तहकीकात न्यूज @ अयुब अंसारी . चिरमिरी
चिरमिरी एसईसीएल के महेश इनक्लाइन आर 5एन सी पी एच खदान जोकि एसईसीएल प्रबंधन के तुगलकी फरमान और गलत निति निर्णय के बाद उक्त खदान को आज बंद कर दिया गया हैऔर जिसमें यह खदान से खदान सम्बंधित सामान निकाला गया जिससे वहां कार्यरत मजदूरों में अफरा-तफरी मच गई।
जानकारी के अनुसार आर 5एन सी पी एच खदान हल्दीबाड़ी मेंलगभग तीनों पानी मिलाकर 328 कोयला कर्मचारी इस खदान में कार्यरत हैं। जिसमें इस खदान में अभी रिजर्व कोल 4लाख 59हजार मिलियन टन कोयला बाकी है जिसमें यह खदान लगभग 15वर्षो तक चल सकता है यह खदान लगभग 350 टन कोयला उत्पादन 1 दिन में करता है।इसके बावजूद बिना किसी कारण से इस खदान को बंद कर दिया गया है जिससे एसईसीएल प्रबंधन की एकतरफा निर्णय किया गया है।

एसईसीएल चिरमिरी में प्रबंधन व्यवस्था पूरी तरह ठप हो चुका है जिसमें इससे प्रबंधन के द्वारा पिछले कुछ सालों से देखा जाए तो दूसरे खदान को चालू कर तीसरे खदान को शुरू किया जाता है ऐसे अदला बदली करके खदान चलाया जा रहा है जोकि सोचने का विषय है इसके साथ ही कोयला कर्मचारियों के हित के लिए ना तो जनप्रतिनिधि और ना ही यूनियन संगठन इस मुद्दे पर नजर आ रहा है।
जानकारी के अनुसार यदि देखा जाए तो एसईसीएल के नियम के अनुसार किसी भी खदान को तत्काल या फिर कुछ समय के लिए बंद करने पर एरिया सेफ्टी बोर्ड और एरिया संयुक्त सलाहकार समिति से चर्चा होने के बाद ही निर्णय लिया जाता है और अगर इस खदान को बंद करने की बात ट्रेड यूनियन और जेसीसी से चर्चा किया गया है तो या कोयला कामगारों के साथ अन्याय पूर्ण कार्य किया गया है।
सलाहकारों और जानकारों के अनुमान से इस खदान में में कुछ संपत्ति हैऔर इस सम्पत्ति को छोड़कर भागना ठीक नहीं है।
अभी भी इस खदान में काफी कोयला बाकी है जिसमें ओपन को यानी सीधा-सीधा कोयला
क ई वर्षों तक निकाला जा सकता है एसईसीएल चिरमिरी प्रबंधन के द्वारा इस तरह से चालू खदान को बंद करने का ऐसा फैसला करना कोल मजदूर के खिलाफ ही नहीं है बल्कि चिरमिरी के अस्तित्व पर भी सवाल और प्रश्नचिन्ह खड़ा करता है।
संजय तिवारी (पूर्व एरिया सैफ्टीबोर्ड मेम्बर )”पूरे प्रकरण मे बिना किसी वजह से खदान बंद करने की निंदा करता हूं साथ ही में खदान बंद करने पर ट्रेड यूनियन और इससे प्रबंधन अपनी स्थिति स्पष्ट नहीं कर रहा है जोकि मजदूरों के साथ हित और राष्ट्र की संपत्ति को छोड़ा जा रहा हैजिसमें अभी भी इस खदान में काफी कोयला बचा हुआ है और लगभग 2 वर्ष और चल सकता है इस तरह से अचानक इस माइस को बंद करना कहीं भी उचित नहीं है
घनश्याम सिंह मुख्य महाप्रबंधक चिरमिरी क्षेत्र”मेरा स्वास्थ्य सम्बन्धी परेशानी है फिलहाल यह खदान बंद नहीं किया गया है
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