32 वर्षों से लंबित ओबीसी आरक्षण छत्तीसगढ़ में लागू करने महासभा कोरिया का राज्यपाल के नाम ज्ञापन

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बैकुंठपुर।

ओबीसी महासभा प्रदेश इकाई छत्तीसगढ़ के आहृवान पर सोमवार को राज्यपाल छत्तीसगढ, मुख्यमंत्री छत्तीसगढ और ओबीसी महासभा छत्तीसगढ के नाम का ज्ञापन बैकुंठपुर एसडीम को सौपा गया। महासभा के सदस्यो ने बताया कि विगत 32 वर्षों से लंबित 27 फिसद ओबीसी आरक्षण के मुद्दे पर एक सूत्रीय मांग को लेकर ज्ञापन सौंपा गया। मांग में उल्लेख किया गया है देश की संघीय संवैधानिक व्यवस्था के अनुसार सामाजिक एवं शैक्षणिक दृष्टि से पिछड़े हुए समुदाय को अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजातियों में अन्य पिछड़ा वर्ग के रूप तीन वर्गों में वर्गीकृत किया गया है।

सामाजिक एवं शैक्षणिक पिछड़ेपन के आधार पर अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति को समानता के अवसर उपलब्ध कराते हुए समुचित विकास एवं उत्थान की व्यवस्था किया गया है तदानुसार केंद्र सरकार द्वारा अनुसूचित जाति को 15 फिसद तथा अनुसूचित जनजाति को 7.50 प्रतिशत एवं राज्य सरकार द्वारा अनुसूचित जाति को 12 फिसद एवं अनुसूचित जनजाति को 32 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान लगभग आबादी के बराबर किया गया है जबकि केंद्र सरकार ने मंडल कमीशन के अनुशंसा केअनुसार संविधान लागू होने के 44 साल बाद सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के अनुसार अन्य पिछड़ा वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण दिया है ।

साथ ही राज्य की स्थिति के आधार पर अन्य पिछड़ा वर्ग को राज्य शासन के द्वारा आरक्षण सुनिश्चित करने का अधिकार दिया गया है किंतु ओबीसी समुदाय को अभिभाजित मध्य प्रदेश में मात्र 14ः आरक्षण शिक्षा एवं रोजगार में दिया गया है जो कि आज पर्यंत छत्तीसगढ़ राज्य में लागू है बहुसंख्यक ओबीसी समुदाय को आबादी के अनुरूप हिस्सेदारी आरक्षण प्रदान नहीं करने के कारण प्रदेश के ओबीसी समुदाय का समुचित विकास एवं उत्थान में अपरिमित नुकसान हो रही है जिसे ध्यान में रखते हुए छत्तीसगढ़ शासन द्वारा 2 दिसंबर 2022 को आरक्षण संशोधन विधेयक पारित कर महामहिम राज्यपाल की हस्ताक्षर हेतु प्रस्तुत किया गया था। जिसमें अनुसूचित जनजाति को 32 प्रतिशत अनुसूचित जाति 13 प्रतिशत अन्य पिछड़ा वर्ग को 27 प्रतिशत एवं आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य वर्ग को चार प्रतिशत आरक्षण दिए जाने का प्रावधान किया गया है।
आरक्षण संशोधन विधेयक 2022 में हस्ताक्षर किए जाने हेतु आवश्यक पहल कर हमें अनुग्रहित करेंगे या 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण के लिए अध्यादेश पारित कर पुनः विधेयक पास कर लागू करेंगे। इस आशय का ज्ञापन ओबीसी महासभा द्वारा विगत वर्षों के लगातार छत्तीसगढ़ के सभी जिलों में कलेक्टर एसडीएम तहसीलदार के माध्यम से दिया जा रहा है लेकिन शासन प्रशासन के द्वारा अब तक समुचित प्रयास नहीं किया गया है जिससे ओबीसी समुदाय में रोष व्याप्त है यदि हमारी मांगों पर सरकार आवश्यक पहल नहीं करती है तो ओबीसी महासभा द्धारा आगामी दिनो में चरणबंद्ध आंदोलन किया जायेगा।
सरकार द्वारा यदि 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण के मुद्दे पर ठोस पहल नहीं करती है तो ओबीसी महासभा चरणबद्ध आंदोलन के लिए बाध्य होगी। जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी शासन प्रशासन की होगी। इस दौरान ओबीसी महासभा के प्रदेश सचिव कृष्णा प्रजापति, संभागीय सचिव गणेश राजवाड़े, अशोक जायसवाल, रविशंकर राजवाड़े, कुलदीप प्रजापति, राम नारायण साहू, कृष्णा राजवाड़े, डी.एल. भास्कर, शिवराम यादव, विजय लाल चक्रधारी, संतोष कुमार गोयल, देवराज, आनंद राजवाड़े, हीरालाल साह,ू हरिशंकर राजवाड़े, महेश यादव, दीपक कुमार, श्याम कुमार, रामदास साहू, रामकुमार यादव, धर्मजीत सोनवानी, जवाहरलाल राजवाड़े, राजेश कुमार कुर्रे सहित बडी संख्या में ओबीसी वर्ग के लोग उपस्थित थे।

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