पण्डो आदिवासी की भूमि सामान्य वर्ग के नाम दर्ज होने पर उठे सवाल, अब नोटिस तामिली को लेकर भी सवाल

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बैकुंठपुर।

कोरिया जिले के ग्राम महोरा में पण्डो जनजाति से संबंधित बताई जा रही भूमि के सामान्य वर्ग के व्यक्तियों के नाम दर्ज होने का मामला सामने आया है। मामला खसरा नंबर 950/3 रकबा 0.1000 हेक्टेयर एवं 950/4 रकबा 0.1000 हेक्टेयर, कुल 0.2000 हेक्टेयर भूमि से जुड़ा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार उक्त भूमि पूर्व में सोनकुवर पिता ददई के नाम दर्ज बताई जा रही है। वहीं अनुविभागीय अधिकारी राजस्व बैकुंठपुर द्वारा प्रकरण क्रमांक 2025110113000011/बी-121 में आदेश पारित करते हुए भूमि मजहर खान पिता शेर खान एवं शेर खान पिता सुभान खान के नाम दर्ज किए जाने की जानकारी सामने आई है।

मामले में भूमि के हस्तांतरण के आधार और अपनाई गई राजस्व प्रक्रिया को लेकर सवाल उठ रहे हैं। जिन व्यक्तियों के नाम भूमि दर्ज हुई है, उनके द्वारा कथित तौर पर यह कहा जा रहा है कि उनके पास भूमि से संबंधित वर्षों पुराने दस्तावेज मौजूद हैं। हालांकि, संबंधित दस्तावेजों की प्रति अथवा उनकी विस्तृत जानकारी सामने नहीं आने से पूरे मामले की पारदर्शिता को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। ऐसे में केवल मौखिक दावे के आधार पर भूमि हस्तांतरण की वैधानिकता स्पष्ट नहीं हो सकती।

नोटिस तामिली को लेकर भी उठे सवाल

मामले में एक और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया है। बताया जा रहा है कि हल्का पटवारी अधिकारी के दबाव में नोटिस तामील कराने के लिए संबंधित परिवार के घर पहुंचे थे। उस समय घर में परिवार का कोई बड़ा सदस्य मौजूद नहीं था। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि यदि संबंधित व्यक्ति या परिवार का कोई जिम्मेदार सदस्य घर पर मौजूद नहीं था, तो नोटिस की तामिली किस प्रक्रिया के तहत की गई और इसकी रिपोर्ट में क्या उल्लेख किया गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि आम तौर पर राजस्व संबंधी नोटिस की तामिली के लिए हल्का पटवारी स्वयं घर-घर नहीं जाते हैं। ऐसे में इस मामले में पटवारी के स्वयं नोटिस तामील कराने पहुंचने को लेकर भी चर्चा है। हालांकि, पटवारी किस अधिकारी के निर्देश अथवा दबाव में वहां पहुंचे थे, इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए प्रशासन से पूरे मामले में स्पष्ट जानकारी सामने रखने की मांग की जा रही है।

मूल दस्तावेजों की जांच जरूरी

स्थानीय स्तर पर मांग उठ रही है कि खसरा नंबर 950/3 एवं 950/4 की वर्तमान बी-1 एवं खसरा पांचसाला, पुराने वर्षों के राजस्व अभिलेख, नामांतरण आवेदन, पूरा नामांतरण प्रकरण और पारित आदेश की प्रमाणित प्रतियां सार्वजनिक अथवा संबंधित पक्षों को उपलब्ध कराई जाएं। इसके साथ ही जिस विक्रय पत्र, दानपत्र, वसीयत अथवा अन्य हस्तांतरण दस्तावेज के आधार पर भूमि का नामांतरण किया गया, उसकी प्रमाणित प्रति भी सामने आनी चाहिए। यदि भूमि से संबंधित कोई पंजीकृत दस्तावेज है तो उप-पंजीयक कार्यालय से उसकी प्रमाणित प्रति प्राप्त कर उसकी वैधानिकता की जांच की जा सकती है। मामले में छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता की धारा 170-ख के तहत जांच का विषय भी सामने आता है। यदि जांच में यह पाया जाता है कि आदिवासी खातेदार की भूमि गैर-आदिवासी के नाम कानून में निर्धारित प्रक्रिया के विपरीत गई है, तो सक्षम राजस्व अधिकारी द्वारा नियमानुसार कार्रवाई का प्रश्न उठ सकता है।
पण्डो जनजाति से संबंधित भूमि होने के कारण मामले की संवेदनशीलता और बढ़ जाती है। इसलिए राजस्व विभाग से यह स्पष्ट करने की मांग की जा रही है कि भूमि किस आधार पर और किन दस्तावेजों के आधार पर मजहर खान एवं शेर खान के नाम दर्ज की गई तथा पूरी प्रक्रिया में आदिवासी भूमि से संबंधित कानूनी प्रावधानों का पालन किया गया या नहीं। अब सवाल यह है कि भूमि के नामांतरण का वास्तविक आधार क्या था, वर्षों पुराने बताए जा रहे दस्तावेज आखिर कहां हैं और नोटिस तामिली के लिए हल्का पटवारी को किसके निर्देश पर भेजा गया था? इन सभी बिंदुओं की निष्पक्ष जांच के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

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