियां आगामी तीन सालों तक कार्यरत रहेंगी। शासन द्धारा जारी आदेश के तहत, बैकुंठपुर के रेवा यादव को उनके बेहतर कार्य को देखते हुए कोरिया जिला स्तरीय समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। समिति के सदस्यों में पटना से राजेन्द्र सोनी, गढतर से उजिथ नारायण व नौगई से मनोज त्रिपाठी शामिल हैं। वही पर विकास खण्ड स्तरीय समिति सोनहत में अध्यक्ष सुखेन्द्र प्रजापति, बसवाही, सदस्यो में सदस्य रामकरन प्रजापति, अमरा, बलबीर पुषाम, बेलीया केशव राजवाडे, तेलीमुडा, जयराम राजवाडे, ओदारी एवं विकास खण्ड बैकुंठपुर के अध्यक्ष नवनीत कुशवाहा, खैरी जबकि सदस्यो में विकास सोनी, पटना, संजय यादव, अमहर, रवि शंकर प्रजापति, बरदीया, राजवाडे,उमझर, रामकुमार मानिकपूरी, झारनापारा को नियुक्त किया गया है।
इन समितियों को जिलाध्यक्ष के मार्गदर्शन में राज्य में पंजीकृत गौशालाओं की निगरानी, निरीक्षण और आवश्यक सुधार कार्यों की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसके अलावा समिति गौशालाओं को दिए जा रहे अनुदान की निगरानी भी करेगी। समिति जैविक खाद और पंचगव्य निर्माण से संबंधित प्रशिक्षण कार्यक्रमों का संचालन करेगी। गौशालाओं के पंजीकरण की प्रक्रिया में अनुशंसा करना और अव्यवस्थाओं पर प्रतिवेदन प्रस्तुत करना भी इसके महत्वपूर्ण कार्यों में शामिल है। समिति के कार्यों की नियमितता सुनिश्चित करने के लिए, जिला स्तरीय समिति हर दो माह में और विकासखंड स्तरीय समिति हर माह बैठक करेगी। प्रत्येक तिमाही में निरीक्षण कर रिपोर्ट प्रस्तुत करना समिति की प्रमुख जिम्मेदारी होगी। इस समिति के गठन से जिले में गौसेवा से संबंधित योजनाओं को नई दिशा मिलने और उनके प्रभावी क्रियान्वयन की उम्मीद है।
जारी आदेश के अनुसार, जिला स्तरीय गौ सेवा समिति हर दो महीने में और ब्लॉक स्तरीय समिति हर महीने बैठक करेगी। बैठक की अध्यक्षता अध्यक्ष करेंगे। उनकी अनुपस्थिति में सदस्य में से कोई एक सदस्य अध्यक्षता कर सकता है। बैठक का आयोजन और व्यवस्थापन समिति के सचिव करेंगे। इसका मुख्य उद्देश्य यह है कि, राज्य की पंजीकृत गौशालाओं का सुचारू संचालन, ग्रामीणों को जैविक खेती और पंचगव्य उत्पादन में प्रशिक्षित किया जा सके। नई समितियों की स्थापना से न केवल गौशालाओं का विकास होगा, बल्कि नई गौशालाओं की स्थापना और उनका पर्यवेक्षण भी प्रभावी तरीके से संभव होगा। इस पहल के तहत सरकार ने जिला और ब्लॉक स्तर पर व्यापक निगरानी और पारदर्शिता सुनिश्चित की है। जिससे छत्तीसगढ़ में गोसेवा और पशुपालन के क्षेत्र में गुणवत्ता, दक्षता और विकास को बढ़ावा मिलेगा।
नई गो-शाला शुरू कराने में अहम भूमिका
जिला और विकास खण्ड स्तरीय समितियों के माध्यम से गौशालाओं के निरीक्षण, अनुदान वितरण, अधोसंरचना की स्थिति, पोषण और पशुधन स्वास्थ्य की जानकारी गो सेवा आयोग को प्रस्तुत की जाएगी। इसके अलावा, गोशाला पंजीयन आवेदन विकासखंड समिति की अनुशंसा और जिला स्तरीय समिति की मंजूरी के बाद अनुमोदित होगा।
तीन साल का रहेगा कार्यकाल
जिला और विकासखंड स्तरीय समितियों के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति तीन साल के लिए की गई है। हालांकि, राज्य शासन को यह अधिकार रहेगा कि वह आवश्यकतानुसार किसी भी समय इन नियुक्तियों को निरस्त कर सके। यह व्यवस्था प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए की गई है।


+ There are no comments
Add yours