विश्व मलेरिया दिवस की थीम डिवाइन टू एंड मलेरिया नाउ वी कैन, नाउ वी मस्ट का आयोजन

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बैकुंठपुर।

बैकुंठपुर की पावन धरती पर जनस्वास्थ्य के संरक्षण और जागरूकता के संकल्प को साकार करते हुए विश्व मलेरिया दिवस के अवसर पर एक प्रेरणादायी एवं जनोपयोगी पहल देखने को मिली। सेवा, संवेदना और सामाजिक उत्तरदायित्व के समन्वय से परिपूर्ण इस आयोजन में युवाओं ने ज्ञान और जागरूकता का दीप प्रज्वलित करते हुए मलेरिया जैसे घातक रोग के विरुद्ध जनचेतना का सशक्त संदेश प्रसारित किया। आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण और पारंपरिक लोकहितकारी भावना के संगम ने इस अभियान को न केवल प्रभावी बनाया, बल्कि समाज में स्वास्थ्य-सुरक्षा के प्रति सजगता और कर्तव्यबोध का नव संचार भी किया।

मानव स्वास्थ्य की रक्षा और जनजागरूकता के पावन उद्देश्य के साथ विश्व मलेरिया दिवस के अवसर पर 25 अप्रैल को न्यू लाइफ हेल्थ एंड एजुकेशन सोसायटी द्वारा संचालित न्यू लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ नर्सिंग, बैकुंठपुर के तत्वावधान में जिला अस्पताल परिसर में एक प्रेरणादायी एवं जनहितकारी स्वास्थ्य शिक्षा कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में बीएससी नर्सिंग तृतीय वर्ष के छात्र-छात्राओं ने उत्साह, समर्पण और सेवा-भाव के साथ भाग लेते हुए पोस्टर एवं संवाद के माध्यम से आमजन को मलेरिया के प्रति जागरूक किया।

संस्था संचालक डॉ. प्रिंस जायसवाल के मार्गदर्शन तथा प्राचार्य डॉ. अंजना सेम्यूल के कुशल नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य जनसामान्य को मलेरिया जैसी गंभीर एवं जानलेवा बीमारी से बचाव हेतु जागरूक करना था। इस अवसर पर छात्रों ने आकर्षक एवं संदेशप्रधान पोस्टरों के माध्यम से मलेरिया के कारण, लक्षण, उपचार एवं रोकथाम के उपायों को सरल और प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया।

इस वर्ष विश्व मलेरिया दिवस की थीम डिवाइन टू एंड मलेरिया नाउ वी कैन, नाउ वी मस्ट रखी गई है। यह थीम इस तथ्य को रेखांकित करती है कि वर्तमान समय में हमारे पास मलेरिया से संघर्ष करने हेतु पर्याप्त वैज्ञानिक साधन, आधुनिक तकनीकें एवं प्रभावी उपचार उपलब्ध हैं। अतः इस घातक रोग के उन्मूलन के लिए ठोस, संगठित और त्वरित प्रयास करना सम्पूर्ण मानव समाज का दायित्व बन गया है।

मलेरिया एक संक्रामक रोग है, जो संक्रमित मादा एनोफिलीज मच्छर के काटने से फैलता है। विशेषतः वर्षा ऋतु एवं आर्द्र वातावरण में इन मच्छरों की संख्या में वृद्धि होती है, जिससे रोग का प्रसार तीव्र हो जाता है। इस बीमारी के प्रमुख लक्षणों में तेज बुखार, सिरदर्द, ठंड लगना, उल्टी, थकान, चक्कर आना एवं पेट दर्द शामिल हैं। यदि समय रहते इसका उपचार न किया जाए, तो यह विशेषकर बच्चों एवं कमजोर व्यक्तियों के लिए घातक सिद्ध हो सकता है।

कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने लोगों को यह भी बताया कि मलेरिया से बचाव के लिए स्वच्छता बनाए रखना, आसपास जलभराव न होने देना, मच्छरदानी का उपयोग करना तथा समय-समय पर चिकित्सकीय परामर्श लेना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने यह संदेश भी दिया कि लक्षण दिखाई देने पर तुरंत चिकित्सक से संपर्क कर उचित उपचार लेना चाहिए और किसी भी प्रकार की लापरवाही से बचना चाहिए।

इस जागरूकता अभियान का सफल संचालन फैकल्टी सदस्य सुप्रिया तिवारी के निर्देशन में किया गया। कार्यक्रम में छात्रों की सक्रिय भागीदारी और जनसंपर्क ने इसे अत्यंत प्रभावशाली बना दिया।
यह आयोजन न केवल स्वास्थ्य शिक्षा का सशक्त माध्यम बना, बल्कि समाज में स्वास्थ्य के प्रति उत्तरदायित्व और जागरूकता का भाव भी जागृत करने में सफल रहा। विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित इस दिवस का मूल उद्देश्य केवल औपचारिकता तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रत्येक नागरिक को मलेरिया उन्मूलन के लिए सक्रिय सहभागिता हेतु प्रेरित करता है।

अंततः यह कहा जा सकता है कि ऐसे जनजागरूकता कार्यक्रम ही स्वस्थ समाज के निर्माण की आधारशिला हैं, जो न केवल रोगों से बचाव का मार्ग प्रशस्त करते हैं, बल्कि मानव जीवन को सुरक्षित, सुदृढ़ और समृद्ध बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

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