गिरजापुर और पटना में चौकाने वाले कारनामें हुए, आज तक कार्यवाई नही जबकि अन्य कई समितियो की शिकायत पर विभाग मौन
कोरिया जिले का सहकारिता विभाग इन दिनो जिस तरह से कार्य कर रहा है उससे स्पष्ट प्रतित होता है वर्तमान में इस विभाग के अधिकारियो की नजरो में सिर्फ एक ही समिति प्रबंधक जिल्लेईलाही बने हुए हैं। और विभाग में इनकी सुनी भी जा रही है। अब इसके पीछे कौन सा रसायन इस गठबंधन को जोडने का कार्य कर रहा है यह बात भी आगे सामने आ जायेगा। इन हजूरे-आला के लिए शासन के हर नियम कानून को ताक पर रख कर काम किये जा रहे हैं। बैकुंठपुर की जामपारा समिति को छोड़कर अन्य सभी समितियां में खाद-बीज व नगद राशी का किसानो में वितरण किया जा रहा है। जबकि शुक्रवार की शाम तक जामपारा समिति में एक भी किसान को ऋण वितरण नही किया गया है। शुक्रवार की शाम तक समिति कर्मियों से मिली जानकारी के अनुसार मात्र 08 किसानों में साढे तीन लाख का क्रेडिट ऋण वितरण के कागजात तैयार किए गए हैं। जबकि जामपारा समिति में 2140 पंजीकृत किसानों में मानसून पूर्व किस तरीके से खाद-बीज एवं नगद का वितरण होगा या अपने आप में बड़ा प्रश्न है। वहीं पर शुक्रवार को दोपहर में जामपारा समिति में अधिकृत बताया जा रहे समिति के कर्मचारी दोपहर में गायब मिले इस दौरान पुराने प्रबंधन के कुछ कर्मी वहां मौजूद थे । जिनके द्वारा यह जानकारी उपलब्ध हो सकी।
गौरतलब हो कि जामपारा समिति 6 महीना से जानबूझकर कुछ षड्यंत्र पूर्वक विभागीय साठ-गाठ कर लगातार जामपारा समिति को विवाद में रखा गया। जिसे आधार बनाकर वर्तमान समिति प्रबंधक को किनारे लगाया गया। जबकि मामला हाईकोर्ट में होने व हाई कोर्ट के दो फैसलो 24 जनवरी और 20 मई दोनो में ही यथा स्थिति बनाये रखने का आदेश दिया गया था। इसके बावजूद सहकारिता विभाग के द्धारा मनामाने निर्णय लिया गये।
जबकि अन्य समितियां में यह दिखाने का प्रयास किया जाता है जिले के बाकी सभी समितियां में राम-राज्य चल रहा है। दूसरी ओर जिले का ऐसा कोई समिति नहीं है जहां पर समिति प्रबंधक विवाद के दायरे से बाहर हो। गिरजापुर और पटना सहित ऐसे कई विवादित समितियां हैं जहां पर बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार किया गया है । किंतु जिले में एक संगठन बनाकर इस तरीके से यह दिखाने का प्रयास किया जाता है कि सिर्फ एक ही समिति में विवाद है बाकी सभी समितियां का दामन गंगा जल की तरह साफ है। जिले की कई समितियां के संबंध में कोरिया कलेक्टर से कृषकों के द्वारा शिकायतें भी की गई है जिन पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है और यही कारण है कि केसीसी सहित शासन की अन्य योजनाओ में जमकर फर्जीवाडा किया गया। जिला प्रशासन द्धारा यदी ईमानदारी से जाच की जाये तो अधिकांश प्रबंधको को उनका अक्स उनके ही आईने में साफ नजर आने लगेगा।

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