बरसात में बिजली मेंटनेंस बनी विभाग की मुश्किल…..मांगो को लेकर बिजली कर्मचारी हड़ताल पर
संभाग स्तरीय आंदोलन में कोरिया जिले से लगभग 50 कर्मी भी हैं हडताल पर
बैकुंठपुर।
क्षेत्र में मानसून दस्तक दे चुका है। हर साल की तरह इस बार भी बिजली लाइनों के टूटने, फाल्ट बढ़ने और आपात मरम्मत की चुनौती विभाग केलिए बनी हुई है। लेकिन इस बार हालात कुछ अलग हैं। जिन लाइनमैनों के भरोसे पूरे जिले की बिजली व्यवस्था टिकी है, वे अब हड़ताल पर हैं। अपने मांगो को लेकर संविदा कर्मचारियों की मांग नियमितीकरण की है। इधर बिजली कंपनी ने भी कई अगुवा कर्मचारियों को नौकरी समाप्ति का नोटिस थमा दिया है।
अब तक नही निकला सका है समाधान
छत्तीसगढ़ विद्युत संविदा कर्मचारी संघ और बिजली कंपनी प्रबंधन के बीच हुई बैठक से कर्मचारियों को उम्मीद थी कि वर्षों पुरानी समस्या का कोई रास्ता निकलेगा। लेकिन संघ का आरोप है कि बैठक मांगों पर चर्चा करने के लि मौजूद ही नहीं था। संघ का आरोप है कि बैठक में उनकी मुख्य मांगों पर चर्चा करने के लिए कोई अधिकारी मौजूद ही नहीं था। कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें अपनी बात रखने तक का अवसर नहीं दिया गया। नतीजा यह हुआ कि बातचीत खत्म होते ही संघ ने अनिश्चितकालीन कामबंद आंदोलन जारी रखने का ऐलान कर दिया।
41 की करंट लगने से हो मौत चुकी
हडताली कर्मीयो का कहना है कि बिजली लाइन पर काम करना सबसे जोखिम भरे कामों में गिना जाता है। संघ के आंकड़ों के अनुसार अब तक प्रदेश में 41 संविदा कर्मचारियों की करंट लगने से मौत हो चुकी है। सैकड़ों कर्मचारी हादसों में घायल या विकलांग हुए हैं। कोरिया जिले में कई जान जा चुकी है।
18 हजार मासिक वेतन से नही चलता घर
कर्मचारीयो का कहना हे कि जान जोखिम में डाल कर काम करने के बावजूद उन्हें केवल 18 हजार रुपए मासिक वेतन मिलता है। वहीं नियमित कर्मचारी 48 से 50 हजार रुपए तक वेतन पा रहे हैं। बीमा सुरक्षा भी महज एक लाख रुपए तक सीमित है। यानी जान का जोखिम बराबर, लेकिन अधिकार और वेतन में जमीन-आसमान का फर्क।
अब 10 साल बाद भी इंतजार
संघ ने सरकार और प्रबंधन के सामने पुराना रिकॉर्ड भी रखा है। दावा किया गया है कि वर्ष 2007, 2009 और 2011 में भर्ती संविदा कर्मचारियों को महज दो साल के भीतर नियमित कर दिया गया था। लेकिन 2016 और 2018 में भर्ती कर्मचारी आज 8 से 10 साल की सेवा पूरी करने के बावजूद संविदा पर ही काम कर रहे हैं। कर्मचारियों का आरोप है कि एक ही संस्था में दो तरह के नियम लागू किए जा रहे हैं।
मानसून में बढ़ी लोगो की परेशानी
माना जा रहा है कि यह हड़ताल ऐसे समय पर शुरु हुई है जब मानसून के कारण बिजली व्यवस्था पर सबसे ज्यादा दबाव रहता है। लाइन टूटने, ट्रांसफॉर्मर खराब होने और ग्रामीण क्षेत्रों में फाल्ट बढ़ने की आशंका की समस्या लगातार आ रही है। अब ऐसे में यदि आंदोलन लंबा खिंचता है तो इसका सीधा असर उपभोक्ताओं पर पड़ रहा है। ऐसे में सरकार और बिजली कंपनी दोनों पर दबाव बढ़ने लगा है कि वे समाधान निकालें, टकराव नहीं।
सवाल सिर्फ नौकरी का नहीं
हडताली संविदा कर्मचारियों का कहना है कि यह लड़ाई वेतन बढ़ाने की नहीं, बल्कि सम्मान, सुरक्षा और भविष्य की है। वर्षों से स्थायी प्रकृति का काम करने वाले कर्मचारी अब लिखित आश्वासन और नियमितीकरण की प्रक्रिया शुरु होने तक पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। विदित हो कि बिजली कंपनी फिलहाल नोटिस दिखा रही है और कर्मचारी अपनी एकसूत्रीय मांग पर अड़े हैं। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस व्यवस्था का पूरा बोझ संविदा लाइनमैन उठा रहे हैं, क्या उन्हें सिर्फ अस्थायी कर्मचारी मानकर हमेशा टाला जा सकता है? बारिश के मौसम में यह टकराव जितना लंबा चलेगा, उतना ही बिजली व्यवस्था और सरकार दोनों की परीक्षा और कमजोर मानसून में किसानो व समान्य उपभेक्ताओ के लिए बडी समास्या खडी कर दी है।





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