तहकीकात न्यूज @ वेब डेस्क . बैकुन्ठपुर
कोरिया जिले में कोरोना संक्रमण की दूसरी खतरनाक लहर ने कई लोगों की जान आफत में डाल दी है। तो अब तक कई परिवारो ने जिस प्रकार अपनो को खोया है। इतने पर हर ओर घोर कलयुग का असर नजर आ रहा है लोगो की मनवीय संवेदनाऐ इतनी विकट त्रासदी में भी मृत ही नही बल्कि इस आपदा में सब अपने अपने अवसर की तालास में लगेे है। सब्जी, फल, किरान के बाद अब जिले भर से लगातार खबरे आ रही है कि कोरोना के बढते भयवता के बाद में दवा विक्रेताओ ऐसे भयावह दौर में जरूरी दवाओं के साथ उपकरणों के दाम में अप्रत्याशित तेज कर दिये है।
कई दवाओं के दाम में 10 से 30 फीसद का इजाफा हुआ है, वहीं मेडिकल उपकरण में तो दो से तीन गुना की तेजी आई है। कई प्रकार की जरूरी दवाइयां और उपकरण मुंह मांगे दाम देने के बाद भी उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं। बैकुन्ठपुर, चिरमिरी, मनेन्द्रगढ सहित सोनहत खडगवा जनकपुर क्षेत्र के अस्पतालों और कई दवा दुकानों पर मरीजों के स्वजन जरूरी दवाएं उपलब्ध नहीं होने पर परेशान नजर आ रहे हैं।
जिल के शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में कोरोना संक्रमण का असर है। लगातार बढ़ती मरीजों की संख्या से जरूरी दवाओं का टोटा शुरू हो गया है, तो कई दवाओं के दाम में बढ़ गए हैं। कोरोना काल में जहां कामकाजी व्यक्ति के व्यापार ठप्प है वहीं दवाओं के बढ़ते दामों ने उन परिवारों के लिए आर्थिक परेशानी खड़ी कर दी है। जहां लोग बीमार हैं और दवाओं पर निर्भर हैं। कुछ खास दवाओं के साथ सुरक्षित मानी जाने वाली एंटीबायोटिक दवाओं के दाम भी तेजी से बढ़ा है। जानकारों के अनुसार कोरोना काल में फार्मा कंपनियों को हुए घाटे से उबरने के लिए दवाओं के दाम बढ़ाए गए हैं। कोरोनाकाल के दौरान सभी व्यापार बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। दवा कंपनियां भी इससे अछूती नहीं रही। हालांकि स्वास्थ्य सेवाओं को बंद से दूर रखा गया था, लेकिन कोरोना काल में दवाओं की बिक्री में काफी कमी आई थी।
वर्तमान में क्षेत्र के दवा बाजार चमक गया है। जानकारों के मुताबिक गत वर्ष कोरोना काल में दवा कंपनियों की बिक्री काफी प्रभावित हुई थी। लोगों ने दवाएं तो खरीदी, लेकिन यह खरीदी केवल बहुत जरूरी दवाओं तक सिमट गई थी। ऐसे में कंपनियों की आय पर भी प्रभाव पड़ा था। अब दवाओं के दामों में आई तेजी इसी घाटे से उबरने का प्रयास है। इसके बाद भी बाजार में पर्याप्त मात्रा में जरूरी दवाओं का टोटा बना हुआ है। मांग और पूर्ति का संतुलन गड़बड़ाने से कई मरीजों को समय पर दवा नहीं मिल पा रही है। इससे जहां मरीजों की असमय मौत हो रही है, वहीं स्वजनों पर अपनो को खोने का पहाड़ टूट रहा है।
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