धान खरीदी के संबंध में संशोधन करने संसदीय सचिव अमरजीत को लिखा पत्र…… संघ ने कलेक्टर को सौपा ज्ञापन

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तहकीकात न्यूज  @  वेब डेस्क . बैकुन्ठपुर

बैकुंठपुर विधायक एवं संसदीय सचिव अंबिका सिंह देव ने समर्थन मूल्य पर धान खरीदी वर्ष 20-21 के नीति निर्धारण में आवश्यक संशोधन करने के लिए आदिम जाति सहकारी समिति संघ की मांग पर संशोधन करने के लिए विभाग के मंत्री अमरजीत भगत को पत्र लिखकर उनसे मांग की है । इस दौरान बताया गया कि आदिम जाति सेवा सहकारी समिति कर्मचारी संघ सरगुजा संभाग के संभागीय अध्यक्ष प्रभाकर सिंह सहित संघ के सदस्यों के द्वारा प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंह देव, सहकारिता मंत्री प्रेमसाय सिंह टेकाम, खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग मंत्री अमरजीत भगत सहित संसदीय सचिव अंबिका सिंह देव से पत्र लिखकर वर्ष 2020-21 में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी के लिए शासन के द्वारा नीति निर्धारण में आवश्यक संशोधन करने हेतु अपनी मांग का पत्र सौंपा है। जिसमें संघ के द्वारा कहा गया है कि सहकारिता की रीढ़ की हड्डी सहकारी समिति है एवं धान खरीदी से ही शत-प्रतिशत वसूली हो रही है किंतु आज वर्तमान में धान खरीदी नीति में आवश्यक संशोधन करने की आवश्यकता है

जिसमें समिति द्वारा उपार्जित धान का परिवहन संग्रहण व मिलरों द्वारा बफर लिमिट सीमा 72 घंटे के स्थान पर 24 घंटे के भीतर की जाए एवं समिति में बफर लिमिट की जाए धान खरीदी की शुरुआत में खरीदी टोकन 5 दिन पूर्व सॉफ्टवेयर जारी किया जाए । 24 घंटे के भीतर सीधा मिलर्स को धान प्रदाय करने से शासन की परिवहन की राशि एवं समिति की धान सुखती की समस्या खत्म हो जाएगी ।

समिति द्वारा उपार्जित धान की प्रासंगिक व सुरक्षा एव लगभग 10 से 12 वर्षों से 12 प्रति क्विटल से दी जा रही है जबकि वर्तमान में हम्माली सहित समस्त सामग्रियों की महंगाई बढ़ गई है इस कारण 12 के स्थान पर 24 रु प्रति क्ंिवटल दी जाए । धान खरीदी राशि पर कमीशन ढाई रुपए के स्थान पर 5 दी जाए। धान खरीदी के दरमियान खाली वारदाना व अन्य भौतिक सत्यापन के नाम पर पदस्थ कर्मचारियों को अनावश्यक कार्यवाही ना की जाए।

कालातीत एवं अकालातीत सदस्यों की संपूर्ण ऋण वसूली होने के पश्चात ही शेष भुगतान योग राशि की किसानों के बैंक बचत खाते में समायोजित की जाए। समितियों में अल्पकालिक ऋण वितरण डीएमआर तत्काल बंद कर किसानो के सेविंग खाते में समायोजित की जाए। जिससे ऋण का मिलान समय से किया जा सके । शासन प्रशासन द्वारा खरीदी लिमिट के नाम पर अनावश्यक अलग-अलग दिशा निर्देश जारी न किए जाएं ।

जिससे किसानों में बेवजह का आक्रोश ना फैले । समिति कर्मचारियों को केवल लिंकिंग में ऋण वसूली आदि कार्यालय दिवस में ही कार्य लिया जाए । ताकि धान खरीदी परिवहन फाइनलाइजेशन होने तक शासकीय कर्मचारियों से ही संपन्न कराया जाए । जिससे किसी प्रकार का की अव्यवस्था उत्पन्न ना हो । समिति के कर्मचारियों को धान खरीदी के दरमियान अनावश्यक रूप से अन्य स्थानों पर स्थानांतरण न किया जाए।

क्योंकि इससे संस्था की अन्य कार्य भी प्रभावित होती है । यदि स्थानांतरण नीति लागू होती है तो स्थानांतरण हुए कर्मचारियों को 20 लाख बीमा का प्रावधान किया जाए । खरीदी अवधि में प्रत्येक माह संस्था के कर्मचारियों को अतिरिक्त समय प्रतिमाह 5000 मानदेय भुगतान दिया जाए । धान खरीदी त्रिस्तरीय अनुबंध की कॉपी वितरण संघ समिति को शीघ्र दिया जाना चाहिए । समिति द्वारा उपार्जित धान की बीमा मार्कफेड द्वारा खरीदी परिवहन किया जाए । बीमा क्षति की राशि समिति को तत्काल दी जाए ।

धान परिवहन कार्यसमिति को ना दी जाए संग्रहण केंद्र की भांति एजेंट समिति का भी प्रतिशत कुल खरीदी में सुखत दिया जावे । धान खरीदी के अंतिम दिन तक संपूर्ण उपार्जित धान परिवहन हो जानी चाहिए । नहीं होने की स्थिति में सुखत के लिए समिति को दोषी ठहराया जाए । धान खरीदी में 17 फिसद के स्थान पर 14 फिसद निर्धारित किया जाए । धान खरीदी में परिवहन की अधिक समस्या होती है जिससे आवश्यक सुधार किया जाए ।

  • इलेक्ट्रॉनिक कांटा तौल के स्थान पर कांटा बाट से कराई जाए । खरीदे गए धान के बोरों की सिलाई के स्थान पर मजबूत धागे वह मशीन के द्वारा कराई जाए । जिससे धन व समय की बचत हो । धान खरीदी निगरानी समिति में किसी भी राजनीतिक दल के लोगो को न रखा जाय। खरीदी में अलग-अलग विभागों द्वारा बार बार लिखित व मौखिक आदेश निर्देश न दिए जाए। धान खरीदी केंद्र में शांति व्यवस्था हेतु पुलिस व कोटवार का सहयोग प्रदान किया जाए। धान खरीदी कार्य में लगे समस्त कर्मचारी एवं हम्मालीयो का बीमा कराया जाए ।

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