60 दिन में कियेे कलेक्टर की सारे प्रयास विफल……शहर के हर सडक पर आवारा पशुओ कब्जा बरकरार

नगर पालिका के कुछ लाचलखोर कर्मचारी अवैध बाजार वसुली के साथ पशुपालको को करते हैं सूचित

कोरिया कलेक्टर दो महीना से लगातार जिला मुख्यालय बैकुंठपुर सहित जिले के अन्य प्रमुख चौक चौराहा एवं सड़कों से आवारा पशुओं को हटाने के लिए हर संभव प्रयास किया। किंतु उनके अधीनस्थ अधिकारियों के लापरवाह रवैया के कारण समस्या जत की तस बनी हुई है। आवारा पशुओं के संबध में मुख्यालय बैकुंठपुर की बात करें तो शहर के प्रमुख भीडभाड वाले ईलाको में नया व पुराना बस स्टैंड, जनपद कार्यालय के सामने, सिटी कोतवाली के सामने, जिला अस्पताल के सामने, सब्जी मंडी, कचहरी रोड, नगर पालिका के सामने सहित ऐसा कोई मार्ग नहीं है जहां पर आवारा पशुओं का मजमा नजर ना आए।

जिला प्रशासन की नाकामी के बाद अब शहर व बाहरी क्षेत्रों में आवारा पशुओं का आतंक बढ़ता ही जा रहा है। शहर के विभिन्न प्रमुख सड़कों और गलियों में आवारा पशुओं की टोलियां घूमती रहती है। जिसके चलते लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। सबसे ज्यादा परेशानी महिलाओं और छोटे बच्चों को हो रही है। स्थिति यह बन गई है कि आवारा पशुओं का जहां शहर में आतंक है, वहीं बाहरी क्षेत्रों में दुघर्टनाओं का कारण बन रहे है। बाहरी क्षेत्रों में विगत 3 महिनो में 4 दर्जन से अधिक घायल एवं 6 लेगो की मौत का कारण ये आवारा पशु बन चुके है। लगातार हो रही दुर्घटनाओं के बाद भी भगवान ही बचा सकते हैं। जिला प्रशासन विगत 2 महिनो में आवारा प्शुओ से संडको को मुक्त कराने में विफल रहा है।

पीक आवर में आवागमन बना जानलेवा

दिन हो या रात आवारा पशु गलियों और सड़कों घूूमते देखे जा सकते हैं। जिस कारण कई बार तो इनका शिकार हो जाते हैं और अस्पताल तक जाने की नौबत आ जाती है। हालांकि प्रशासन कोरिया कलेक्टर के तमाम आदेश निर्देशो के बाद आवारा पशुओं को भगा नही पाया और न ही पशुपालको को दंडित कर सका।

शहर और आसपास हजारो जानवर सडक पर

शहर में आवारा पशुओं की बड़ी समस्या है। यह पिछले कई डेढ दशक से चल रही है। कुछ महिने पूर्व कोरिया कलेक्टर के पहल से लोगों में इस समस्या के समाधान की उम्मीद जागी थी किन्तु दो महिने बाद यह कहा जा सकता है कि पूरा अभियान नाकाम साबित हुआ। शहर और आसपास में इन दिनो सडको पर लगभग 500 से 600 सौ आवारा पशु विचरण करने की बात कही जाती है।

पशुओं पालको की दूसित मांनसिकता

इन पशुओं पालको के हौसले इतने बुलंद हैं कि वे रोज अपने पशुओं को चरने के लिए बाजार में छोड़ देते हैं जबकि पशु पालको की मांनसिकता बन गई है कि शाम को सिर्फ दूधारु पशुओ को वापस घर ले जाते हैं। बाकियो का अडडा बस स्टैंड सहित अन्य सरकारी कार्यालय बने हुए हैं जहा बरामदे खुले है।

गुंडागर्दी करते हैं पशुपालक

शहर में ऐसे कई पशुपालक है। जिनके पास बड़ी संख्या में पशु हैं। ये लोग सुबह दूध निकाल पशुओं को सड़कों पर छोड़ देते हैं। शाम को जब पशु लौटता है तो उसका दूध निकाल बाड़े में बांध देते हैं। अगले दिन फिर छोड़ देते हैं। प्रशासनिक सख्ती नहीं होने से ये लोग बेखौफ हैं। पशु पकड़े जाएं तो ये लोग नगर पालिका कर्मियों से मारपीट कर पशुओं को छुड़ा ले जाते हैं। यह भी कड़वा सच है कि नगर पालिका में कुछ ऐसे कर्मचारी भी हैं, जो पशुमालिकों को पशु पकड़ने की सूचना दे देते हैं।

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