सरकार नही दे रही चार महिने से वेतन……मनरेगा कर्मचारी सेठ साहूकारों की मेहबानी से मनेगी होली

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बैकुंठपुर

कोरिया और एमसीबी जिले में मनरेगा योजना का इन दिनों बुराहाल है। गांवों में मजदूरों को काम मांगने के बाद भी काम नहीं मिल रहा है। मनरेगा योजना को संचालित करने वाले एपीओ, प्रोग्रामर, पीओ आदि स्टाफ को पिछले 4 महीने से वेतन के लाले पड़े है। 4 महीने का वेतन 1 करोड़ 50 लाख रुपए बकाया है।

मनरेगा योजना के संचालन के लिए दोनो जिले में कुल 400 कर्मचारियों का स्टाफ है। इसमें एपीओ समेत प्रोग्रामर, पीओ, असिस्टेंट प्रोग्रामर, सहायक ग्रेड-3, लेखापाल, रोजगार सहायक इसमें शामिल है। इन कर्मचारियों का मासिक वेतन 36 लाख बनता है, लेकिन कर्मचारियों को नवंबर-2024 से फरवरी-2025 तक 4 महीने का वेतन नहीं मिला।

04 महीने का वेतन भुगतान 1 करोड़ 50 लाख रुपए है। मनरेगा रोजगार गारंटी योजना के तहत आता है, लेकिन कभी भी समय पर इसका वेतन भुगतान नहीं होने से कर्मचारियों को आर्थिक रूप से परेशानियों का सामना करना पड़ता है। वेतन के अभाव में कर्मचारियों को बाजार में सेठ साहूकारों से उधार लेकर काम चलाना पड़ रहा है।

गत दिनो विधानसभा में वित्तीय वर्ष 2025-26 का बजट वित्त मंत्री ने पेश किया। बजट में मनरेगा कर्मियों के लिए कुछ भी नहीं किया है, जिसके चलते मनरेगाकर्मी बजट को निराशाजनक बता रहे हैं। अल्प वेतन में मनरेगा के अलावा प्रधानमंत्री आवास योजना के कार्यों के अलावा शासन के अन्य कार्य लिए जा रहे हैं, उसके बावजूद 4 माह से वेतन नहीं मिल पाया है, जिसके कारण कर्मचारी पीड़ित एवं सरकार के प्रति आक्रोशित हैं। इधर गांवों में मनरेगा के तहत काम करने वाले मजदूरों को भी भुगतान नहीं हुआ।

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