बगैर लाइसेंस संचालित नर्सिंग होम….विभाग ने किया सील
क्षेत्र में उस समय सनसनी फैल गई जब लोगों को है जानकारी हुई की एमसीबी जिले के जिला मुख्यालय मनेंद्रगढ़ के एक नर्सिंग होम के संचालक के द्वारा रूटीन जांच पर गए अधिकारियों से अभद्रता एवं उन्हें जबरन बंधक बनाने तक की कोशिश की गई । इस दौरान जांच अधिकारियों में जिसमें वरिष्ठ एमसीबी-मनेंद्रगढ़ कोरिया जिले के जिला कार्यक्रम प्रबंधक डॉ प्रिंस जायसवाल मनेंद्रगढ़ के खान नर्सिंग होम में रूटीन जांच के लिए पहुंचे । पहले तो नर्सिंग होम संचालक के द्वारा अधिकारियों से असहयोग किया जाने लगा । फिर उन्हें जब उससे बात ना बनी तो फिर उन्हें धमकी चमकी तक दी जाने लगी एवं यह कहा जाने लगा कि जब तक लाइसेंस नहीं दोगे तब तक यहां से छोड़ा नहीं जाएगा ।
उन्हें जबरन बंधक बनाने तक की कोशिश की गई । बड़े मुश्किल से दोनों अधिकारी अपनी जान माल की रक्षा करते हुए मौके से निकलने में कामयाब हुए । इसके बाद उन्होंने इसकी सूचना स्थानीय जिला प्रशासन समेत अपने विभाग के प्रमुख को दी । जिसके बाद आज सोमवार 23 तारीख को जिला प्रशासन एवं पुलिस प्रशासन सहित विभागीय अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर उक्त नर्सिंग होम को सील किया एवं अधिकारियों से किए गए दुर्व्यवहार की भी कार्रवाई की बात कही जा रही है वहीं पर बताया जा रहा है कि नर्सिंग होम के संचालक के द्वारा एवं उनके पुत्र दोनों के द्वारा ही अधिकारियों के साथ दुर्व्यवहार की घटना को अंजाम दिया गया एवं वर्तमान में दोनों मौके से फरार हैं।
स्वास्थ्य विभाग ने प्रशासन और पुलिस की टीम के साथ खान नर्सिंग होम पर छापा मारकर सील कर दिया। बताया जा रहा है कि उक्त नर्सिंग होम पिछले दो साल से बिना लाइसेंस के ही संचालित था। उल्लेखनीय है कि, एमसीबी जिले के सबसे बड़े नर्सिंग होम, खान नर्सिंग होम पर प्रशासन, पुलिस और स्वास्थ्य विभाग का छापा पड़ा है। इस कार्रवाई के बाद सोनोग्राफी कक्ष को सील किए जाने की जानकारी मिली है। बताया जा रहा है कि यहां जांच के दौरान अनियमितता पाई गई थी। लाइसेंस की वैधता समाप्त होने के बावजूद पीसीपीएण्डडीटी एक्ट के उल्लंघन को लेकर प्रशासन ने कार्रवाई की है। बताया जा रहा है कि नर्सिंग होम के पास 2020 तक का लाइसेंस था और पिछले 2 साल से बिना लाइसेंस के ही इस नर्सिंग होम में सोनोग्राफी की जा रही थी।
गौरतलब हो कि संयुक्त कोरिया जिले में विभिन्न जगहों पर अवैध नर्सिंग होम का धड़ल्ले से संचालन पर लाख प्रयास के बाद भी लगाम नहीं लग पा रहा है। बैकुन्ठपुर से लेकर जिले के छोटे स्थानो पर भी निजी नर्सिंग होम का कारोबार फैला हुआ है। कोरिया एवं एमसीबी जिले में अनुमति प्राप्त 17 नर्सिंग होम संचालित हैं। जबकि कई निजी नर्सिंग होम द्वारा निबंधन का आवेदन विभाग के पास लंबित है। सबसे रोचक पहलू यह है कि बहुत से संचालक लाईसेंस का रेनुअल जान बूझकर नही कराते हें जैसा की वर्तमान केस में बताया जा रहा है। सील किये गये संस्था के द्धारा 2 सालो से लाईसेंस के लिए आवेदन नही किया गया था।
गंभीर व अहम मुद्दे की विभाग कर रहा अनदेखी
पिछले कुछ वर्षों में जिले में अवैध नर्सिंग होम का गोरखधंधा लगातार फल-फूल रहा है। लेकिन विभाग इस गंभीर व अहम मुद्दे की लगातार अनदेखी कर रहा है। बिचौलिए की मदद से इन नर्सिंग होम में मरीजों की भीड़ लगी रहती है। दलाल मरीजों को फंसाने के बाद नर्सिंग होम, अल्ट्रासाउंड केंद्र पर ले जाते हैं और वहां जाने के बाद रोगियों का आर्थिक व मानसिक शोषण करते हैं। इस गोरखधंधे में सैकड़ों की संख्या में दलाल पूरे जिले में सक्रिय है। जिसका कनेक्शन स्थानीय नर्सिंग होम से लेकर पटना तक के कई निजी नर्सिंग होम तक है।
मरीजों से वसूली जाती है मोटी रकम
जिले भर में कई अवैध नर्सिंग होम संचालित हैं। कई नर्सिंग होम के आगे एमबीबीएस डॉक्टर के बोर्ड लगे हैं। लेकिन वहां इलाज झोलाछाप डॉक्टर ही करते हैं। हद तो यह कि कई झोलाछाप नर्सों ने भी अपने नर्सिंग होम के आगे स्त्री एवं प्रसव रोग विशेषज्ञ का बोर्ड लगा रखा है। वे कमीशन के लिए सरकारी अस्पताल से भी मरीजों को निजी नर्सिंग होम लाते हैं फिर इलाज के नाम पर मरीज का दोहन करते हैं।
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