कोरिया के गांव पहाड़पारा की पशुसखी ललिता सारथी को मुख्यमंत्री ने किया सम्मानित
दीदी के गोठ कार्यक्रम की वर्षगांठ पर राज्य स्तरीय आयोजन में ललिता को मिला सम्मान
बैकुंठपुर।
मजबूत इरादे लेकर अथक मेहनत करने वाले हमेशा सफलता के नए प्रतिमान बनाते हैं। कोरिया के वनांचल में रहने वाली ललिता सारथी ने इस बात को एक बार फिर साबित किया है। जिले के सोनहत जनपद पंचायत अंतर्गत आने वाले गांव पहाड़पारा की रहने वाली ललिता सारथी को पशु सखी के तौर पर ग्रामीण क्षेत्र में अच्छे सेवा कार्यों के लिए प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सम्मानित किया। राज्य स्तरीय आयोजन में सम्मानित होकर ललिता सारथी ने कोरिया जिले में बिहान अंतर्गत नारी सशक्तिकरण के कार्यों को नई पहचान दिलाई है। दीदी के गोठ कार्यक्रम में बिहान की पशु सखी ललिता सारथी के सम्मानित होने पर कलेक्टर कोरिया रोक्तिमा यादव ने उन्हे अपनी बधाई और शुभकामनाएं दी हैं।
जानिए कौन हैं ललिता सारथी
कोरिया जिले के सोनहत ब्लॉक के गाँव पहाड़पारा में रहने वाली ललिता सारथी राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान अंतर्गत लक्ष्मी स्व सहायता समूह से जुड़ी हुई एक ग्रामीण महिला हैं। बिहान से जुड़कर उन्होंने पशुपालन से अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत किया और उसके बाद पशुसखी के तौर पर कार्य करते हुए समाज में अपनी एक नई और सशक्त पहचान बनाई है। आज वह अपने गांव में एक लखपति दीदी के रूप में जानी जाती हैं।
ऐसे बनी पहचान
सामान्य घरेलू महिला से अपना सफर शुरू करने वाली ललिता ने पहले बिहान से जुड़कर मात्र 26 हजार का ऋण लिया और इससे अपने घर में बकरी और मुर्गीपालन कार्य आरंभ किया। इस दौरान इन्हे लगा कि पशुओं की देखभाल के लिए प्रारंभिक चिकित्सा का ज्ञान जरूरी है। फिर इन्होने बिहान से पशु सखी बनने का प्रशिक्षण प्राप्त किया। प्रशिक्षण प्राप्त हो जाने के बाद से ललिता सारथी अपने घर और आस पड़ोस के अलावा पहाड़पारा से लगे लगभग आधा दर्जन गांवों में किसानों के पालतू पशुओं का कृत्रिम गर्भाधान, टीकाकरण, कृमिकरण, बधियाकरण से नस्ल उन्नयन, बीमार पशुओं का इलाज कर रही हैं।
पशुसेवा से आय और सम्मान
अब ललिता सारथी अपने गांव पहाड़पारा तथा इसके आस पास 6 गांवों में गाय, बैल, बकरी, मुर्गी आदि सभी पालतू पशुओं की देखभाल और चिकित्सा में किसानों की मदद करती हैं। इस कार्य से इन्हे प्रतिमाह न्यूनतम 26 हजार रूपए की मासिक आय प्राप्त हो रही है। निश्चित आय से घर के आर्थिक एवं सामाजिक निर्णयों में भागीदारी, आत्मसम्मान में वृद्धि के साथ अब प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मिल रहे अनुदान में अपनी कमाई जोड़कर वह एक पक्के मकान का सपना पूरा कर रही हैं।
संघर्ष से सम्मान तक कठिन सफर
मूलतः खेती-किसानी पर निर्भर ललिता सारथी का परिवार काफी बड़ा है, जिसमें कुल 11 सदस्य हैं। परिवार के भरण-पोषण की पूरी जिम्मेदारी के बीच ललिता हमेशा से अपने परिवार को एक बेहतर जिंदगी देना चाहती थीं। बिहान योजना के तहत लक्ष्मी महिला स्व सहायता समूह से जुड़कर अपने सपनों को मेहनत से आकार देना प्रारंभ किया। छोटे से ऋ़ण की मदद से मात्र दो वर्षों में मुर्गीपालन और बकरी पालन को स्थायी रोजगार का साधन बना लिया। बेहतर प्रबंधन, अथक मेहनत से व्यवसाय की एक मजबूत शुरूआत करते हुए उन्होने पशु सखी बनकर अपने कार्यों को आगे बढ़ाया।
परिवार और समाज में बढ़ा महत्व
अपनी मेहनत से गांव में अलग पहचान बना रही ललिता कहती हैं कि आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर होने का सबसे बड़ा असर परिवार और सामाजिक जीवन पर पड़ा है। परिवार में आर्थिक सहभागी होने से अब परिस्थितियां बदल गई हैं। उन्होने कहा कि घर के किसी भी छोटे-बड़े आर्थिक और सामाजिक निर्णय में उनकी सलाह का विशेष महत्व होता है। अपनी इस कमाई से अपने किसान पति हरीश के साथ मिलकर ललिता प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ लेते हुए अपने परिवार के लिए पक्के मकान का निर्माण करवा रही हैं।





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