तहकीकात न्यूज @ वेब डेस्क . बैकुन्ठपुर
छठ को लेकर गुरुवार को बैकुन्ठपुर बाजार में दौरा, सूप जैसी सामग्री मिलनी शुरू हो गई है। बाजार क्षेत्र में सहित कई कई स्थानों पर इसकी बिक्री हो रही है। मौसमी कारोबारियों की ओर से बाजार में आए बांस के सूप, छांटी टोकरी व दउरा की खेप मंगायी जा चुकी है। इसकी कीमत भी मांग के अनुरुप अधिक वसूली जा रही है। लोग दोपहर से ही मार्केटिंग करने में जुट रहे हैं। शहर के विभिन्न जगहों पर लोग मिंट्टी के बर्तन, दौरा, सूप, नारियल, गन्ने आदि की खरीददारी के लिए निकल रहे हैं। इसकी जानकारी देते हुए अमरेष सिहं बताते हैं कि छठ को देखकर बाजार में गन्ना, सूप और दौउरा सबसे अधिक उतारा गया है। इसके दुकानदार बताते हैं कि इस पर्व में दौउरा और सूप सबसे अधिक खरीदा जाता है। इसीलिए खास तौर से एक महीना पहले से कारीगरों से दौउरा बनवाना चालू कर दिया था। अभी सबसे अधिक लोग यही खरीद रहे हैं। इसके अलावा नारियल भी लोग ले जा रहे हैं। एक दो दिन बाद फलों की खरीददारी भी शुरू हो जाएगी। इस पर्व में सूप और दौरा का अधिक महत्व इसलिए भी है क्योंकि डाला सजाने में इन्हीं बांस के बर्तनों का प्रयोग किया जाता है। जिसका काम खरना से शुरू हो जाता है। व्रती इसी दिन से इस पर प्रसाद बनाती हैं। ऐसा माना जाता है कि इस दीये से मन की सारी मुरादें पूरी होती हैं। इसे लोग बहुत खरीदते हैं ये पंचमुखी दीये बाजार में मिल रहे हैं। छठ के दोनों दिनों के अर्घ्य में ये दीये घाट पर जलाए जाते हैं।

पीतल सूपे की मांग बढ़ी
छठ को लेकर व्रतियों को बाजार में पीतल का भी सूप है, व्रतियों की ओर से इस सूप को इस लिए खरीदा जाता है, कि हर वर्ष बांस से बने सूप की खरीदारी से बचा जा सके, पीतल सूप खरीदने के बाद भी बाजार में नया सूप का उपयोग हो, इसके लिए बांस से तैयार सूप भी खरीदारी होती है। बाजार में पीतल सूप व बर्तन के कारोबार से जुड़े कारोबारी का कहना है कि पीतल सूप वजन से हिसाब से बिकता है। बाजार में पीतल 400 से 850 रुपये प्रति किलों की दर पर बिकता है, कारोबारियों की मानें तो ज्यादातर पीतल-कांसा की बर्तन बाजार में 500 से 1100 रुपये के बीच वजन के अनुकूल उपलब्ध है।

ये है इनकी कीमत
गन्ना – 20-30 रुपये
कलश – 50 रुपये
दौउरा -200-250 रुपये
सूप -150-200 रुपये
नारियल – 30 रुपये

छठ घाट का श्रद्धालुओं द्वारा की गई साफ सफाई
शहर के जेल तालाब, राम मंदिर तालाब और रामपुर छठ घाट का श्रद्धालुओं द्वारा गत दो दिनो से साफ सफाई किया गया। इस दौरान प्रमख रूप से नपाअध्यक्ष अशोक जयसवाल, पूर्व नपाध्यक्ष शैलेष शिवहरे, नपा उपाध्यक्ष सुभाष साहू, अनुराग दुबे, सहित बडी संख्या में नगर वासियों एवं श्रद्धालुगण उपस्थित थे।

खरना से छठव्रती का 36 घण्टे का महाउपवास षुरु
छठ व्रतियों के द्धारा गुरु्रवार को दिनभर उपवास कर गोधूलि वेला में खरना जायेगा और ष्षुक्रवार कार्तिक शुक्ल षष्ठी को संध्या अर्घ्य दिया जाएगा। इसके बाद ष्षनिवार सुबह उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देने के बाद पर्व संपन्न होगा। बाजार पूजा की सामग्री जैसे कि दउरा, सूप, नींबू, सिंघाड़ा, मूली, गन्ना व आम की लकड़ियों से सज गए हैं। लोगो के द्धारा तालाबों व नदियो में भी भगवान सूर्य को अर्घ्य देने की तैयारी की गई है। छठ पूजा के सबंध में जानकारो से मिली जानकारी के अनुसार आज से खरना के साथ उपवास शुरू हो रहा है व्रती सुबह से बिना अन्न-जल के रहेंगे। शाम को उनके द्धारा खरना का प्रसाद बनाया जायेगा। व्रतियो द्धारा भगवान सूर्य को भोग लगाने के बाद प्रसाद ग्रहण किया जायेगा। प्रसाद के रूप में गुड़ से बनी चावल की खीर, चावल का पिट्ठा और घी चुपड़ी रोटी बनाई जाती है इस दौरान नमक या चीनी का उपयोग नहीं किया गया। व्रतियों ने स्वच्छता का विशेष ध्यान रखाना होता है। प्रसाद ग्रहण करने के बाद व्रतियों का कठिन उपवास शुरू हो जाता है। शनिवार को उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देने के बाद ही अन्न, जलग्रहण किया जाएगा। लोग बताते हैं कि खरना की परंपरा काफी कठिन है। जब व्रती शाम को प्रसाद ग्रहण करते हैं तो उस समय आसपास आवाज नहीं होनी चाहिए। यदि प्रसाद ग्रहण करते समय आवाज होती है तो व्रती को खाना वहीं छोड़ना पड़ता है। इसके बाद छठ पूजा संपन्न होने के बाद ही कुछ ग्रहण किया जाता है। इससे पहले एक तिनका भी मुंह में नहीं डाला जाता है, इसलिए इसे खरना कहा जाता है। महापर्व की तैयारियों में जुटे क्षेत्र के हजारो परिवारों के घरों में छठ पूजा के यही गीत गूंज रहे हैं। बहंगी लचकत जाए..। छठ पूजा पर गाया जाने वाला यह गीत मानों एक शब्द-चित्र उपस्थित करता है। छठ पूजा से जुड़े लोग बताते हैं कि आज भी उनके गांव में पूजा के लिए गेहूं और चावल को जातें में पीसा जाता है। पूजा को देखते हुए बाजारों में छठ पूजा में इस्तेमाल किए जाने वाले सामानों की खरीद-बिक्री में तेजी आ गई है। वहीं, छठव्रतियों द्वारा जोर-शोर से बांस के बने टोकरे, दौड़ी, सूप, मिट्टी के बरतन के अलावा गन्ना, नारियल, केला, हल्दी, अदरक, मूली और अन्य सामानों की भी जमकर खरीददारी की जा रही है।

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