होम्योपैथी में पुरानी बीमारियों का इलाज संभव-डॉ. गौरव गुप्ता

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बैकुंठपुर

10 अप्रैल को विश्व होम्योपैथी दिवस पर डॉ. गौरव गुप्ता ने बताया कि होम्योपैथी केवल एक चिकित्सा पद्धति नहीं है बल्कि हमारी जीवनशैली का एक हिस्सा है। उन्होंने कहा कि एक मां के चेहरे की मुस्कान, जब उसका बच्चा बिना साइड इफेक्ट्स के ठीक होता है, एक बुज़ुर्ग की आंखों में संतोष, जब उन्हें राहत मिलती है, होम्योपैथी के सौम्य इलाज का यही असली प्रमाण है।

डॉ. गुप्ता ने बताया कि होम्योपैथी की नींव डॉ. सैम्युअल हैनीमैन ने 1796 में रखी थी, लेकिन भारत में यह जितनी गहराई से रची-बसी है, वह देखना गर्व की बात है। आज हमारे देश में 3.45 लाख से ज्यादा पंजीकृत होम्योपैथिक चिकित्सक, 277 मेडिकल कॉलेज और 384 दवा प्रमाणित कंपनियां हैं। यह सब मिलकर भारत में एक मजबूत और भरोसेमंद स्वास्थ्य प्रणाली को बढ़ावा दे रहें हैं। आधुनिक युग में जब तकनीक और विज्ञान की गति तेज हुई है, तब होम्योपैथी ने भी खुद को न सिर्फ बनाए रखा है, बल्कि अधिक कुशल और प्रासंगिक बनाकर दिखाया है।

होम्योपैथी इलाज में नहीं खास परहेज

डॉ. गौरव गुप्ता बताते हैं कि वैसे तो होम्योपैथी सभी बीमारियों में कारगर होती है। लेकिन, पुरानी बीमारियों में होम्योपैथी का इलाज ज्यादा असरदार होता है। उन्होंने बताया कि होम्योपैथी में जिस तरह से अगर कोई इस तरह की दवाई या स्टेरॉयड नहीं लेना चाहता जिसका अभी या फ्यूचर में कोई नुकसान है तो वह होम्योपैथी से अपना इलाज कराता है। ऐसे लोग अधिक एलोपैथिक दवाइयां से होम्योपैथी की तरफ आता है।

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