गोठान खाली, सड़क पर डेरा, बढे हादसे, अब पशु मालिकों से भराया जाएगा संकल्प पत्र

Estimated read time 1 min read

तहकीकात न्यूज  @  वेब डेस्क . बैकुन्ठपुर

ग्रामीण क्षेत्रो में खुले में घूमने वाले पशुओं से फसलों को सुरक्षित रखने के लिए रोका छेका की परंपरा का प्रचलन है। शहरों के आसपास भी फसलों, बाड़ियों, उद्यानों आदि की सुरक्षा के लिए नगरीय निकाय क्षेत्र में भी रोका छेका अभियान को लागू किया गया है। सूबे के मुखिया भूपेश बघेल के निर्देश में नगरीय क्षेत्रों को आवारा पशु मुक्त, साफ-सुथरा व स्वच्छ रखने के साथ-साथ दुर्घटनामुक्त रखने के लिए एक जुलाई से जिले के नगरीय निकायों में संकल्प अभियान चलाया जाना है। मवेशियों को रोकने-छेकने का अभियान वृहद रूप में चलाया तो जाता है, लेकिन मवेशियों का राज पूरे साल जिला मुख्यालय बैकुन्ठपुर की सभी सड़कों पर देखा जा सकता है। शहर के बाहरी व अंदरूनी सभी रास्तों पर मवेशी बैठ रहे हैं। खासकर जिला अस्पताल के सामने, पुाने बस स्टैंण्ड एवं सब्जी मण्डी में सड़क के बीचों-बीच मवेशियों के होने से लगातार हादसे हो रहे है। लोग घायल हो रहे हैं। वहीं, यातायात भी प्रभावित हो रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में भी मवेशी सड़कों पर डेरा जमा रहे हैं। यही नहीं मुख्य मार्गो में भी कई चैराहों में मवेशियों के बैठे होने से खतरा बढ़ गया है। वाहनो को खडा करते ही जानवरो के द्धारा डिक्की ममें मुह मार दिया जाता है या फिर थैले में रखे सामनो को जमीन पर बिखेर दिया जाता है। दूसरी ओर मवेशी हादसे की वजह भी बन चुके हैं। इसके बाद भी रोका-छेका अभियान को लेकर पशुमालिक और विभागीय अफसर गंभीरता नहीं दिखा रहे हैं।

शहर में रोका-छेका अभियान पूरी तरह फ्लाप

राज्य शासन की महत्वपूर्ण योजना रोका-छेका अभियान नगर में पूरी तरह फेल है। यहां बड़ी संख्या में घूम रहे बेसहारा मवेशियों को रोकने और पकड़ने वाला कोई नहीं है। परिणाम स्वरुप सड़क के बीचों-बीच झुंड के झुंड मवेशी बैठे रहते हैं। प्रदेश सरकार की रोका-छेका योजना में विभागीय अफसरों की रुचि नहीं होने के कारण फ्लॉप साबित हो रही है। लोगों का मानना है कि सरकार केवल बातों की खेती करती है।

पशु मालिकों से भराया जाएगा संकल्प पत्र

नगरीय निकायों में एक जुलाई से संकल्प अभियान चलाया जाना है। रोका-छेका अभियान के तहत पशु मालिकों से संकल्प पत्र भरवाया जाएगा। जिसमें पशुमालिक शासन-प्रशासन को यह जानकारी भेजेंगे कि वो अपने मवेशियों को घर पर ही बांधकर रखेंगे। सड़कों पर उन्हें नहीं जाने देंगे।

गोठानों से पशु गायब, असामाजिक तत्वो का जमावडा
कां्रगेस सरकार की महत्वकांक्षी योजना नरवा, गरवा, घुरवा, बाड़ी धरातल पर नजर नहीं आ रही है। कोरिया जिले में बने अधिकतर गोठान या तो बदहाली अवस्था में है या फिर असामाजिक तत्वों का अड्डा बनते जा रहे हैं। इसलिए मवेशी सड़क पर आवारा घूमते नजर आ रहे हैं। प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चुनौती मवेशियों को सड़क पर बैठने से रोकना है, किंतु प्रशासन इस दिशा में विफल नजर आ रहा है।
प्रदेश सरकार अति महत्वपूर्ण योजना के क्रियान्वयन में अधिकारियों और पंचायतों की उदासीन रवैया के चलते ग्रहण लगता जा रहा है। जहां प्रदेश सरकार ने पशुधन की रक्षा के लिए सरकारी खजाने का मुंह खोल दिया। वहीं, जिले में अफसरशाही के चलते सरकार की महत्वकांक्षी योजना महज कागजों तक सिमटती जा रही है। पंचायतों को गोठान निर्माण के लिए लाखों की स्वीकृति प्रदान की जाती हैं, किंतु धरातल पर वस्तु स्थिति कुछ और ही बयां कर रही है। सुबह शाम सड़कों पर मवेशियों का जमावड़ा बना रहता है। वहीं, जिले के ज्यादातर बने गोठान असामाजिक तत्वों का अड्डा बन गया है। जिले के ग्रामीण अंचलों में बने गोठानों में मवेशियों की बजाय असामाजिक तत्वों का जमावड़ा बना रहता है। शाम होते ही असामाजिक तत्वों द्वारा उक्त स्थल पर जुआ और शराब की वारदातों को खुलेआम अंजाम दिया जा रहा है।

as

You May Also Like

More From Author

+ There are no comments

Add yours