BAIKUNTHPUR @ Tahkikat News……… Develop BY ASHOK SINGH
कोरिया जिले में भीषण सड़क हादसे में 5 लोगों की मौत के बाद इलाके में मातम पसर गया हैं। परिजनो का रो रो कर बुरा हाल है। दूसरी ओर खूनी सड़क को देखकर लोग दिल पसीज गया। घटना के सबंध में मिली जानकारी के अनुसार अलग अलग दो सड़क दुर्घटना में 5 लोगों की मौत हुई है। पहली घटना शाम 7 बजे की आसपास की बताई जा रही है। तो दूसरी घटना रात 1 बजे के आस पास की बताई जा रही है। पहली घटना में छोटे पिकअप से मोटर सायकल व दूसरी घटना में ट्रेलर और स्कूटी में जोरदार भिड़ंत हुई है।
घटना के संबंध में मिली जानकारी के अनुसार पहली घटना चरचा थाना अंतर्गत फूलपुर के जूनापारा में एनएच 43 में शाम 7.15 बजे के आसपास की बताई जा रही है जिसमें जिसमें छोटा हाथी सीजी 15 डीसी 6425 जबकि मोटरसाइकल क्रमांक ग्लैमर क्रमांक सीजी 16 सी.एल. 0875 की मौजूदगी घटना स्थल पर देखी गई । इस घटना में मृतक दो व्यक्तियों के संबंध में चरचा पुलिस ने जानकारी देते हुए बताया कि मोटरसाइकल चालक अमित कुजुर बैकुंठपुर के एलआईसी ऑफिस में डी.आ.े के पद पर पदस्थ था एवं पीछे बैठा एक अन्य विशेष सिंह नाम के व्यक्ति वह भी बैकुंठपुर निवासी है जो एलआईसी ऑफिस में पियून के पद पर पदस्थ बताया जा रहा है। दोनो एल.आई.सी. के काम से उजियारपुर जा रहे थे कि इस दौरान सामने से आ रही छोटाहाथी से टकरा गए । जिससे घटनास्थल पर ही उनकी मौत हो गई ।
दूसरी सड़क हादसे में सरडी चौक के पास रात 12.30 बजे के आसपास की बताई जा रही है। जिसमें स्कूटी सवार तीन युवा चंद्रसेन यादव, दीपक पाल निवासी बैकुन्ठपुर व संजीव नायक निवासी रायगढ जिनकी उम्र लगभग 22 से 23 वर्ष की बताई जा रही है। सामने से आ रही ट्रेलर के चपेट में आने से मौके पर ही तीनों की मौत होना बताया जा रहा है । जिसमें ट्रक क्रमांक एम.पी. 65 एच 4777 व जबकि स्कूटी क्रमांक सीजी 16 सीजे 2781 जोकि मौके पर ही चूर चूर हो गई। सभी मृतको के पीएम कराया जा रहा है ही परिजो का जिला अस्पताल में रो-रो कर बुरा हाल है।
घटना के बाद चालक मौके से फरार
दुर्घटना के बाद अक्सर दो तरह की स्थितियां निर्मित होती हैं। एक तो दुर्घटना के लिए दोषी वाहन चालक का पता नहीं चल पाता और दूसरा अगर वाहन का पता चलता है तो पीड़ित के पास सड़क पर चलने के लिए जरूरी दस्तावेजों की कमी बनी रहती है। कई मामलों में दुर्घटनाग्रस्त पीड़ित के पास लाइसेंस भी नहीं होते हैं। यदि लाइसेंस है तो वाहन का बीमा या फिटनेस नहीं होती है। जिसके कारण न्यायालय में जाने के बाद भी मामले अटक जाते हैं। वैसे कुछ मामलों को लोक अदालत के माध्यम से निपटाने की पहल की जाती है, जो बेहतर साबित हो रही है। उक्त दोनो घटनाओ में यही बताया जा रहा है।
वैज्ञानिक जांच के अभाव में दुर्घटना बीमा में कठिनाई
सड़क हादसों की वैज्ञानिक जांच के लिए वर्षों से चल रही सरकारी खानापूर्ति तो हो रही है, लेकिन हादसों में न तो कमी आ रही न ही मौत की संख्या घट रही। हाइवे पर दौड़ने वाले वाहनों के नंबर स्पष्ट नहीं रहते। नतीजन सड़क हादसों को अंजाम देने के बाद ऐसे चालक पुलिस से बच निकलने में कामयाब रहते हैं। उधर घायलों को दुर्घटना बीमा की राहत राशि प्राप्त करने में कठिनाई होती है। सड़क हादसों की जांच के लिए जिले में एफएसएल अधिकारी मौजूद हैं। सड़क दुर्घटना के गंभीर मामलों की एफएसएल अधिकारी से जांच कराई जाती है। वैज्ञानिक साक्ष्य मिलने पर पुलिस नियमानुसार कार्रवाई भी करती है।
चिन्हित ब्लैक स्पाट के करिब हुई दुर्घटना
शहर हो या रार्ष्टीय राजमार्ग ट्रैफिक दुर्घटनाओं को रोकने ट्रैफिक पुलिस के प्रशिक्षण पर भी सवाल उठ रहे हैं। रात में राष्ट्रीय राजमार्ग 43 में कहीं भी ट्रैफिक पुलिस नजर नहीं आती है यही कारण है कि मार्ग में कहीं दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति के त्वरित उपचार की व्यवस्था थी। राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक 43 पर सड़क हादसों से जुड़े कई ब्लैक स्पाट नजर आए। इस सड़क में दर्जनों ऐसे ब्लैक स्पाट है जहां पर दुर्घटना की आशंका बनी हुई है। विशेषज्ञों के अनुसार दुर्घटना के मामलों में वैज्ञानिक जांच का स्तर का ठीक नहीं होने के कारण पीड़ितों को उनका हक लगभग नहीं के बराबर ही मिल पाता है। वहीं शहर में यातायात पुलिस में अमले की कमी और प्रशिक्षण में व्यावहारिक ज्ञान शामिल नहीं होने के कारण भी पीड़ितों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। बीती रात की 1 घटना भी एैसे ही स्पाट के करिब की बताई जा रही है।
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