तहकीकात न्यूज @ सुरजीत सिंह रैना . मनेन्द्रगढ
राष्ट्रीय पर्व गणतंत्र दिवस के 72 वे पावन अवसर पर संबोधन साहित्य एवं कला विकास संस्थान द्वारा राष्ट्र के नाम समर्पित काव्य गोष्ठी का भव्य आयोजन संबोधन वाचनालय में किया गया इस गरिमामय आयोजन में उपस्थित अंचल के सुपरिचित रचनाकारों साहित्यकारों कवियों की एक से बढ़कर एक राष्ट्रप्रेम से ओतप्रोत रचनाओं की प्रस्तुति ने मंत्रमुग्ध कर दिया सर्वप्रथम संस्था अध्यक्ष एवं सचिव द्वारा समस्त जनों को गणतंत्र दिवस की बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए स्वागत किया गया मंचीय औपचारिकताओं के पश्चात काव्य गोष्ठी के संचालन का दायित्व जाने-माने साहित्यकार सतीश उपाध्याय को दिया गया उन्होंने काव्य गोष्ठी का आगाज करते हुए मां सरस्वती की वंदना हेतु सर्वप्रथम चिरमिरी से पधारे कवि हरि कांत अग्निहोत्री को आमंत्रित किया जिन्होंने मां सरस्वती की वंदना में निम्न पंक्तियां पढी मां आज हमको वर दे जन-जन में प्रेम फैले ऐसा प्रकाश भर दे रचनाकार पुष्कर तिवारी ने अपनी छोटी-छोटी तीखी कविताओं के माध्यम से प्रस्तुति दी आदमी का आदमीयत पर एक रिसर्च उसे जोड़ने की अपेक्षा तोड़ने में कम खर्च है इसी क्रम में संस्था के विचार मंच प्रमुख जाने-माने वरिष्ठ साहित्यकार वीरेंद्र श्रीवास्तव ने मुक्तक के द्वारा राष्ट्रप्रेम से परिपूरित रचना की सुंदर प्रस्तुति दी केसरिया रंग झंडे का कुर्बानियों के नाम हरा रंग हरी-भरी वादियों के नाम श्वेत रंग श्वेत कपोतो के नाम युवा साहित्यकार संजय ताम्रकार ने अपनी रचना से गहरी छाप छोड़ी खुद की तलाश में खो जाइए मन जहां न लगे मत जाइए अधिवक्ता कल्याण केसरी ने भी अपनी प्रस्तुति से मन मोह लिया बचपन सा निश्चल मन होना चाहिए धरती की महिमा तो अपार है उड़ने के लिए पूरा गगन चाहिए अगले क्रम में राष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुति दे चुके युवा कवि गौरव अग्रवाल ने राष्ट्र की वर्तमान स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज दिल्ली में जो कुछ हुआ वह बेहद शर्मनाक है उन्होंने निम्न पंक्तियां पढी जो टूट गया सो छोड़ चले टुकड़ों को कौन समेटेगा ऐ कलम के साधको तुम्हें है प्रार्थना मेरी कि वो लिखें की देशभक्ति की आंधियां चल पड़े के माध्यम से किसान आंदोलन के बिगड़ते स्वरूप पर चिंता व्यक्त की संस्था अध्यक्ष विनोद तिवारी ने भी आज किसान आंदोलन के दौरान घटित घटना की निंदा करते हुए निम्न पंक्तियां कहीं गणतंत्र के अवसर पर किसानों ने यह कैसा रंग दिखाया देश के स्वाभिमान को कलंकित कर अपना मान घटाया संस्था सचिव तथा प्रचार प्रसार विभाग प्रमुख नरेंद्र अरोड़ा ने निम्न पंक्तियों के द्वारा राष्ट्रीय एकता की बात कही जियो नहीं धर्म के नाम पर ना लड़ो धर्म के नाम पर इंसानियत ही है धर्म वतन का जियो बस वतन के नाम पर साहित्यकार नारायण तिवारी ने भी अपनी नूतन रचना से राष्ट्रीय एकता एवं विकास की बात कहते हुए कहा कि मेरा भारत फिर सोने की चिड़िया बन इठलाएगा चारों दिशाएं होंगी नतमस्तक देश मेरा विश्व गुरु कहलायेगा गीतकार नरोत्तम शर्मा ने सु मधुर गीत की प्रस्तुति दी तथा सतीश द्विवेदी ने राष्ट्रीय अखंडता एकता से पूर्ण गीत ए मेरे प्यारे वतन की शानदार प्रस्तुति से वाहवाही प्राप्त की अरविंद वैश्य ने अपनी प्रस्तुति देते हुए संविधान निर्माता बाबा साहब भीमराव अंबेडकर को याद किया साहित्यकार एसएस निगम ने अपनी विशिष्ट शैली कुंडलियों के द्वारा काव्य पाठ किया राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कार्टूनिस्ट तथा व्यंग के सशक्त हस्ताक्षर जगदीश पाठक ने अपनी व्यंग रचना द्वारा आज के आदमी के दोगले पन पर जोरदार प्रहार किया काव्य गोष्ठी के संचालक सतीश उपाध्याय ने अपनी रचना के द्वारा संदेश देते हुए कहा कि लोगों द्वारा महापुरुषों के आदर्शों को भुला दिया जाता है मात्र उनकी प्रतिमा की स्थापना ही नहीं की जानी चाहिए बल्कि उनके आदर्शों का भी स्मरण रखा जाना चाहिए आयोजन में निरंजन मित्तल वरिष्ठ साहित्यकार गंगा प्रसाद मिश्र नरेंद्र श्रीवास्तव आदि की भी उपस्थिति रही
संस्था सचिव नरेंद्र अरोड़ा ने आज के आयोजन में पधारे समस्त जनों का आभार व्यक्त किया तथा बताया कि संस्था द्वारा वर्ष 2021 कार्यक्रम वर्ष घोषित किया गया है राष्ट्र गान के साथ यह काव्य गोष्ठी संपन्न हुई
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