तहकीकात न्यूज @ वेब डेस्क
कोरोना महामारी के कारण पूरी दुनिया में लाखों लोगों की मौत हुई है. वहीं हिंदी फ़िल्म इंडस्ट्री के कई बड़े दिग्गज सितारे दुनिया को अलविदा कह दिया
ऋषि कपूर
दिन 30 अप्रैल को मशहूर अभिनेता ऋषि कपूर का कैंसर के कारण निधन हो गया. साल 2018 में उन्हें ल्युकेमिया डिटेक्ट हुआ था और वो न्यूयॉर्क सिटी में इलाज के लिए गए थे.
एक साल के सफ़ल इलाज के बाद वापस आए ऋषि कपूर ने 29 अप्रैल को सांस लेने में तकलीफ़ की शिकायत के बाद अस्पताल में भर्ती किया गया. दूसरे दिन उन्होंने 67 की उम्र में आख़िरी सांस ली.
हिंदी फ़िल्म इंडस्ट्री के शो मैन कहे जाने वाले राज कपूर के दूसरे बेटे ऋषि कपूर ने अपने फ़िल्मी सफर की शुरुआत बाल कलाकार के तौर पर की थी. बतौर हीरो वो 1973 में फ़िल्म बॉबी से लॉन्च हुए जिसने उन्हें रोमांटिक हीरो का दर्जा दिया और इस इमेज में जो करीबन तीन दशक तक रहे.
उनके इस इमेज को 2012 में बनी फ़िल्म अग्निपथ ने तोड़ा जिसमे वो पहली बार नकारात्मक भूमिका में नज़र आए.
पचास साल के अपने फ़िल्मी करियर ने ऋषि कपूर यादगार फ़िल्में और किरदार निभाए जिसमें ‘अमर अक़बर एन्थोनी’, ‘प्रेम रोग’, ‘क़र्ज़’, ‘सागर’, ‘चांदनी’, ‘हिना’, ‘दीवाना’, ‘बोल राधा बोल’, ‘दामिनी’, ‘नमस्ते लंदन’, ‘लक बाय चांस’, ‘लव आज कल’, ‘दो दूनी चार’, ‘डी डे’, ‘कपूर एंड संस’, ‘102 नॉट आउट’ और ‘मुल्क’ शामिल हैं.

इरफ़ान खान
पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित इरफ़ान खान फ़िल्म इंडस्ट्री के मंझे हुए कलाकारों में से एक थे. साल 1988 में “सलाम बॉम्बे” से अपना फ़िल्मी करियर शुरू करने वाले इरफ़ान खान ने अपने हुनर की बदौलत हिंदी फ़िल्म इंडस्ट्री और हॉलीवुड में एक अलग मुकाम हासिल किया.
कई अभिनेताओं के लिए वो प्रेरणास्त्रोत भी बने. साल 2018 में इरफान खान ने ट्वीटर के ज़रिये बताया कि वो न्यूरोएंडोक्रिन ट्यूमर से जूझ रहे हैं. वो इलाज़ के लिए एक साल लंदन भी गए. वापस आकर उन्होंने फ़िल्म अंग्रेजी मीडियम में काम भी किया.
कोरोना महामारी के दौरान देश में हुए लॉकडाउन के दौरान 28 अप्रैल 2020 को कोलन इन्फेक्शन के कारण इरफ़ान खान अस्पताल में भर्ती हुए और दूसरे दिन 29 अप्रैल को 53 की उम्र में उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया. महज़ चार दिन पहले उनकी माँ सईद बेगम का जयपुर में निधन हुआ था.
इरफ़ान खान आपने पीछे अपने काम की बड़ी विरासत छोड़ गए हैं जिसमें ‘लाइफ ऑफ़ पाई’, ‘नेमसेक’, ‘पान सिंह तोमर’, ‘मक़बूल’, ‘द लंचबॉक्स’, ‘स्लम डॉग मिलियनेयर’, ‘इन्फर्नो’, ‘हासिल’, ‘पीकू’, ‘हिंदी मीडिम’, ‘तलवार’ उनकी कुछ यादगार फ़िल्में शामिल हैं.

सुशांत सिंह राजपूत
छोटे शहर से बॉलीवुड का सपना लेकर मुंबई आये सुशांत सिंह राजपूत को एकता कपूर ने 2010 में सीरियल ‘पवित्र रिश्ता’ से बतौर कलाकार प्रसिद्धि मिली. 2013 में फ़िल्म ‘काई पो छे’ से उन्होंने अपना फ़िल्मी सफर शुरू किया.
लेकिन नीरज पांडेय की बायोपिक फ़िल्म ‘एमएस धोनी: द अनटोल्ड स्टोरी’ ने उन्हें फ़िल्म इंडस्ट्री में स्टार का दर्जा दिया.अपने सात साल के फ़िल्मी करियर में सुशांत सिंह राजपूत ने अपने अभिनय के विभिन्न पहलुओं से दर्शकों को रूबरू करवाया जिसमें छिछोरे, सोनचिरैया, केदारनाथ, डिटेक्टिव ब्योमकेश बक्शी, पीके शामिल हैं.
14 जून 2020 को सुशांत अपने घर में पंखे से लटके मृत्य पाए गए. 34 की उम्र में उनकी असमय मृत्यु ने पूरे देश में आत्महत्या या मर्डर की बहस छेड़ दी. फ़िलहाल ये मामला CBI के पास है और इसकी अंतिम रिपोर्ट आई नहीं है.
हांलाकि AIIMS ने सुशांत सिंह राजपूत केस को आत्महत्या घोषित कर दिया है. ये विडंबना है कि सुशंत की आख़िरी फ़िल्म ‘छिछोरे’ आत्महत्या की बजाय जिंदगी को एक मौक़ा देने के बारे में है. उनकी मौत के बाद उनकी फ़िल्म ‘दिल बेचारा’ रिलीज़ हुई थी.

जगदीप
शोले” फ़िल्म के मशहूर “सूरमा भोपाली” का किरदार निभाने वाले प्रसिद्ध कलाकार जगदीप ने 81 उम्र में 8 जुलाई को दुनिया को अलविदा कह गए.
तक़रीबन 70 साल फ़िल्म इंडस्ट्री में काम कर रहे जगदीप ने कई यादगार किरदार निभाए लेकिन शोले फ़िल्म का “सूरमा भोपाली” के लिए उन्हें सालों तक याद किया गया.
उन्हें बतौर हास्य कलाकार देखा जाता था.
उन्होंने करीबन 400 फ़िल्मों में काम किया जिसमें ‘मुन्ना’, ‘आर-पार’, ‘दो बीघा ज़मीन’, ‘ब्रम्हचारी’, ‘भाभी’, ‘दो भाई’, ‘खिलौना’, ‘रोटी’, ‘अपना देश’, ‘तूफ़ान’, ‘क़ुर्बानी’, ‘फूल और कांटे’, ‘जमाई राजा’ और ‘अंदाज़’ शामिल हैं.
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