मोहित प्रेम में भाजपा जिला सदस्यो की अनदेखी से भाजपा दो फाड

Estimated read time 0 min read

बैकुंठपुर

कोरिया भाजपा में ज्वाला अन्दर खाने पनप रही है। जिसे भाजपा राज्य संगठन द्धारा समय रहते नही सुलझाया गया तो आने वाले दिनो में अपने आदर्शो का दावा करने वाली भाजपा को पुराने दिन देखने को तैयार रहना होगा। वर्तमान में सौभाग्यवती सिंह के 06 साल के निष्कासन से नाराज कोरिया भाजपा के लोग दो फाड़ और पार्टी में गुटबाजी, अपने चरम पर नजर आ रही है।

विधायक की लोकप्रियता पार्टी पर भारी

सौभाग्यवती सिंह के विरुद्ध हुई निष्कासन को बैकुंठपुर के लोग बदले की भावना से लिया गया फैसला मान रहे हैं। इसी बात को लेकर दिन प्रतिदिन मतभेद मनभेद में बदलता जा रहा है। यह कृत्य जिला पंचायत में अध्यक्ष के बहाने विधायक भइयालाल राजवाडे को छोटा दिखाने का प्रयास माना जा रहा है । विदित हो कि बैकुंठपुर विधानसभा हमेशा से ही कांग्रेस का गढ़ रहा है वह तो भइयालाल राजवाड़े के भाजपा में शामिल होने के बाद बदले समीकरणो के करवट से तीन बार भाजपा को विधानसभा में जीत मिली । जबकि 1984 में मिली जीत के पीछे भी कांग्रेस का ही हाथ था एक बार फिर लगता है कि भाजपा संगठन ने गलत राह पकड़ ली है बैकुंठपुर में भाजपा से अधिक विधायक भइयालाल राजवाडे को जनता अपना अगुआ मानती है।

बाहरी लोगो को महत्व देने से उपजा विरोध

एक ओर प्रदेश के पूर्वमंत्री एवं संभाग के कददावर नेता माने जाने वाले बैकुंठपुर भइयालाल राजवाड़े वर्तमान फैसले से काफी खफा नजर आ रहे हैं वे भाजपा जिलाध्यक्ष के द्वारा गत सप्ताहो में लिए कई फैसलों से खुश नही हैं उन्होंने कहा है कि जिस तरीके से फैसले लिए जा रहे हैं वह पार्टी के हित में कताई नजर नहीं आ रहे हैं। विधायक ने कहा कि भाजपा में इस तरीके का आचरण पहले नहीं था किंतु मानवाने फैसलों ने भाजपा के लिए तन मन धन से कार्य करने वाले कार्यकर्ताओं को चोट पहुॅचाया है उन्होंने कहा कि बाहर से आए लोगों को बहुत अधिक महत्व देना और पार्टी में दशकों से तन मन धन से कार्य कर रहे कार्यकर्ताओं को दरकिनार करना बड़े दुख का विषय है।

मोहित प्रेम में भाजपा जिला सदस्यो की अनदेखी

कोरिया जिला पंचायत चुनाव में 10 सीटों के लिए हुए चुनाव में भाजपा के पास स्पष्ट 06 की बहुमत होने के बावजूद भी भाजपा जिला अध्यक्ष देवेन्द्र तिवारी के द्वारा कुछ महीनो पूर्व भाजपा में शामिल हुए कांग्रेसी नेता और पूर्व विधायक अम्बिका सिंह के बेहद करिबी मोहित पैकरा को बैकुंठपुर जनपद के पूर्व अध्यक्ष और आदिवासी समाज की बडी नेत्री सौभाग्यवती सिंह को दरकिनार कर अपना अधिकृत उम्मीदवार नही बनाया । उनके पास भाजपा के चार जिला पंचायत सदस्यों का समर्थन व विधायक की सहमति भी थी। जबकि जिला भाजपा अध्यक्ष के द्वारा निर्दलीयों एवं अन्य लोगों के समर्थन से मोहित पैकरा को जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में भाजपा के जिला पंचायत सदस्यों के राय के विरुद्ध जाकर अध्यक्ष बनाया । सवाल भी यही उठ रहा है कि बहुमत के बावजूद ऐसा क्या आपात स्थिति आन पड़ी की मोहित को अध्यक्ष बनने के लिए भाजपा जिलाध्यक्ष ने पार्टी के जीते 06 जिला पंचायत सदस्यो की सहमति तक लेने की जरुरत नही समझा।

मांगी अध्यक्षी तो दिया 06 साल का निष्कासन

सौभाग्यवती ने पार्टी से एैसा क्या मांग लिया कि उन्हे सीधा 06 साल के लिए बाहर का रास्ता दिखा दिया गया । राजनीतिक जानकारों की माने तो सौभाग्यवती सिंह के विरुद्ध की गई भाजपा से निष्कासन की कार्यवाही नियम विरुद्ध है। जानकारों के अनुसार निष्कासन तब किसी का अनुशासनात्मक कारणों से होता है जब कोई पार्टी सदस्य पदाधिकारी पार्टी के चिन्ह के विरुद्ध जाकर चुनाव लड़ता है। पार्टी चिन्ह जिला जनपद के चुनाव में न तो सदस्य निर्वाचन में होता है और न अध्यक्ष उपाध्यक्ष निर्वाचन में इस हिसाब से यदि कोई चुनाव लड़ भी जाता है वह उतना दोषी नहीं होता जैसे राजेश साहू व संगीता सोनवानी को भाजपा ने अपना लिया। जबकि दोनों ने भाजपा समर्थित प्रत्याशी को चुनाव हराया है अब ऐसे में सौभाग्यवती का निष्कासन नियम सम्मत है या व्यक्तिगत खुन्नश व भइयालाल का समर्थक होने की सजा देने से पार्टी का हित नही साधा जा सकता है।

You May Also Like

More From Author

+ There are no comments

Add yours