दूसरे दिन भी सीबीआई ने किया फोरेंसिक जांच और रिकंस्ट्रक्शन में अपराध स्थल का वैज्ञानिक रिकंस्ट्रक्शन

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कोरिया जिले के नौगई में हुए हत्याकांड में सीबीआई ने खंगाले मृतक और आरोपी दोनों पक्षों के मोबाइल की सीडीआर और टावर लोकेशन

बैकुंठपुर।

कोरिया जिले के सोनहत थाना क्षेत्र के नौगई ग्राम में हुए अग्निदाहकांड में तीन की मौत के बाद सोमवार 13 जुलाई को सीबीआई टीम कोरिया जिले पहुच जॉच शुरु कर दिया जहॉ जांच के दूसरे दिन क्षेत्र के सीसीटीवी डीवीआर के फूटेज, कटगोडी पेट्रोल पंप के कैमरो में कैद फूटेज और दोनो पक्षो जिसमें मृतक और आरोपी दोनों पक्षों के मोबाइल कॉल के डिटेल्स तलाश रही है।

सीबीआई हत्याकांडों की गुत्थी सुलझाने के लिए सीसीटीवी फुटेज और कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स को बहुत ही बारीकी से स्कैन कर रही है। इन तकनीकी साक्ष्यों के जरिए एजेंसी घटनाक्रम का मिनट-दर-मिनट टाइमलाइन तैयार कर रही है और संदिग्धों की लोकेशन तथा गतिविधियों की सच्चाई का पता लगा रही है।

सीबीआई अपनी जांच में कई वैज्ञानिक और तकनीकी तरीकों का इस्तेमाल कर रही है, जिसमें सीसीटीवी फुटेज स्कैनिंग, घटनास्थल के आसपास के रास्तों, होटल्स और पेट्रोल पंपों के सीसीटीवी कैमरों की मदद से संदिग्धों का रूट और उनकी टाइमिंग वेरिफाई की जा रही है।

सीबीआई टीम कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स मृतक और आरोपी दोनों पक्षों के मोबाइल की सीडीआर और टावर लोकेशन निकाली खंगाले जा रहे हैं। इससे दोनों के बीच संबंधों, साजिश और घटना के समय उनकी मौजूदगी का पता लगाा जा सके। इसके अलावा फोरेंसिक जांच और रिकंस्ट्रक्शन में संदिग्ध परिस्थितियों और सबूतों की पुष्टि के लिए अपराध स्थल का वैज्ञानिक तरीके से रिकंस्ट्रक्शन किया जा चुका है।

बाद में मौजूद साक्ष्यो को जोडने के लिए सीबीआई आरापियो के लाई डिटेक्टर या पॉलीग्राफ टेस्ट भी करवा सकती है। यदि बयानों में विरोधाभास होता है, तो सीबीआई आरोपियों या गवाहों का पॉलीग्राफ टेस्ट भी करवा सकती है। केंद्रीय जांच एजेंसी के आधिकारिक मामलों और तौर-तरीकों को समझना मुश्किल नही है। इनके काम करने के तरिके देश भर में लोग जानते ही हैं।

गौरतलब हो कि छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित नौगई तिहरे हत्याकांड की जांच के लिए सीबीआई जांच कर रही है। सामाजिक दबाव में राज्य सरकार ने 30 जून को इसकी जांच सीबीआई जॉच की सिफारिश की थी। जिसके बाद 13 जुलाई को सीबीआई की टीम कोरिया जिले के चरचा स्थित पंचवटी रेस्ट हाउस पहुॅची।

बता दें कि यह दर्दनाक घटना 16 जून की रात सोनहत के नौगई गांव में हुई थी। रेत कारोबार और आपसी विवाद के चलते भरत सिंह गहरवार उर्फ लल्ला सिंह की फॉर्च्यूनर गाड़ी को हाईवा से रोककर उस पर पेट्रोल छिड़ककर आग लगा दी गई थी। इस हमले में लल्ला सिंह की मौके पर ही जिंदा जलकर मौत हो गई थी, जबकि वीरेंद्र और नागेंद्र सिंह ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया था। स्थानीय पुलिस इस मामले में मुख्य आरोपी मनोज त्रिपाठी सहित कुल 12 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है।

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