आरटीई के तहत दाखिल बच्चों के साथ भेदभाव न हो इसका रहे ध्यान – कलेक्टर
शिक्षा का अधिकार (आरटीई) का उद्देश्य गरीब व वंचित तबके के बच्चों को स्कूलों में बगैर किसी भेदभाव के पढ़ने, लिखने का अधिकार प्रदान करना है। लेकिन कई स्कूल प्रबंधन के कुत्सित सोच के परिणाम स्वरूप आरटीई उनके लिए अभिशाप बन कर रह गया है। देश भर में लगातार यह तथ्य सामने आ रहे हैं कि आरटीई के तहत दाखिला पाए वंचित तबके छात्रों के साथ स्कूलों में भेदभाव किया जाता है। शिक्षक उन्हें लगातार प्रताड़ित व अपमानित करते हैं और इन छात्रों को क्लास रूम में अन्य बच्चों से अलग बैठाया जाता है। शिक्षकों के दुर्व्यवहार के चलते गरीब छात्रों का शिक्षा प्रणाली से दूर भागना बदस्तूर जारी है। स्कूलों में जारी भेदभाव की वजह से इन छात्रों में हीन भावना भर रही है। जिसे कही पर भी उचत नही कहा जा सकता है।
इसी को लेकर कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 (आरटीई) के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु आज जिला स्तरीय समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता कलेक्टर विनय कुमार लंगेह ने की। इस अवसर पर पुलिस अधीक्षक सूरज सिंह परिहार और जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी डॉ. आशुतोष चतुर्वेदी उपस्थित थे।
कलेक्टर श्री लंगेह ने समिति के उत्तरदायित्वों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जिले में आरटीई अधिनियम के अंतर्गत गैर अनुदान प्राप्त अशासकीय विद्यालयों में दाखिला पाने वाले विद्यार्थियों को उनकी शिक्षा पूरी होने तक विद्यालयों में बनाए रखने के प्रयास किए जाने चाहिए। आरटीई पोर्टल में लॉटरी के माध्यम से चयनित विद्यार्थियों का प्रवेश सुनिश्चित करने और उनके साथ किसी प्रकार का भेदभाव न होने देने के लिए विशेष निर्देश दिए गए। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे भेदभाव करने वाले विद्यालयों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही की जाएगी। सभी गैर अनुदान प्राप्त अशासकीय विद्यालयों को आरटीई पोर्टल पर पंजीकृत कराने के लिए जिला शिक्षा अधिकारी को निर्देश दिए गए।
पुलिस अधीक्षक श्री परिहार ने कहा कि पालकों, शिक्षकों, और संचालकों के बीच आपसी समन्वय बनाए रखने के लिए संवाद आवश्यक है। किसी भी समस्या के त्वरित निराकरण पर जोर देते हुए उन्होंने निजी स्कूलों में बच्चों के साथ किसी भी प्रकार का भेदभाव न होने पर विशेष ध्यान देने की बात कही।
सीईओ डॉ. चतुर्वेदी ने कहा कि समाज के हर बच्चे को शिक्षा का अधिकार मिला है। बच्चों की भावनाओं और शिक्षा के अधिकार का सम्मान करते हुए बेहतर कार्य करने की आवश्यकता है। साथ ही आम लोगों के बीच शिक्षा के अधिकार के प्रति जन जागरूकता फैलाने पर भी जोर दिया।
बैठक में जिला शिक्षा अधिकारी जितेन्द्र कुमार गुप्ता, मुख्य नगर पालिका अधिकारी बैकुण्ठपुर मनीष वारे, सहायक आयुक्त आ.ज. विकास उषा लकड़ा, जिला मिशन समन्वयक समग्र शिक्षा संजय सिंह, प्राचार्य शा.आ.कन्या उ.मा.वि. बैकुण्ठपुर अमृत लाल गुप्ता सहित कई अन्य सदस्य उपस्थित रहे।

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