तहकीकात न्यूज @ वेब डेस्क . बैकुन्ठपुर
मां दुर्गा की आराधना का महापर्व नवरात्र में कल शनिवार को अष्टमी पर मंदिरो और पंडालो में भक्तो की भीड बढने की संभावना है। इस बार नवरात्र नौ दिन रहेगा। कोरोना काल में बैकुन्ठपुर विधायक वं संसदीय सचिव अमिबका सिंह देव ने लोगो से अपील करते हुए कहा है कि मंदिरो और पंडालो में सोसल डिस्टंेसिंग के पालन के साथ शक्ति आराधना का मुख्यपर्व नवरात्र का आयोजन किया जा रहा है, और लोग पूजा के दौरान भीड के समय अपना और अपने परिजनो का ख्याल रखे।
लोगो में मान्यता है कि जो आराधक नौ दिनों के लिए व्रत-संकल्प करते हैं उनकी मनोकामनाये माता पूर्ण करती हैं। शारदीय नवरात्र उत्सव कलश स्थापन के बाद आदि शक्ति मां दुर्गे की पूजा क्षेत्र में हो रही है। नवरात्र के आगाज के साथ ही शहर में दशहरा पर्व की रौनक बाजारों में दिखने लगी है। लोग जरूरी खरीदारी में जुट गए हैं भक्त नौ दिनों तक माता की पूजा अर्चना करते हैं तथा व्रत रखकर माता से मन मांगा वर पाते हैं। शहर के ओडगी सहित कइ्र पूजा समितियो द्धारा में नवरात्रि पर कलश यात्रा निकाली गई। जिसमें बड़ी संख्या में महिलाएं, पुरुष व बच्चे शामिल हुए।
इन स्थानो पर विराजी माता
विदित शहर के विभिन्न इलाके जिसमें बाजारपारा, डबरीपारा, स्कूलपारा, एसईसीएल, खरवत, आदि के अलावा चरचा में भी कई स्थानो पर पूजा की समितियों द्वारा माता की मूर्ति स्थापित कर पूजा अर्चना की जा रही है। एसईसीएल के सभी क्षेत्रो में प्रायः सातवी से पूजा की शुरुवात होती है जोकि 3 दिनो तक चलता है। इस बार बीते दो दिनो से हो रही बारिश के बाद भी जिस प्रकार की जी तोड मेहनत कर पूजा समितियो के लोग बारिश के बाद भी नवरात्र की तैयारीयां पूर्ण कर ली इसके लिए वे बधाई के पात्र हैं। शक्ति उपासना में दुर्गापूजा का एक अहम स्थान है। जगह-जगह व्यापक रूप से मनाये जाने वाले इस पर्व पर जैसे आस्था का सागर ही उमड़ आता है। इसीलिए प्रतिवर्ष पूजा के समय हर ओर आस्था का एक वैभवशाली रूप देखने को मिलता है। इसके साथ ही दुर्गापूजा हर किसी के लिए अनूठे उल्लास, असीम उत्साह और तरंगित उमंगों का पर्व है।
फल-फूल हुए सब हुए महंगे
स्थानिय बाजार में फलो के दाम में अचानक तेजी आ गई नवरात्री से पहले 40 रु बिकने वाला केला आज 50 और 60 रु बीक रहा है वही 80 रु बिकने वाला सेव 120 रु तो अनार 100 की जगह 160 तो नास्पाति 60-80 रु किलो की दर से बीक रहा है यानि फलो के दामो में 30 से 40 प्रतिशत की वृद्धि देखी जा सकती है। तो 20 रु में बिकने वाला फूलो की माला 30 रु में बीक रहा है। वही पर खडा सिगांघा 200 रु प्रति किलो तो सबूदाना 80-100 रु किलो के भाव से बेचा जा रहा है। तो नया मूगंफली 50-60 रु प्रतिकिलो ग्राम के दर से बेचा जा रहा है।
इस बार कोरोना के कारण भव्यता में कमी
इस बार कोरोना संक्रमण का ध्यान रखते हुए आधे स्थानो पर ही पूजा का आयोजन किया जा रहा है। इस कारण पूजा कमेटियो मूर्तियों का आकर शासन के निर्देश के अनुरुप लगवाये एवं विभिन्न संास्कृतिक आयोजनो पर रोक लगा दिया। खरवत पूजा कमेटी के मंेम्बर गणेश राजवाडे ने बताया कि हमारी पूजा समिति ने कोरोना के मददेनजर रामायण प्रतियोगिता समेत खरवत में कमेटी की ओर से कराये जाने वाले पारंपरिक खेलो के आयोजनो का इस बार नही कराने का निर्णय लिया । जिस कारण इस बार पूजा में सादगी से मनाया जा रहा है।
साधना-उपासना का महापर्व है महाष्टमी
वैसे तो पूरा शारदीय नवरात्र भक्तों के लिए मां की साधना कर उनकी असीम अनुकंपा पाने का अवसर होता है, मगर इसमें भी महाष्टमी की तिथि सबसे महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि यह दिन करूणामयी मां महागौरी को प्रसन्न करने का होता है, जो सहज अपने आशीर्वाद से सबकी झोली भर देती हैं।
आराधना का महापर्व हैं दुर्गाष्टमी
शनिवार नवरात्रि की अष्टमी तिथि है इस दिन भक्त दुर्गा माता के आठवें स्वरूप मां महागौरी की पूजा करते है दुर्गाष्टमी देवी दुर्गा की उपासना करने के सर्वश्रेष्ठ दिनों में से एक माना जाता है। इसलिए देवी दुर्गा के सभी भक्तों को इस दिन मां दुर्गा की उपासना करनी चाहिए।
अष्टमी-नवमी तिथि एक साथ
शनिवार दोपहर के बाद अष्टमी हो जाएगी। अष्टमी और नवमी दोनों तिथि लेगेगी। इन नौ दिनों के दौरान भक्त मां को प्रसन्न करने और उनकी कृपा दृष्टि पाने के लिए व्रत करते हैं। नवरात्रि के नौ दिन तक व्रत किया जाता है. अष्टमी तिथि को हवन होता है और नवमी वाले दिन कंजक पूजन के साथ नवरात्रि का समापन हो जाता है, जिसके बाद नवरात्रि के व्रत का पारण किया जाता है।
कन्या पूजन का विशेष महत्व
यज्ञ करने के बाद व्रतियों को कन्या रूपी देवी को भोजन कराने की मान्यता है इसके बाद उसे उपहार देना चाहिए. कंजक पूजन के बाद देवी भगवती का अपने परिवार के साथ ध्यान करें। मां भगवती से सुख-समृद्धि की कामना करें। इसके बाद ‘या देवी सर्वभूतेषु शांति रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमरू’ मंत्र का ग्यारह बार जाप करें।
शनिवार को नवमी व विजयादशमी समय
हिंदू पंचांग के अनुसार, इस साल महानवमी तिथि की शुरुआत 24 अक्टूबर दिन शनिवार की सुबह 06 बजकर 58 मिनट से हो रहा है, जो कि अगले दिन 25 अक्टूबर दिन रविवार की सुबह 07 बजकर 41 मिनट तक रहेगी। नवरात्रि व्रत पारण 25 अक्टूबर को किया जाएगा। नवमी के दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा होती है। शारदीय नवरात्रि की दशमी तिथि का प्रारंभ 25 अक्टूबर को सुबह 07 बजकर 41 मिनट से हो रहा है, जो 26 अक्टूबर को सुबह 09 बजे तक है। ऐसे में विजयादशमी या दशहरा का पर्व 25 अक्टूबर दिन रविवार को मनाया जाएगा।
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