कोरोना के दूसरी लहर के प्रभाव विषय पर एक दिवसीय वेबीनार का आयोजन

Estimated read time 1 min read

तहकीकात न्यूज  @  वेब डेस्क . बैकुन्ठपुर

शासकीय नवीन कन्या महाविद्यालय बैकुण्ठपुर के अर्थशास़्त्र, समाजशास्त्र तथा आई.क्यू.ए.सी. के संयुक्त तत्वावधान में गत दिवस को कोरोना के दूसरी लहर का प्रभाव विषय पर एक दिवसीय वेबीनार का आयोजन किया गया। इस वेबीनार में वक्ता के रूप में डाॅ. साधना खरे, विभागाध्यक्ष शासकीय ई.व्ही.पी.जी.काॅलेज कोरबा, डाॅ. नीति जैन विभागाध्यक्ष इंदिरा गांधी नेशनल ट्राइबल यूनिवर्सिटी अमरकंटक, डाॅ. सुचित्रा शर्मा, सहायक प्राध्यापक समाजशास्त्र शासकीय वी.वाई.टी.पी.जी.काॅलेज दुर्ग शामिल हुए। कार्यक्रम की शुरूआत में ही पिछले दो महीनों के दौरान कोरोना महामारी के कारण अपना जीवन खो चुके सभी व्यक्तियों को दो मिनट का मौन रखते हुए श्रध्दांजलि अर्पित की गई। इसके पश्चात महाविद्यालय की प्राचार्य तथा विभागाध्यक्ष अर्थशास्त्र डाॅ. रंजना नीलिमा कच्छप ने सभी अतिथियों का संक्षिप्त परिचय कराते हुए स्वागत किया। प्रथम वक्ता के रूप में डाॅ. साधना खरे ने कोरोना के दूसरी लहर के सामाजिक प्रभावों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि कोई भी वर्ग ऐसा नहीं है जो कोरोना के दूसरी लहर से अछूता बचा हो, लेकिन महिलाओं और बच्चों पर इसका प्रभाव सर्वाधिक पड़ा। उन्होंने घर परिवार से लेकर शिक्षा, रोजगार आदि विभिन्न क्षेत्रों में कोरोना की इस लहर के द्वारा पड़ने वाले प्रभावों पर विस्तारपूर्वक बात रखी। आगे उन्होंने कहा कि इस कठिन दौर में हमें एक दूसरे का साथ व सहयोग बनाये रखने की आवश्यकता है। डाॅ. नीति जैन ने कोरोना के दूसरी लहर के आर्थिक प्रभावों पर बात करते हुए कहा कि निश्चित रूप से कोरोना ने हमारी अर्थव्यवस्था को प्रभावित किया है लेकिन इसका एक अच्छा परिणाम यह हुआ है कि हम अपनी भारतीय संस्कृति तथा प्राचीन परंपराओं की ओर लौट पाये हैं। इस महामारी ने हमें भौतिकतावादी जीवन की निरर्थकता का एहसास कराया। आगे कोरोना की दूसरी लहर के बच्चों पर पड़ने वाले प्रभावों पर तीसरी वक्ता डाॅ. सुचित्रा शर्मा ने विस्तारपूर्वक चर्चा की। उन्होंने इसके सकारात्क एवं नकारात्मक दोनो पहलुओं पर बहुत तार्किक तरीके से अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि जहां कोरोना ने बच्चों को परिवार के साथ समय बिताने, घर के कामों को सीखने जैसा सकारात्मक परिणाम दिया है वहीं बच्चों में बढ़ रहा तनाव, उनकी शिक्षा, अकेलेपन की समस्या जैसे विविध नकारात्मक परिणाम भी सामने आये हैं।

as

You May Also Like

More From Author

+ There are no comments

Add yours