फौती नामांतरण नहीं होने कारण किसान नहीं बेच पाया धान

Estimated read time 1 min read

तहकीकात न्यूज  @ दिनेश बारी . लखनपुर

तहसीलदार व पटवारी की घोर लापरवाही के कारण राजस्व दस्तावेजों में फौती नामांतरण नहीं होने कारण किसान अपना धान समिति में नहीं बेच पाया यह मामला लखनपुर-तहसील क्षेत्र की है
आवेदक तीरथ दास पिता स्वर्गीय देवनंदन जाति बैरागी द्वारा वर्ष 2003 -2004 प्रविष्टि क्रमांक 7
फौती नामांतरण में उसकी बहन आम बाई का नाम सह खातेदार भू-अभिलेखों में छूट गया था आवेदक फौती नामांतरण में नाम जोड़ने के लिए एसडीएम कार्यालय उदयपुर मेआवेदन प्रस्तुत किया था उक्त आवेदन पत्र के परिप्रेक्ष्य में एसडीएम के द्वारा आदेश पारित कर सह खातेदार के रूप में बहन का नाम भू अभिलेखों में दर्ज करते हुए फौती नामांतरण दर्ज किये जाने तहसीलदार पटवारी को एस डी एम द्वारा 28 जून 2019 को आवेदक के बहन का नाम खाते में जोड़ने निर्देशित किया गया था परन्तु मजबूर किसान के दरखास्त को तहसीलदार हल्का पटवारी ने नजरंदाज करते हुए एस डी एम के पारित आदेश का पालन नही किया गया किसान तीरथ दास पिता स्वर्गीय देवनंदन विगत 2 वर्षों से तहसील कार्यालय का चक्कर काटने मजबूर है। विडम्बना है कि अभी तक फौती नामांतरण कर खाता में सुधार नहीं किया गया है। लिहाजा
दो वर्षों से किसान को किसान क्रेडिट कार्ड में खाद बीज के अलावा नगद राशि योजना का लाभ नहीं मिल प रहा है। इतना ही नहीं
किसान के उक्त खाते में लगभग 5 एकड़ भूमि है जिसमें 2 वर्षों से धान बिक्री भी नहीं कर पाया है। दरअसल
फौती नामांतरण के लिए 2 वर्षों से एक आम ग्रामीण किसानों को तहसील कार्यालय का चक्कर काटना पड़ रहा है। इससे जाहिर होता है कि तहसील कार्यालय में आवेदको को फौती नामांतरण के लिए काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। तहसील कार्यालय व्यवस्था के बारे में भी सवाल उठ रहे हैं।
तहसीलदार एवं पटवारी की लापरवाही का खामियाजा किसानो को भुगतना पढ़ रहा है।
एक तरफ शासन प्रशासन ने आवेदको से जुड़ी फौती नामांतरण बंटवारा सिमाकन सहित कई लम्बीत प्रकरणों को
जल्द से जल्द निराकृत करने का निर्देश दिया गया है। वहीं तहसीलदार एवं पटवारी के घोर लापरवाही के कारण ग्रामीण किसान हलकान एवं परेशान हो रहे है । तहसील कार्यालय में लम्बीत प्रकरणों में उलझे गरीब ग्रामीण किसानों का समय और पैसा दोनों बर्बाद हो रहा है इस नुकसान का भरपाई क्या तहसीलदार और पटवारी के द्वारा किया जा सकता है। एक ग्रामीण किसान तीरथ दास विगत 2 वर्षों से धान सहित तमाम कृषि संबंधित योजनाओं के लाभ से वंचित हैं। इतना ही नहीं कई एसे किसान एवं पक्षकार है जिनको तहसील कार्यालय का चक्कर अनावश्यक रूप से काटना पड़ रहा है। एक तरफ प्र्रदेश शासन किसानों के प्रति संवेदना व्यक्त करती है वहीं दूसरी ओर कर्मचारियों के द्वारा इस तरह की घोर लापरवाही देखी जा रहा है।

एसडीएम के आदेश का परिपालन तहसील द्वारा नहीं किया गया।
मामले में यह बात भी सामने आ रही है कि तहसीलदार द्वारा
एसडीएम के आदेश का पालन नहीं किया जाकर खुलेआम आदेश की नाफरमानी की गई आदेश 28 जून 2019 को पारित की गयी थी जिसमें आवेदक तीरथ दास पिता स्वर्गीय देवनंदन जाति बैरागी के आवेदन पर तहसीलदार द्वारा कोई ठोस निर्णय नहीं लिया जाना समझ के परे है तथा एसडीएम के आदेश का खुलेआम उल्लंघन किया जाना है।

तहसील कार्यालय में दलाल सक्रिय— तहसील कार्यालय में दलालों के सक्रिय रहने की चर्चा भी आम है तहसील कार्यालय में लम्बे समय से दलाल सक्रिय हैं।जिस आवेदक द्वारा चढोतरी दी जाती है उनके तहसील संबंधी तमाम कार्य जल्द दुरुस्त हो जाते हैं।

1-बयान उदयपुर एसडीएम एवं प्रशिक्षु आईएएस विश्वदीप यादव से इस सम्बन्ध में बात करने पर बताया कि इस बाबत मुझे कोई जानकारी नहीं है सज्ञान में लेकर उचित कार्यवाही की जायेगी।

as

You May Also Like

More From Author

+ There are no comments

Add yours