तहकीकात न्यूज @ दिनेश बारी . लखनपुर
वन परिक्षेत्र के अधिनस्थ तबाह होते किसी बीट जंगल को देखने की जरूरत नहीं है। बल्कि परिक्षेत्र कार्यालय से लगे
महज १ कि मी की दूरी पर स्थित कुंवरपुर जंगल का नजारा कोई देख ले खुद ब खुद सहज ही अनुमान हो जाएगा कि क्षेत्र के और जंगलों में अवैध कटाई का आलम क्या होगा। वन खंडों में अवैध रूप से कटाई जोरों पर है। लिहाजा जंगलों के अस्तित्व पर खतरा मंडराने लगा है। जाहिरी तौर पर वनों के सुरक्षा व्यवस्था को लेकर वन विभाग बेपरवाह निष्कृय नजर आने लगा है । जंगल के हरियाली पर ग्रहण लगने लगा है ।
बड़े पैमाने में प्रतिदिन असंख्य नवजात पेड़ों की कटाई बदस्तूर जारी है। कटिन्दा, लोसगी लोसगा, रैम्हला देवभुडु, चोडेया अलगा, तूरगा बेन्दोपानी, बेलदगी चांदो, कुसु ,गुमगरा सहित अन्य दूसरे जंगलों में साल शीशम सागौन तथा दूसरे प्रजाति के दरख्त काटे जा रहे हैं।वन खंड के आसपास गांव के ग्रामीण जलावन बनाने बेखौफ छोटे पेड़ों को काट कर ले जा रहें हैं। इतना ही नहीं तस्करों द्वारा इमारती लकड़ी तस्करी किये जाने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। बीच में विभागीय जप्ती कार्यवाही से तस्करों में खौफ पैदा हुई थी
इमारती लकड़ियों के तस्करी में शिथिलता आई थी परन्तु फिर से लकड़ी तस्करों ने जलवा बिखेरने आरम्भ कर दिये है बताया यह भी जा रहा है कि विभागीय वन वर्दी से तालमेल बना कर रात के अन्धेरे में लकड़ी तस्करी कारनामे को अंजाम दे रहे हैं। लकड़ी चोरी कर तस्करों द्वारा ले जाया जा रहा है तथा शहरों में खपाया जा रहा है। चर्चा आम है। विभागीय वन अमला का साफ कहना है कि ऐ सिलसिला तो चलता रहेगा पूर्व में भी लकड़ी चोरी होता रहा है होता रहेगा । जो स्पष्ट रूप से पकड़े जायेंगे उन पर कार्यवाही होगी । इससे साफ जाहिर होता है किस तरह से वन अमला अपने फर्ज को अंजाम दे रहे हैं। जंगलो से दरख्तो के कटने का यही हाल रहा तो वो दिन दूर नहीं जब जंगल में सिर्फ पत्थर ही उगेंगे।
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