तहकीकात न्यूज @ वेब डेस्क . बैकुन्ठपुर
विश्व भर में 1 दिसंबर एड्स दिवस के रूप में मनाया जाता है. एड्स दिवस को मनाने का उद्देश्य लोगों को एचआईवी के प्रति जागरुक करना है। साल 2020 में विश्व एड्स दिवस की थीम“वैश्विक एकजुटता साझा जिम्मेदारी” है ।
सीएमएचओ डां रामेश्वर शर्मा ने बताया,” विश्व एड्स दिवस मनाने का मुख्य उद्देश्य लोगो को एड्स के प्रति जागरूक करके इसके खिलाफ लड़ने में सहायता के साथ एएचआईवी संक्रमण की वजह से होने वाली महामारी एड्स के बारे में जागरूकता बढ़ाना है। विश्व स्तर पर एड्स के लिए रोकथाम और नियंत्रण के उपायों को बढ़ाने के लिए, एड्स के इलाज, परीक्षण, तथा एंटीरेट्रोवाइरल थेरेपी के लिये तकनीकी सहायता उपलब्ध कराना जैसे उद्वेश्य निहित है ।”
नोडल अधिकारी डॉ अशोक कुमार सिंह ने बताया,”कोरोना की वजह से इस वर्ष सोशल मीडिया के माध्यम से जागरूकता बढाने जनसमुदाय को प्रेरित किया जाएगा । एड्स के प्रति लोगो के मन व्याप्त भ्रांति को दूर करते हुए इस जानलेवा बीमारी के लक्षणों के प्रति जागरुक करना है, जिससे लोग इसके विषय में सचेत हो सकें और यह बीमारी जड़ से मिट सके। “
जानिए क्या है एचआईवी:
एचआईवी यानी ह्यूमन इम्यूनोडेफिशियंसी वायरस हमारे इम्यून सिस्टम पर असर डालता है। इसके कारण शरीर किसी अन्य रोग के संक्रमण को रोकने की क्षमता खोने लगता है। वहीं एड्स एचआईवी संक्रमण का अगला चरण माना जाता है। शरीर का बैक्टीरिया वायरस से मुकाबला करने की क्षमता खोने लगता है। जिससे शरीर बीमारियों की चपेट में आने लगता है। शरीर प्रतिरोधक क्षमता आठ-दस सालों में ही न्यूनतम हो जाती है। इस स्थिति को ही एड्स कहा जाता है।
इन कारणों से होता है एड्स:
संक्रमित खून चढ़ाने से ,पॉजिटिव महिला से उसके बच्चे को, एक बार इस्तेमाल की जानी वाली सुई को दूसरी बार यूज करने से एवं इन्फेक्टेड ब्लड यूज करने से ।
एचआईवी,एड्स होने के लक्षण में प्रमुख रूप से बुखार,पसीना आना,ठंड लगना,थकान,भूख कम लगना,वजन घटना,उल्टी आना,गले में खराश रहना,दस्त होना,खांसी होना,सांस लेने में समस्या,शरीर पर चकत्ते होना,स्किन प्रॉब्लम आदि है।
एनएफएचएस- 4 के आंकड़ों के अनुसार छत्तीसगढ़ में एड्स जागरूकता के मामले मे 81% से अधिक महिलाओं ने एचआईवी एड्स के बारे में सुना है जिसमें से 93%शहरी क्षेत्र से हैं जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में 70% महिलाएं इस बारे में जानती हैं| जबकि 92% पुरुषों ने एचआईवी या एड्स के बारे में सुना है, रोकथाम और संचरण का ज्ञान पुरुषों में महिलाओं की तुलना में अधिक है|
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