चिरमिरी के जनता के साथ हुआ विश्वासघात जनता नही करेगी माफ – महेश प्रसाद

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चिरमिरी एसईसीएल क्षेत्र जो कोलांचल की नगरी कहां जाता था आज इस मुकाम में पहुंच चुका है चिरमिरी को बचाना मुस्किल हो रहा है और जनसंख्या की बात करे दिन प्रतिदिन जनसंख्या कम होने के कारण व्यापार में सबसे ज्यादा प्रभाव पड़ रहा है चिरमिरी को बचाना बहुत ही जरूरी है इस क्षेत्र को बचाना कैसे है अगर इस ओर जनप्रतिनिधियों का ध्यान गया होता तो शायद आज चिरमिरी की दशा कुछ और होता मगर सत्ते नशे में चूर उन्होंने अपने ही घर को नही छोड़ा चिरमिरी की जनता से विकाश के नाम पर केवल वोट लेकर सत्ता का सुख भोगने का काम किया और उन्होंने जेब का विकास किया है चिरमिरी की भोली भाली जनता को इन्होंने छला है विश्वासघात किया है जो चिरमिरी की जनता इन्हे कभी माफ नहीं करेगा इनके पास एक मौका था चिरमिरी में रोजगार लाकर चिरमिरी को बचाया जा सकता था लेकिन उन्होंने चिरमिरी के माटी के साथ धोखा दिया है जो चिरमिरी की जनता कभी नहीं भुलाएगी अगर बात करे वर्तमान विधायक की इनके ही वरिष्ट कांग्रेसियों का कहना है हमारे विधायक नाकाम रहे पूरे विभाग हमारे हाथ से चले गए क्या जनता के साथ विश्वासघात करना सही है सरकार इनकी विधायक इनकी महापौर भी इनका विकास भी केवल इनका
चिरमिरी में एसईसीएल का सड़क एसईसीएल का बिजली एसईसीएल पानी एसईसीएल का घर न जाने आज एसईसीएल न होता तो यहां के बेरोजगारों का क्या होता चिरमिरी के आधे से ज्यादा जनसंख्या एसईसीएल के भरोसे है । चिरमिरी के माटी से बने माटी पुत्र शायद चिरमिरी के माटी का मूल्य भूल चुके हैं जिसने उन्हें नाम दिया पहचान दिलाई आज वही चिरमिरी के अस्तित्व की रक्षा नही कर पा रहे हैं। यदि चिरमिरी में एस ई सी एल द्वारा कोई कार्य नहीं किया जाता तो विद्यायक महोदय एस ई सी एल कार्यालय को ताला लगा देते हैं। लेकीन निगम द्वारा बार बार गलतियां करने पर भी विद्यायक जी के कानो में जू तक नही रेंगी शायद इसलिए कि महापौर भी इनकी अपनी हैं। लेकीन विधायक जी इस बात को याद रखें की वे पूरे विधान सभा क्षेत्र के विद्यायक है न की निगम के आज वृद्ध जनों के पेंशन से लेकर नल जल योजना तक के कार्य नहीं किए जा सके है यहां तक कि चिरमिरी वासियों को शुद्ध जल तक नही दिया सका है। लेकीन विधायक जी भूमी पूजन के पीछे पुर जोर पड़े हैं। उनको जनता के लिए कोई हमदर्दी नही उनको केवल अपने बड़े बड़े टेंडरों की पड़ी है। ताकि वे और उनके खास ठेके दारों का पेट भरा रहे चाहें एक वृद्ध बीना पेंशन के और एक कर्मचारी बिना वेतन के भूखे मर जाए उनको इससे कोइ सरोकार नहीं है।

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