हमने बोला था हमने बनाया – भइयालाल राजवाडे…..देश का तीसरा सबसे बड़ा टाईगर रिजर्व बना गुरूघासीदास-तमोर पिंगला…..12 सालो से लगातार चल रही थी प्रक्रिया पर छत्तीसगढ सरकार ने लगाई अंतिम मोहर

Estimated read time 1 min read

हमने बोला था हमने बनाया – भइयालाल राजवाडे

देश का तीसरा सबसे बड़ा टाईगर रिजर्व बना गुरूघासीदास-तमोर पिंगला

12 सालो से लगातार चल रही थी प्रक्रिया पर छत्तीसगढ सरकार ने लगाई अंतिम मोहर

बैकुंठपुर।

छत्तीसगढ़ राजपत्र का प्राधिकार प्रकाशित किया गया है। 04 नवम्बर को वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग मंत्रालय रायपुर से जारी अधिसूचना में कहा गया है कि वन्यजीव (संक्षण) अधिनियम, 1972 (केन्द्रीय अधिनियम, 1972 का सं. 53) की धारा 30-फ की उप-धारा (1) सहपठित उप-धारा (4) द्वारा प्रदत्त शक्तियों को प्रयोग में लाते हुए तथा राष्ट्रीय व्याघ्र संक्षण प्राधिकरण, भारत सरकार की अनुशंसा पर राज्य सरकार द्वारा गुरु घासीदास-तमोर पिंगला टायगर रिजर्व अधिसूचित करती है।
इसमें मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर कोरिया, सूरजपुर एवं बलरामपुर. मनेन्द्रगढ़, कोरिया, सूरजपुर एवं बलरामपुर जिले के कोर एरिया (क्रिटिकल टायगर हैबिटेट)-
गुरु घासीदास राष्ट्रीय उद्यान के परिक्षेत्र जनकपुर कमर्जी, रामगढ़, रेहण्ड एवं सोनहत, बफर एरिया, तमोर पिंगला वन्य जीव अभ्यारण्य के परिक्षेत्र खोद पिंगला एवं तमोर, मनेन्द्रगढ़ वनमण्डल के परिक्षेत्र-बहनरासी एवं जनकपुर, कोरिया वनमण्डल के परिक्षेत्र देवगढ़, कोटाडोल एवं सोनहत, सूरजपुर वनमण्डल के परिक्षेत्र-बिहारपुर घुई एवं कुदरगढ़, बलरामपुर वनमण्डल के परिक्षेत्र रघुनाथ नगर एवं वाड्रफनगर को शामिल किया गया है। टायगर रिजर्व का नाम गुरु घासीदास तमोर पिंगला टायगर रिजर्व को बनाया गया है। जिसमें गुरु घासीदास राष्ट्रीय उद्यान 1440.705 व तमोर पिंगला वन्य जीव अभ्यारण्य क्षेत्रफल 608.527 वर्ग कि.मी. का हिस्सा लिया गया है।

बताया गया कि टायगर रिजर्व के गठन से राज्य में ईको-पर्यटन का विकास होगा साथ ही कोर एवं बफर क्षेत्र में स्थित ग्रामीणों के लिए गाईड, पर्यटक वाहन, रिसार्ट संचालन के साथ ही विभिन्न प्रकार के रोजगार सृजित होंगे। टायगर रिजर्व में कार्य करने के लिए राष्ट्रीय प्रोजेक्ट टायगर ऑथोरिटी से अतिरिक्त बजट प्राप्त होगा जिससे क्षेत्र के गांवों में आजीविका विकास के नए-नए कार्य किए जा सकेंगे।

हाई कोर्ट के दबाव में सरकार ने लिया निर्णय

इससे पूर्व छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने गुरु घासीदास नेशनल पार्क को टाइगर रिजर्व घोषित करने के नोटिफिकेशन को लेकर 4 सप्ताह में जवाब मांगा है। कोर्ट की ओर से कहा गया है कि यह अंतिम अवसर है, राज्य सरकार इस पर जल्द फैसला ले। हाईकोर्ट इसे लेकर लगी जनहित याचिका पर सुनवाई कर रहा था। जिसके बाद प्रदेश सरकार ने यह फैसला लिया। गौरतलब हो कि राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण से 2014 में शुरुआती और 2022 में आखिरी अनुमति मिल गई थी। इसके बाद भी राज्य सरकार ने इसे टाइगर रिजर्व घोषित नहीं किया। कांग्रेस सरकार का मानना था कि जहां रिजर्व घोषित किया गया, उस पूरे इलाके में महत्वपूर्ण खनिजों की खदान और घना जंगल है। रिजर्व बनने के बाद अगर इस इलाके में खनन बंद करना पड़ा तो इससे राज्य को गंभीर आर्थिक संकट उठाना पड़ सकता है। दूसरी ओर प्रदेश में सरकार बदलने के बाद वन्य जीव एक्टिविस्ट को उम्मीद है कि शासन ने गत 04 नवम्बर को नोटिफिकेशन जारी किया।

हमने बोला था हमने बनाया

बैकुंठपुर विधायक और प्रदेश के पूर्व मंत्री भइयालाल राजवाडे ने कहा कि उस समय के मुख्यमंत्री रमन सिंह ने साल 2012 में गुरु घासीदास नेशनल पार्क को टाइगर रिजर्व घोषित करने के सैद्धांतिक निर्णय लिया था। इसका प्रस्ताव भेजा था। इसमें गुरु घासीदास नेशनल पार्क और तमोर पिंगला सेंचुरी को मिलाकर टाइगर रिजर्व बनाने का ड्राफ्ट था। कांग्रेस सरकार में यह मामला इस रिजर्व एरिया के कोल ब्लॉक, आइल ब्लॉक और मिथेन गैस ब्लॉक पर फंस गया। जिसके बाद राज्य सरकार प्रस्तावित गुरु घासीदास नेशनल पार्क को टाइगर रिजर्व घोषित किया है तो क्षेत्रफल के हिसाब से यह देश का तीसरा सबसे बड़ा रिजर्व बन गया। उन्होने कहा कि हमने कहा और हमने बनाया भी।

You May Also Like

More From Author

+ There are no comments

Add yours