Baikunthpur @ Tahkikat News
समितियो में धान खरीदी नही होने के कारण दिपावली से पहले खर्चो के लिए आधे दामो पर धान बेचने को मजबूर नजर आ रहे है। किसानो ने बताया कि जिले में लगातार हो रही बारिश के चलते अब बाजार में अर्ली वैरायटी का धान तैयार हो गया है। यदि इस समय समितियाूे में धान बिकता तो हमे नुकसान नही होता । एक ओर त्योहार के समय पैसो की जरुरत के कारण मजबूरी में आधे दाम पर अपनी फसल को बेचना पड रहा है। दूसरी ओर बताया जा रहा है कि स्थानिय बाजार में खरीदार नहीं होने के चलते किसान अनाप सनाप भाव धान बेचने के लिए मजबूर हो रहे हैं। बाजार में किसानों को उनकी मेहनत और लागत का पर्याप्त कीमत नहीं मिल रहा है, इसके चलते किसानों का शोषण हो रहा है। किसान दिपावली खर्च के लिए मजबूरी में 1300-1400 रु. क्विंटल के हिसाब से धान बेच रहे हैं जिससे काफी नुकसान हो रहा है।
त्योहार में पैसे की जरुरत ने किया मजबूर
गौरतलब हो कि हो कि राज्य शासन के द्वारा समर्थन मूल्य पर 2500 प्रति क्विंटल का दर निर्धारित किया गया है किंतु खरीदी की तारीख अभी तय नहीं हो पाई, जिसका पूरा फायदा छोटे व्यापारी तथा कोचिया उठा रहे हैं। किसानों की मजबूरी है कि त्योहारी सीजन में उनकी आवश्यकता है। इसके अतिरिक्त रबी फसल की तैयारी के लिए भी किसानों को पैसा चाहिए जिसके चलते किसान मजबूरी में धान बेच रहे हैं।
पडोसी जिले में खपाया जा रहा धान
व्यापारियों की अगर मानें तो धान की काफी आवक जिले में ष्षुरु हो चुकी है। जो कि सीधे-सीधे व्यापारी के पास पहुंच रहा है और व्यापारी इसे पडोसी सूरजपुर जिले में खपाकर मोटी कमाई कर रहे हैं। वहीं बेबस किसान अपनी मेहनत व पूरी लागत के बाद औने पौने दाम में धान बेचने के लिए मजबूर हो रहे हैं, क्योंकि उन्हें त्योहारी सीजन के अलावा अपने निजी आवश्यकता के साथ-साथ आने वाली फसल की तैयारी भी करनी है।
मौसम बना किसानों के लिए परेशानी का सबब
बार बार आसमान में उमडते घुमडते बादल और बारिष मौसम की अनुकूलता से किसान परेषान हैं किंतु वर्तमान में हो रही लगातार साप्ताहिक अतंराल में हो रही बारिश किसानों के लिए परेशानी का भी सबब बन चुकी है। फसल पकने के दिनों में अच्छी बारिश हुई जिसके चलते किसानों को नुकसान भी उठाना पड़ा। धान खेतों में गिर गए। वहीं कई खेत जहां धान कटने की स्थिति में है उन खेतों में भी पानी भरा हुआ है। ऐसी स्थिति में किसान खेतों से पानी निकालने की व्यवस्था भी कर रहे हैं ताकि खेतों से पानी की समुचित निकासी हो सके। खेत सूख जाए और फसलों की कटाई कर सकें।
कटाई के लिए नहीं मिल रहे मजदूर
अंचल के अधिकांश क्षेत्र में धान की फसल तैयार हो गई है। कटाई के लिए मजदूर नहीं मिलने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। किसानों ने बताया कि साधन संपन्ना कई किसान हैं जिन्हें मजदूर ही नहीं मिल पा रहे हैं। जिनका धान का रकबा अधिक है वे हार्वेस्टर या अन्य साधन से धान कटाई करा रहे हैं लेकिन धान कटाई के लिए खेतों में कई जगह पानी भरे होने की वजह से धान के भीतर गीलापन होने के कारण हार्वेस्टर नहीं घुस पा रहा है। ऐसी स्थिति में वह मजदूर ढूंढ रहे हैं। किसान बड़े रकबा में धान की फसल लिए थे। जिससे फसल समय पर तैयार हो गया है। हालांकि बेमौसम बारिश के चलते धान की फसल को थोड़ा नुकसान भी हुआ है। इसे लेकर वे अब पक चुके धान के फसल की कटाई कराने में लगे हुए हैं लेकिन इसके लिए भी उन्हें मजदूर नहीं मिल रहा है। इससे फसल कटाई कार्य अधर में लटक गया है। ऐसे में किसान अपने परिजनों के साथ फसल कटाई करने विवश है क्योंकि मौसम परिवर्तन के चलते आसमान में बादल छा रहे हैं। ऐसे में यदि बारिश होती है तो उन्हें काफी नुकसान उठाना पड़ेगा।
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