तहकीकात न्यूज @ वेब डेस्क . बैकुन्ठपुर
सूबे के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल सहकारिता मंत्री प्रेमसाय टेकाम खाद्य मंत्री अमर जीत भगत को बेहद मार्मिक पत्र प्रार्थना करते हुए आग्रह करते हुए मंाग की गई है कि छत्तीसगढ़ सरकार की अल्पकालीन ऋण समितियों के कर्मचारी करते आ रहे हैं ऐसी स्थिति में परिस्थिति में छत्तीसगढ़ के सहकारी समितियों में कार्यरत कर्मचारियों का कोरोना वायरस की संक्रमण के कारण लगभग पूरे प्रदेश में 60 लोगों का मौते हो चुकी है। जिससे उनके परिवार वालों के ऊपर आर्थिक विपदा आ गई है परंतु सरकार के द्वारा सहकारिता विभाग के कर्मचारियों के लिए कोई बीमा योजना या अन्य लाभ नहीं दिया जा रहा है। जोकि एक सरकारी कर्मचारियों को दिया जाता है । वही पर समिति प्रबंधक प्रभाकर सिंह ने कहा है समिति के कर्मारियो को फ्रंटलाईन वर्कर का दर्जा देने के लिए सरकार का आभार एवं उम्मीद है कि आगे सरकार हमारी स्थिति को ध्यान में रख जल्द बीमा देने की घोषणा करेगी।
इस विषम परिस्थिति में भी राज्य सरकार की योजनाओं का सुचारू रूप से निर्वहन करने वाले सहकारी समिति कर्मचारियों के साथ बड़ा दूर र्दूव्यवहार हो रहा है वायरस के कर्मचारियो और उनके परिजन डरे सहमे हुए हैं । इस संबंध में कर्मचारी हित में शासन कुछ उचित निर्णय लें ताकि हम अल्प वेतनभोगी कर्मचारी निर्भय होकर शासन की योजनाओं को सुचारू रूप से संचालित कर सकें । इस आपदा की घड़ी में सहकारिता विभाग आगे आए। इस भयंकर महामारी में भी अन्न उगाने हेतु कृषकों को खाद बीज प्रदान करने एवं कृषक हित में लगातार कार्य करने वाले समिति कर्मचारियों की सुध लेने वाला कोई नहीं है।
सभी कर्मचारियो को मिले बीमा का लाभ
इस भयंकर महामारी में कई समिति कर्मचारी शासन की योजनाओं का संचालन करते हुए काल के गाल में समा गए। किंतु न ही तो किसी कर्मचारी का कोई स्वास्थ्य बीमा शासन प्रशासन के द्वारा कराया गया ना ही कभी उनकी सुध ली गई। इसलिए शासन प्रशासन से अनुरोध है कृषक हित में लगातार कार्य करने वाले एवं शासन की समस्त महत्वपूर्ण योजनाओं का संचालन करने वाले समिति कर्मचारियों का स्वास्थ्य बीमा कराया जाए ।
60 मौत षासन का कफन तक नही सहयोग
आज कोविड-19 महामारी ने भयावह रूप ले लिया है। हमारे कर्मचारी जनहितकारी कार्य जैसे जमा अमानत, बैंकिंग, उपार्जन एवं खाद्य वितरण का काम कर रहे है। इस दौरान काम करते हुए प्रदेश के 60 कर्मचारियों की कोविड-19 से मृत्यु हो चुकी है करीब 80 कर्मचारी कोरोना के कारण जीवन मृत्यु से संघर्ष कर रहे है। दुख की बात है कि हमारे 60 कर्मचारी की मौत होने पर भी शासन प्रशासन से उन्हें एक कफन भी नसीब नहीं हुआ। उसके परिवार का हाल पूछने वाला तो दूर की बात है जो 80 कर्मचारी अपनी जिंदगी और मौत की लड़ाई लड़ रहे है। उनको भी दो से तीन वर्ष तक का वेतन नसीब नहीं हुआ है फिर भी शासन प्रशासन नींद से नहीं जागा। सहकारी समिति के समस्त कर्मचारियों को मुख्यमंत्री कोरोना वायरस कल्याण योजना में शामिल किया जाए। मृत्यु कर्मचारी के परिवार को तत्काल सहायता राशि उपलब्ध कराई जाए। कोरोना पॉजिटिव कर्मचारियों की जानकारी प्राप्त होने पर पॉजिटिव कर्मचारियों को समुचित इलाज कर खर्चा शासन वाहन करें।
नही तो आंदोलन के लिए होंगे विवष
पूर्व आंदोलन के दौरान हुए समझौते अनुसार मांगों का निराकरण कर आदेश जारी करें। उक्त मांगों का निराकरण आदेश पारित प्रसारित नहीं किया गया तो आगे प्रदेश के समस्त सहकारी समितियों के कर्मचारी अनिश्चितकालीन आंदोलन पर जाने को विवश होंगे। जिससे उत्पादन कार्य खाद्यान्न वितरण, ऋण वसूली, ऋण वितरण आदि कार्य संपूर्ण बंद हो जाएंगे।
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