सजना की जिंदगानी के लिए सुहागिनों ने व्रत रख मांगा अमर सुहाग का आशीर्वाद

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तहकीकात न्यूज  @  वेब डेस्क . बैकुन्ठपुर

कोरोना काल में पति की दीर्घायु और सेहत-नेमत की कामना को लेकर गुरुवार को सुहागिनें बड़ी संख्या में वट वृक्ष के नीचे जुटीं। अपने सुहाग की सलामती की मनौती मांग यहां विधि-विधान से महिलाओं ने पूजा-अर्चना की। अपनी मान्यताओं को जीवंत करने सुबह-सवेरे ही विवाहिताओं ने वट सावित्री पूजन को लेकर बैकुन्ठपुर के प्रेमाबाग, गांधी पार्क सहित कई इलाके व मंदिरों मे सुबह से ही सुहगिनों की भीड़ दिख रही है। इस दौरान भी महलाओ ने वट वृक्ष के समीप भीड़ होने के बावजूद शारीरिक का पालन किया। वट सवित्रि पूजा का महत्व बताते हुए ज्योति गुप्ता ने बताया कि आज का दिन सुहगिनो के लिये विशेष दिन है। पति की लम्बी उम्र के लिये निर्जला व्रत रख कर सावित्री, सत्यवान, यमराज के साथ वट वृक्ष की पूजा कर रही है। इस दौरान महिलाओं ने संक्रमण का भी पूरा ख्याल रखा।

यह कथा है प्रचलित


वट सावित्री पूजा सुहागिनों के अखंड सौभाग्य प्राप्त करने का प्रमाणिक और प्राचीन व्रत है। धर्म ग्रंथों में इस बात का उल्लेख है कि व्रत करने से अल्पायु पति भी दीघार्यु हो जाता है। मान्यता है कि जब सत्यवान की आत्मा को यमराज लेने पहुंचे थे, तब उनकी पत्नी सावित्री भी उनके पीछे-पीछे चल पड़ी। यमराज के काफी समझाने के बाद भी जब वह वापस नहीं लौटी, तब विवश होकर यमराज ने सत्यवान के आत्मा का प्रवेश उसके मृत शरीर में करवा दिया। उसी समय सावित्री ने वट की पूजा की थी।

पूजे गए शिव-पार्वती, गौरा से मांगा सुहाग

वट सावित्री पूजा में वट वृक्ष के साथ सत्यवान-सावित्रि और यमराज की पूजा की गई। विष्णुपुराण में वर्णन है कि वटवृक्ष में ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों देव वास करते हैं। इसके समक्ष बैठकर पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। वट सावित्री व्रत के दिन सुहागिन स्त्रियों को प्रातःकाल उठकर स्नान करना चाहिये इसके बाद रेत से भरी एक बांस की टोकरी लें और उसमें ब्रहमदेव की मूर्ति के साथ सावित्री की मूर्ति स्थापित करें। इसी प्रकार दूसरी टोकरी में सत्यवान और सावित्री की मूर्तियां स्थापित करें दोनों टोकरियों को वट के वृक्ष के नीचे रखे और ब्रहमदेव और सावित्री की मूर्तियों की पूजा करें। तत्पश्चात सत्यवान और सावित्री की मूर्तियों की पूजा करे और वट वृक्ष को जल दे वट-वृक्ष की पूजा हेतु जल, फूल, रोली-मौली, कच्चा सूत, भीगा चना, गुड़ इत्यादि चढ़ाया। जलाभिषेक किया।

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