कोरिया जिले के मुख्यालय बैकुंठपुर में स्थित शर्मा अस्पताल की शिकायत राज्य शासन से की गई है। शिकायतकर्ता ने 10 दिन के भीतर कार्रवाई नही होने की स्थिति में न्याय के लिए न्यायालय की शरण में जाने की बात कही है। 27.05.2024 शासन को लिखे पत्र में बैकुंठपुर निवासी डॉ. प्रिंस जायसवाल ने डॉ. राकेश कुमार शर्मा, संचालक शर्मा हॉस्पिटल के द्वारा स्वास्थ्य विभाग अंतर्गत गर्भधारण पूर्व और प्रसवपूर्व लिंग चयन प्रतिषेध अधिनियम 1994 पी.सी.पी.एन.डी.टी. एक्ट का लगातार उल्लघंन करने के कारण जांच कराकर अपराधिक प्रकरण दर्ज कराने की मांग की है।
अपने पत्र में उन्होने कहा है कि मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, बैकुण्ठपुर, जिला कोरिया से सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत प्राप्त जानकारी अनुसार डॉ. राकेश कुमार शर्मा, संचालक शर्मा हॉस्पिटल, बैकुण्ठपुर, जिला कोरिया के द्वारा पी.सी.पी.एन.डी.टी. एक्ट का लगातार उल्लघंन किया जा रहा है। शर्मा हॉस्पिटल द्वारा सोनोग्राफी मशीन के संचालन हेतु नवीन ऑनलाईन आवेदन होने उपरांत नया पंजीयन लायसेंस प्रदान करने पश्चात् ही सोनोग्राफी मशीन का संचालन किया जाना था। उन्होने आरोप लगाया कि पी.सी.पी.एन.डी.टी. एक्ट 1996 नियम 3 (3) (1) के नियमानुसार डॉ. राकेश कुमार शर्मा गभर्वती महिलाओं की सोनोग्राफी के लिए आवश्यक योग्यता नहीं रखते। अतः सोनोग्राफी का कार्य केवल डॉ. रजनी शर्मा द्वारा किये जाने का शपथ पत्र लिया जाये।
डॉ. राकेश कुमार शर्मा को भविश्य में एक्ट संबंधित किसी भी प्रकार का उल्लघंन करने पर मशीन सील की कार्यवाही की जाने का आदेश पारित किया गया जाये। कलेक्टर व पर्यवेक्षी प्राधिकारी क्लिनिकल स्थापना पंजीयन एवं लाईसेंसिंग, जिला कोरिया के आदेश क्रमांक/नर्सिंग होम एक्ट/2023/417 बैकुण्ठपुर, दिनांक 05.10.2023 के अनुसार पुनः शर्मा हॉस्पिटल में पी.सी.पी.एन.डी.टी. एक्ट 1994 की धारा 18 (1) के तहत सोनोग्राफी मशीन का रजिस्ट्रेशन प्राप्त किये बिना सोनोग्राफी का कार्य किया जाना पाया गया।
उन्होने पत्र में कहा है कि डॉ. राकेश कुमार शर्मा, चिकित्सा प्रकोष्ठ, भारतीय जनता पार्टी, कोरिया के जिला संयोजक हैं एवं उनकी पुत्रीयां प्रशासनिक सेवा में बडे पदों पर कार्यरत हैं। इन तमाम प्रकरणों में इनके विरूद्ध कार्यवाही न होने से इनका हौसला लगातार बढ़ता जा रहा है। यही कारण है कि इनको यह भ्रम हो गया है की प्रशासन एवं पुलिस इनके विरूद्ध कोई कार्यवाही नहीं कर सकता, जिसका ये दावा भी सरेआम करते हैं। उन्होने कहा कि जांच कर कार्यवाही न होने पर आवेदक न्यायालय में प्रकरण दर्ज कराने हेतु विवश होगा।


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