Baikunthpur @ Tahkikat News
देवउठनी एकादशी का पर्व लोगो नेे उत्साह और उमंग के साथ मनाया जाएगा। इसके लिए घर-घर गन्ने का मंडप सजा कर तुलसी विवाह की पूजा किया। देवउठनी (देवप्रबोधिनी एकादशी) पर्व को लेकर घरों में तैयारी पहले ही कर ली गई थी। इस सबंध में जानकारी देते हुए महिला नेत्री संगीता राजवाडे बताती हैं कि इस पर्व में भगवान विष्णु को धूप, दीप, नैवेद्य, फूल, गंध, चंदन, फल और अर्घ्य आदि अर्पित कर पूजा-अर्चना की जाती है। देवउठनी एकादशी पर्व में घरों में गन्ने से मंडप सजाया जाता है। इसके चलते देवउठनी एकादशी पर्व में गन्ने की विशेष मांग रहती है। पूजन में खास तौर पर इस्तेमाल मंडप के लिए उपयोग आने के कारण गन्ने की मांग इस पर्व में बढ़ जाती है।
त्योहार विशेष में गन्ने की खपत को देखते हुए कोरिया जिले के अलावा अन्य जिले से भी काफी संख्या में गन्ना उत्पादक और विक्रेता शहर पहुंचते हैं। इस साल भी काफी संख्या में गन्ना बेंचने के लिए यहां किसान पहुंचे। शहर में गन्ना बेचने वालो ने बताया कि इस साल प्रति जोड़ी गन्ने को 50 रुपये से 70 रुपये में बेच रहे हैं। इस साल क्षेत्र में लगातार मौसम में उतार-चढ़ाव होने के कारण गन्ने के उत्पादन में असर पड़ा है।
गन्नो के मंडप तले तुलसी व शालिग्राम का विवाह
इस अवसर पर कार्तिक शुक्ल पक्ष की एकादशी पर देवउठनी त्यौहार धूमधाम से मनाया गया। पर्व को लेकर श्रद्धालुओं में उल्लास देखी जा रही है। दिन भर बाजार में पूजा सामानों की खरीदारी के लिए रौनक बनी हुई है।
5 से गुंजेगी शहनाई
देव उठनी पर्व के पश्चात विवाह लग्न का योग कार्तिक शुक्ल पूर्णिमा 5 नवंबर से शुरू हो रहा है। इस वर्ष मुहुर्त की भरमार देखी जा रही है। खरमास के दौरान विवाह आयोजन में विराम रहेगी। विवाह आयोजन को लेकर जनवासा बारातघर, बैंड बाजा, बाराती वाहन आदि की बुकिंग अभी से शुरू हो गई है। वैवाहिक आयोजन लेकर व्यवसाइयों के चेहरे पर रौनक देखी जा रही है।
यह है धार्मिक मान्यता
धार्मिक कथा के अनुसार महासती वृंदा दैत्यराज जालंधर की पत्नी थी। जालंधर बहुत ही अत्याचारी दानव था, किंतु वृंदा के सतित्व के कारण देवता भी उसका बाल बांका नहीं कर सकते थे। धर्म की रक्षा के लिए विष्णु ने सती से छल किया। जिससे जालंधर का वध हुआ। सती ने विष्णु को शाप दे दिया जिससे वह पाषाण हो गए। लक्ष्मी के आग्रह पर तुलसी ने विष्णु को यथावत कर दिया। भगवान ने तुलसी के सतीत्व से प्रसन्ना् होकर तुलसी पौधे के रूप में उत्पन्ना होने का वरदान दिया व कहा कि तुलसी के बगैर विष्णु पूजा अधूरा है। इसी दिन की याद में तुलसी विवाह आयोजित किया जाता है।
देवउठनी एकादशी का शुभ मुहूर्त और समय
देवोत्थान एकादशी साल में आने वाली सभी 24 एकादशी में सबसे महत्वपूर्ण होती है। इस वर्ष देवोत्थान एकादशी 4 नवंबर यानी शुक्रवार को मनाई जाएगी। एकादशी की तिथि तीन नवंबर यानी गुरुवार रात आठ बजकर 51 मिनट पर लग जाएगी और चार नवंबर शुक्रवार को शाम सात बजकर दो मिनट तक रहेगी। सूर्याेदय व्यापिनी तिथि की वजह से हरि प्रबोधिनी एकादशी का व्रत 4 नवंबर को ही होगा। जबकि इसका पारण 5 नवंबर 2022 को किया जाएगा. इस दिन तुलसी विवाह का भी आयोजन किया जाता है।
देवउठनी एकादशी का महत्व
धार्मिक ग्रंथों में वर्णित उल्लेख के अनुसार, प्रत्येक वर्ष की आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी जिसे देवशयनी या हरिशयनी एकादशी के नाम से जाना जाता है, से जगत के पालनकर्ता श्री हरि विष्णु चार माह के लिए योग निद्रा में चले जाते हैं और कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की देवोत्थान एकादशी के दिन जागते हैं। इस वर्ष देवशयनी एकादशी 10 जुलाई 2022 को पड़ी थीं।
देवउठनी एकादशी पर मिलता है मनचाहा वरदान
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जिस मनोरथ का फल त्रिलोक में भी ना मिल सके, वो देवोत्थान एकादशी का व्रत कर प्राप्त किया जा सकता है। देवोत्थान एकादशी से पूर्णिमा तक भगवान शालिग्राम एवं तुलसी माता का विवाहोत्सव का पर्व मनाया जाता है।
कब से शुरू होंगे विवाह मुहुर्त
पंडित दीपक मालवीय के मुताबिक, 4 नवंबर से मांगलिक कार्य प्रारंभ हो जाएंगे लेकिन इस बार शुक्र ग्रह अस्त होने से देवोत्थान एकादशी पर विवाह का मुहूर्त नहीं है। इस संदर्भ में प्रथम विवाह मुहूर्त 24 नवंबर से प्राप्त होगा।
नवंबर मास विवाह मुहूर्त- 24, 25, 26
दिसंबर के विवाह मुहूर्त -2,3,7,8,9,13,14,15,16
इसके पश्चात् खरमास प्रारंभ हो जाएगा जिसके बाद पुनः विवाह के मुहूर्त 15 जनवरी 2023 से प्राप्त होंगे।
as

+ There are no comments
Add yours