संघ के स्थानिय नेता भी मिली हार से नाराज
देश में भाजपा के 400 पार का नारा फेल हो गया हालत भाजपा की सरकार एनडीए के सहयोगियो के बैसाखी के सहारे नजर आ रही है। माना जा रहा है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भारतीय जनता पार्टी के रिश्ते पिछले 10 साल में अब तक सबसे खराब दौर से गुजर रहे हैं। टिकट बंटवारे में पहले भारतीय जनता पार्टी के संगठन मंत्री जो प्राय राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से आते रहे हैं उन्हें काफी अहमियत दी जाती थी लेकिन इस बार टिकट बंटवारे में या पार्टी स्तर पर सीट्स निर्णय में राष्ट्रीय संगठन मंत्री दरकिनार हो गए ।
माना जाता है कि पन्ना प्रमुख को सक्रिय करने और घरों से मतदाताओं को निकाल कर बूथ तक निकल कर लाने में आरएसएस की बड़ी भूमिका रहती है लेकिन इस बार भाजपा से बेहतर तालमेल न होने की वजह से संघ के कार्यकर्ता घर में बैठ गए हैं जिसका असर यह हुआ है कि वोटिंग परसेंटेज में 10 से 15 प्रतिशत तक गिरावट आई है और लोगों का मानना है कि सरकार से नाराज लोग अपना मतदान करने बूथ तक नहीं गए।
संघ के लोगो का कहना है कि हालात इतने खराब है कि संघ के किसी बड़े नेता की सिफारिश पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है जिससे कार्यकर्ता बेहद नाराज हैं और घर बैठ गए हैं।
राष्ट्रवाद पर भारी पड़ रहा है जातिवाद
कहां यहां जा रहा है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने एक अंदरूनी सर्वे किया है जिसमें किसी भी दशा में भाजपा की सरकार आती ही नहीं दिखाई दे रही है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का आकलन है कि 2024 का चुनाव जातिवाद पर चला गया है। महंगाई बेरोजगारी और इलेक्टोरल बॉन्ड जैसे मुद्दे लोगों के दिमाग में है जिसकी वजह से सरकार की छवि पर असर पड़ा है।


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