सीटू ने 10 सूत्रीय मांग को लेकर महाप्रबंधक कार्यालय के सामने किया प्रर्दशन
संगठन ने 22 अप्रैल को हादसे में मृतक दिगेश्वर सिंह को 01 करोड़ रूपये मुआवजा देने की मांग
बैकुंठपुर
सोमवार 28 अप्रैल को कोयला श्रमिक संघ सीटू के नेतृत्व में सैकड़ो ठेका श्रमिकों ने एसईसीएल बैकुंठपुर मुख्यालय को दिनभर घेर कर रखा। सीटू का लाल झंडा थामें सैकड़ो की संख्या में ठेका श्रमिकों का साथ देने के लिए स्थाई श्रमिक भी उनके साथ धरना में डटे रहे । सीटू के क्षेत्रीय सचिव इन्द्रदेव चौहान ने बताया कि अभी भी ठेका श्रमिकों का शोषण बदस्तूर जारी है। एचपीसी का सिफारिश जारी हुए 12 साल बीत जाने के बाद भी अभी भी पूर्णतः इसे लागू नहीं किया जा सका है। इनका ना तो वेतन की कोई स्थाई तिथि तय की गई है, ना हीं इनका वेतन प्रतिमाह दी जाती है। आज हमारी संघ 10 सूत्रीय मांग प्रबंधन को सौंप रहे हैं अगर ठेका श्रमिकों का मांग पूरी नहीं की जाती है तो हम कंपनी स्तर पर भी पूरे कंपनी के ठेका श्रमिकों को लेकर अनिश्चित कालीन धरना पर बैठेंगे। धरना में शामिल होने के लिए बैकुंठपुर क्षेत्र के सभी इकाई से ठेका श्रमिक और सीटू के कार्यकर्ता आए हुए थे। धरना का संबोधित सीटू के क्षेत्रीय पदाधिकारी कर रहे थे। जिनमें रमन कुमार सिंह, दिलीप पासवान, सुरेंद्र बहादुर सिंह, वंश गोपाल सिंह, विनोद गुप्ता, राजाराम जाता, रमेश जनता, उदय नारायण ठाकुर, मानिकचंद, बलजिंदर सिंह आदि थे।

ये हैं 10 सूत्रिय मांग
- चरचा माइन में दिनांक 22 अप्रैल को दुर्घटना में मृत श्रमिक स्व. दिगेश्वर सिंह के परिवार को कारपोरेट सैलरी पैकेज में बैंक से हुआ एम.ओ. यू. के तहत व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा कवर के रूप में 01 करोड़ रूपये मुआवजा दिया जाये।
- क्षेत्र में कार्यरत सभी ठेकेदारी श्रमिकों को पीएलआई बोनस को भुगतान अविलम्ब किया जाये।
- क्षेत्र में कार्यरत सभी ठेका श्रमिकों को एचपीसी के सिफारिशों व नये वीडीए रेट के तहत वेतन भुगतान किया जाये।
- प्रतिमाह श्रमिकों को वेतन देने से पूर्व वेतन पर्ची मुहैया करायी जाये।
- सभी ठेका श्रमिकों को सीएमपीएफ/ईपीएफ कटौती का विवरण कम से कम वर्ष में एक बार दिखायी जाये एवं सीएमपीएफ/ईपीएफ का पासबुक जारी की जाये।
- ठेकेदार बदलने पर बार-बार ठेका श्रमिकों को नहीं बदला जाये उन्हीं ठेका श्रमिकों को काम पर रखा जाये, जो पहले से उस माइन्स में कार्य कर चुके हैं।
- ठेका श्रमिकों को भी और दक्ष बनाने के लिये समय-समय पर जतंपदपदह में भेजा जाये। टेनिंग के समय का भुगतान की भी व्यवस्था की जाये।
- ठेका श्रमिकों के परिवार को भी कम्पनी के हॉस्पीटल में चिकित्सा सुविधा उपलब्ध हो।
- क्षेत्र में रिक्त आवासों को ठेका श्रमिकों को रहने के लिये आबंटित किया जाये।
- ठेका श्रमिकों के बच्चों को भी डीएमवी व सेन्टल स्कूल में एडमिशन के लिये कोटा उपलब्ध करायी जाये।



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