संघ ने तैयारी की बीजेपी के जीत की जमीन…… माइक्रो मैनेजमेंट बना सूत्रधार

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छत्तीसगढ विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को इतनी बड़ी जीत मिली है। इस जीत में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के उन लाखों कार्यकर्ताओं का महत्वपूर्ण योगदान रहा, जिन्होंने रात-दिन जमीनी स्तर पर काम किया यह कहना है संघ के बैकुन्ठपुर शाखा के बडे पदाधिकारी का किन्तु उन्होने नाम न छापने की बात कही जिसका कारण बताते हुए उन्होने कहा कि संघ कभी भी सामने आकर काम नही करता है और न ही अपने कामो का प्रचार करता है। उन्होने बताया कि संघ के विभिन्न अनुषांगिक संगठनों की ओर से गांवों में किए जा रहे कार्याे का लाभ भी भाजपा को मिला। वर्तमान विधानसभा चुनाव में तीो राज्यो में मिली इतनी बड़ी जीत में तो संघ परिवार के कार्यकर्ताओं के योगदान को भुलाया नहीं जा सकता है। चुनाव की घोषणा होने के पहले से लेकर चुनाव समाप्त होने तक कार्यकर्ता सुबह घर से निकलते थे और देर रात वापस आते थे। चाहे संघ के अधिकारी हों या सामान्य स्वयंसेवक, जिनको जो जिम्मेदारी दी गई, उसे बखूबी निभाया। इनमें अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, एकल विद्यालय, हिंदू जागरण मंच, विकास भारती, सेवा भारती, वनवासी कल्याण केंद्र, धर्म जागरण, विश्व हिंदू परिषद, सरना समिति, विद्या भारती सहित लगभग 35 संगठनों के कार्यकर्ता इस अभियान में लगे थे। डनहोे बताा कि संघ व उसके अनुषांगिक संगठनों के तीन लाख से अधिक कार्यकर्ता छत्तीसगढ में चुनाव अभियान में लगे थे।
उन्होने कहा कि मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव में भाजपा ने इतने प्रचंड बहुमत के साथ जीत हासिल की कि कांग्रेस के पैरों तले की जमीन ही खिसक गई जबकि । इन तीनों राज्यों में कांग्रेस सत्ता में वापसी का सपना संजोए बैठी थी। चुनाव अभियान के दौरान कांग्रेस के चुनावी रणनीतिकारों को इस बात का जरा सा भी एहसास नहीं हो पाया कि जिस संघ की आलोचना करने में वे सारी हदें पार कर जाते हैं उसी संघ के लाखों कार्यकर्ता मैदानी स्तर पर दिन रात पसीना बहाकर कर भाजपा की शानदार जीत सुनिश्चित करने में प्राणपण से जुटे हुए हैं । सबसे बड़ी बात यह है कि चुनाव परिणामों की घोषणा के बाद राष्ट्रीय संघ ने भाजपा की प्रचंड विजय में अपने महत्त्वपूर्ण योगदान का श्रेय लेने की कोई महत्वाकांक्षा भी प्रदर्शित नहीं की। अब कांग्रेस को यह चिंता सता रही है कि अगले साल के उत्तरार्द्ध में होने वाले लोकसभा चुनावों में अपनी प्रतिष्ठा कैसे बचाई जाए और संघ अपनी उसे रणनीति को अंतिम रूप देने में जुट गया है जिसके माध्यम से वह आगामी लोकसभा चुनावों में भाजपा की 2019 से भी बडी जीत सुनिश्चित करने में सफल हो सकेगा। कांग्रेस के सामने सबसे बड़ा संकट यह है कि वह तीन राज्यों में अपनी करारी हार से हताश उन पार्टी कार्यकर्ताओं को किस मुंह से लोकसभा चुनाव की तैयारियों में जुटने के तैयार करे जिनके मनोबल को इन चुनाव परिणामों ने न्यूनतम स्तर पर पहुंचा दिया है। कांग्रेस कार्यकर्ताओं के मन में अब यह धारणा बनना स्वाभाविक है कि देश की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी अब इतनी सक्षम नहीं रह गई है कि अपने कार्यकर्ताओं के सुरक्षित भविष्य की गारंटी दे सके।
उन्होने बताया कि यह भी अपने आप में एक विडम्बना है कि एक ओर तो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की गारंटी पर पूरे देश को भरोसा है और दूसरी ओर कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष राहुल गांधी की गारंटी उनके अपने कार्यकर्ताओं को भी स्वीकार्य नहीं है। प्रधानमंत्री मोदी की इसी गारंटी को देश में हर परिवार तक पहुंचाने की जिम्मेदारी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने अपने कंधों पर ली है जो विश्व का सबसे बड़ा स्वयंसेवी संगठन है। तीन राज्यों की विधानसभाओं के चुनाव परिणामों से यह सिद्ध हो गया है कि संघ जो भी जिम्मेदारी अपने कंधों पर लेता है उसे पूरी शिद्दत के साथ निभाता है।

संघ ने तैयारी की बीजेपी के जीत की जमीन

छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव 2023 के लिए संघ और अनुशांगिक संगठनों ने तैयारी आज से उेए साल पहले ही शुरु कर दिया था। बीजेपी को जीत दिलाने के लिए कार्यकर्ता जमीन पर उतरे के साथ ही संगठनात्मक स्तर पर कई तैयारियां भी की ।

अब लोकसभा की तैयारी

छत्तीसगढ़ में संघ और अनुशांगिक संगठन अब लोकसभा चुनाव में बीजेपी की जीत के लिए जमीन तैयार कर रहे हैं। ऐसा इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि चाहे विश्व हिंदू परिषद हो, भारतीय किसान संघ हो या आरएसएस सभी की सक्रियता प्रदेश में बढ़ गई है। यहां तक कि पिछले दिनों विश्व हिंदू परिषद और भारतीय किसान संघ की राष्ट्रीय स्तर की बैठकें जल्द ही रायपुर में होने जा रही रही है।

जल्द हो सकती है संघ की बैठक

बताया जा रहा है कि समसामयिक विषयों पर तो चर्चा और चिंतन होगी ही, साथ ही संघ और 2024 में बीजेपी संगठन में समन्वय से सत्ता में वापसी पर भी चर्चा होगी। जानकारी ये भी है कि धर्मांतरण और हिंदुत्व के मसले को लेकर भी विस्तृत बातचीत होगी और आगे की रणनीति तैयार होगी।

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