भाजपा ने कोरबा लोकसभा सीट पर मोदी लहर के बावजूद जीत की राह मुश्किल नजर आ रही है। छत्तीसगढ़ की सभी 11 लोकसभा सीटें जीतने के लक्ष्य के साथ चुनाव प्रचार अभियान में जुटी भाजपा के लिए कम से कम आधा दर्जन सीटों पर कांग्रेस के चक्रव्यूह को तोड़ना आसान नहीं होगा। कांग्रेस ने सभी सीटों पर ऐसे नेताओं को टिकट दी है जिनकी जमीनी पकड़ मजबूत है तथा वे मोदी की गारंटी के नाम पर भाजपा के संकल्प को ध्वस्त कर सकते हैं। प्रदेश की राजनांदगांव लोकसभा सीट के बाद दूसरी हाई-प्रोफाइल सीट है कोरबा है। राजनांदगांव से पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल चुनाव लड़ रहे हैं तो कोरबा में भाजपा की सरोज पांडे की प्रतिष्ठा दांव पर हैं। सरोज पांडे छत्तीसगढ़ से भाजपा का राष्ट्रीय चेहरा है पार्टी की राष्ट्रीय महासचिव रहने के अलावा वे महिला मोर्चे की राष्ट्रीय अध्यक्ष, राज्यसभा सदस्य, लोकसभा सदस्य, विधायक व एक दशक तक दुर्ग की मेयर रह चुकी हैं। वही पर छत्तीसगढ में भाजपा के सबसे चेहरे रमन सिंह के धूर विरोधी मानी जाती है। वही पर चरणदास महंत और उनके परिवार का परम्परागत सीट की कही जा सकती है। इस लिए जीत के लिए भाजपा के मोहरे को जानकार गलत बता रहे हैं। ओबीसी बाहुल्य क्षेत्र में महंत परिवार को चुनौति देने भाजपा ने सेनापति का चयन ही लगता है गलत कर लिया । फिर भी अमित शाह ने सरोज पांडे को उस कोरबा को जीतने का लक्ष्य दिया गया है ।
दूसरी ओर पूरे कोरबा लोकसभा में भाजपा के नेताओं की गुटबाजी को कम करने के लिए बाहरी उम्मीदवार को कोरबा लोकसभा क्षेत्र का उम्मीदवार घोषित किया है। पार्टी के इस फैसले से लोकसभा लड़ने की उम्मीद पाले बैठे स्थानीय नेताओं को तगड़ा झटका लगा। हालांकि, नाम घोषित होने के बाद अमित शाह की लाडली भाजपा उम्मीदवार सरोज पांडेय ने लोकसभा के सभी विधानसभाओं का दौरा कर सभी बड़े नेताओं से मुलाकात किया इसके बावजूद पार्टी कार्यकर्ता खुश नहीं है।
कोरिया जिला कोरबा लोकसभा का हिस्सा है यहां लोकसभा चुनाव के बीच भाजपा अंतर्विरोध की मार झेल रही है दरअसल, लोकसभा चुनाव के लिए कोरबा लोकसभा सीट से बाहरी प्रत्याशी को टिकट मिलने के बाद भाजपा के नेताओं में अंदरूनी नाराजगी देखने को मिल रही है। यहां पार्टी के नेता ही बिखरे हुए दिख रहे हैं साथ ही गोंडवाना पार्टी के दखल से इस हाई प्रोफाइल सीट पर अब मुकाबला भी रोचक होने की संभावना है।

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