सड़क पर मवेशी, बेखबर हैं ‘जिम्मेदार’
सालभर पहले तत्कालीन कलेक्टर ने ग्रामिण क्षेत्रो में ग्राम पंचायत व शहरी क्षेत्रो में नगर पालिका को जिम्मेदारी दिया था। कुछ दिन चला अभियान अब ठंडे बस्ते में।
बैकुंठपुर ।
शहर की सड़कों पर घूमते आवारा मवेशी वाहन चालकों व राहगीरों के लिए खतरा साबित हो रहे हैं। यह समस्या कचहरी चौक के सामने, कलेक्टोरेट मार्ग, फैव्वारा चौक, गढेलपारा व सब्जी मंडी पर दिखाई देती है। बरसात शुरू होने के बाद सड़क पर मवेशियों का जमावड़ा बढता था किन्तु इस बार अप्रैल के बाद मई में पशुओं के कारण सड़क पर जाम लग जाता है।
आए दिन वाहन चालक सड़कों पर इनकी चपेट में आकर दुर्घटनाग्रस्त हो रहे हैं। पशुओं के स्वच्छंद विचरण से आवागमन बाधित होने के साथ राहगीरों को आने-जाने में जानवरों का भय बना रहता है। सुव्यवस्थित यातायात व संभावित दुर्घटनाओं को दृष्टिगत रखते हुए नगर पालिका प्रशासन द्वारा आवारा पशुओं पर अंकुश लगाने कोई प्रयास नहीं किया जा रहा है।
सुबह से लेकर रात तक आवारा पशु सड़कों पर डटे रहते हैं। कई बार देखा गया है कि इन्हें सड़क पर से भगाने की कोशिश में ही दुर्घटनाएं घट जाती हैं। सबसे ज्यादा परेशानी साप्ताहिक बाजार के दिन देखने को मिलती है जब ये आवारा पशु बाजार में घुसकर अव्यवस्था उत्पन्न करते हैं और इन्हें भगाने की कोशिश में कई लोग घायल हो जाते हैं। सालभर पहले तत्कालीन कलेक्टर विनय कुमार लंगेह द्वारा शहर के सड़क से मवेशी को बाहर खदेड़ने के निर्देश पालिका को दिए थे। पालिका द्वारा कुछ दिन अभियान चलाया भी गया, उसके अभियान ठंडा बस्ते में पड़ गया।

और इन्हें भगाने की कोशिश में कई लोग घायल हो जाते हैं। इसके अलावा रोड में मवेशियों के कारण लोग सीधा से ड्राइव ही नहीं कर सकते। सालभर पहले तत्कालीन कलेक्टर द्वारा शहर के सड़क से मवेशी को बाहर खदेड़ने के निर्देश पालिका को दिए थे। पालिका द्वारा कुछ दिन अभियान चलाया भी गया, उसके अभियान ठंडा बस्ते में पड़ गया। नगर के चौक-चौराहों व गलियों में आवारा पशुओं का डेरा कभी न खत्म होने वाली समस्या बन गई है।

सब्जी विक्रेता भी परेशान-सब्जी विक्रेताओं का कहना है नगर पालिका सिर्फ टैक्स वसूलना जानती है, सुविधा देना फर्ज नहीं समझती। बाजार में दिनभर आवारा मवेशी घूमते रहते हैं जो नजर हटते ही सब्जी पर मुंह मार देते हैं। मवेशी एक बार में आधा से पौन किलो का नुकसान करते हैं। मवेशियों के कारण बाजार में खरीददारी करने वालों को भी परेशानी होती है। समस्या सुधारने नपा ध्यान ही नहीं दे रही है।

पशु मालिक बेपरवाह
शहर की सड़कों पर आवारा जानवरों का कब्जा होने के पीछे बहुत हद तक पशु मालिक भी जिम्मेदार हैं। मवेशियों से हित साधने के बाद इन्हें सड़कों पर आवारा घूमने के लिए इस तरह छोड़ दिया जाता है जैसे मवेशियों से उनका कोई नाता न हो। हां यह बात जरूर है कि कि हादसे या दुर्घटना में मवेशियों की मौत के बाद वे उनके हमदर्द बनते हैं। विरोध के लिए सड़कों पर उतर आते हैं।

देखकर भी अनदेखा
नगर में आवारा मवेशी और बेतरतीब खड़े वाहनों पर नगर पालिका एवं पुलिस दोनों की नजर पड़ती है, लेकिन इसे नजरअंदाज कर दिया जाता है। शाम को अक्सर चौक-चौराहों में मवेशियों का झुंड रहता है, जिसे चौक में तैनात यातायात जवान देखते रहते हैं, लेकिन उसे हटाने की जहमत कभी नहीं उठाते। कई बार इसके चक्कर में वाहन चालक जल्दीबाजी में हादसे के शिकार हो जाते है। कड़ी कार्रवाई के अभाव में मवेशी मालिकों के हौसले बुलंद हैं।

पालिका के पास कांजी हाउस ही नहीं
नगर पालिका प्रशासन द्वारा सड़कों पर घूमने वाले आवारा पशुओं को पकड़कर कांजी हाउस लाए जाने पर इनके मालिक पर जुर्माना व जानवरों की नीलामी का भी प्रावधान है। नपा में कांजी हाउस में रखे जाने वाले बड़े जानवरों पर जुर्माना का प्रावधान है। इसके अलावा निर्धारित 15 दिनों तक मवेशी मालिकों द्वारा मवेशियों को नहीं छुड़ाने पर जानवरों की नीलामी का प्रावधान है। नीलामी में नपा कार्यालय व तहसील में सूचना लगा कर एसडीएम कार्यालय व पुलिस थाने में लिखित में सूचना देकर मुनादी भी कराई जाती है। लेकिन दुर्भाग्य की बात है कि पालिका के पास एक भी कांजी हाउस नहीं है। इसी तरह नपा के पास काउ केचर भी नहीं है। काउ केचर और कांजी हाउस की कमी के कारण आवारा मवेशियों की धरपकड़ का अभियान नहीं चला पाते हैं।
खानापूर्ति कर भूले अभियान
यातायात व्यवस्था बनाने के लिए तत्कालीन कलेक्टर विनय कुमार लंगेह ने मइ् 2024 को बैठक लेकर नगर पालिका व पंचायतो के अधिकारी को आवारा मवेशियों को पकड़ने की कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे। कलेक्टर के आदेश का नपा व पंचायत के अधिकारियों ने चार दिन ही पालन किया, जिसमें दर्जन भर मवेशियों को पकड़ा गया। इस दौरान कलेकटर के तबादला होते ही आवारा मवेशियों को पकड़ने की मुहिम दम तोड़ गई। शहर में हर चौक-चौराहों पर आवारा मवेशियों का झुंड देखा जा सकता है।


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