कांग्रेस में नए जिलाध्यक्ष को लेकर हलचल तेज, किसे मिलेगा मौका……कांग्रेस जिलाध्यक्ष के लिए 10 लोगों ने की दावेदारी

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बैकुंठपुर।

कांग्रेस का संगठन सृजन अभियान 2025 किसी उत्सव से कम नहीं है। इस सांगठनिक उत्सव में कांग्रेस कार्यकर्ताओं का उमंग और उत्साह चरम पर है। कांग्रेस के जिलाध्यक्ष चयन प्रक्रिया के निमित्त बैकुंठपुर में अखिल भारतीय कांग्रेस कमिटी द्वारा मनोनीत पर्यवेक्षक पूर्व केन्द्रीय मंत्री सुबोध कांत सहाय को कोरिया जिले के कांग्रेस जिलायक्ष के 10 दावेदारो में अपना दावा ठोका है।

कांग्रेस संगठन में जिलाध्यक्ष पद पर नए चेहरों की ताजपोशी को लेकर रायशुमारी की प्रक्रिया तेज हो गई है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के निर्देश पर नियुक्त पर्यवेक्षक बैकुंठपुर आये थे। बुद्धवार को उन्होंने दिनभर पार्टी पदाधिकारियों, वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं से मुलाकात कर उनके विचार सुने। संगठन को मजबूती देने के लिए जिला नेतृत्व में बदलाव की तैयारी लंबे समय से चल रही थी, जिस पर अब निर्णय की दिशा में ठोस कदम उठाया जा रहा है।

ऐसे नेता जो सभी को लेकर चले

पर्यवेक्षक ने कार्यकर्ताओं से रायशुमारी के दौरान संगठन की मजबूती, आगामी चुनावी रणनीति और नेतृत्व के लिए उपयुक्त नाम सुझाने को कहा। बैठक में कार्यकर्ताओं ने संगठन को जमीन स्तर पर सक्रिय करने पर जोर देते हुए कहा कि जिलाध्यक्ष का चयन ऐसा होना चाहिए जो सभी गुटों को साथ लेकर चल सके। कुछ वरिष्ठ नेताओं ने यह भी स्पष्ट किया कि नए नेतृत्व का चेहरा युवा और ऊर्जावान होना चाहिए, ताकि विधानसभा चुनाव और स्थानीय निकाय चुनावों में संगठन को गति मिल सके। वहीं कुछ कार्यकर्ताओं ने अनुभव और संगठनात्मक पकड़ को तरजीह देने की बात कही।

पूर्व पदाधिकारी और सक्रिय कार्यकर्ता को तवज्जों

रायशुमारी के दौरान कई नामों पर चर्चा हुई, जिनमें पूर्व पदाधिकारी और सक्रिय कार्यकर्ता शामिल हैं। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, शहरी और ग्रामीण जिलाध्यक्ष के लिए चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने की कोशिश की जा रही है। संगठन की मंशा है कि नया नेतृत्व ऐसे नेताओं को मिले जिनकी पकड़ कार्यकर्ताओं और आम जनता दोनों में मजबूत हो। इससे आने वाले चुनावों में कांग्रेस की स्थिति को और सुदृढ़ किया जा सकेगा।

चुनाव समीकरण पर भी ध्यान

स्थानीय राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जिलाध्यक्ष का चयन कांग्रेस के लिए अहम साबित होगा। इसके पीछे कारण यह है कि यह न केवल संगठन की एकजुटता को प्रभावित करेगा बल्कि आगामी चुनावी समीकरणों पर भी असर डालेगा। इसको लेकर भी पार्टी का शीर्ष नेतृत्व सजग है। कांग्रेस के भीतर उत्साह और हलचल दोनों देखी जा रही है। कार्यकर्ता अपने पसंदीदा नेताओं को आगे बढ़ाने के लिए सक्रिय हैं, जबकि पार्टी का शीर्ष नेतृत्व संतुलन साधने की कोशिश में जुटा है।

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