अपना अस्तित्व बचाने कर रहें किसानों का समर्थन
तहकीकात न्यूज @ वेब डेस्क . बैकुन्ठपुर
प्रदेष के पूर्व गृहमंत्री राम सेवक पैकरा ने बैकुन्ठपुर के जिला कार्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि हम विपक्ष का दोहरा चरित्र बताने के लिए आए हैं। आज जो बीजेपी सरकार करने जा रही है वही ये पार्टियां अपने राज्य में कर रही थीं लेकिन आज इनका राजनीतिक वजूद खत्म हो रहा है। इस अस्तित्व को बचाने के लिए किसी भी विरोधी आंदोलन में शामिल हो जाते हैं। इस दौरान प्रदेष के पूर्व श्रममंत्री भैयालाल राजवाडे व प्रदेष के भाजपा किसान मोर्चा के अध्यक्ष ष्ष्याम बिहारी जायसवाल सहित भाजपाई मौजूद रहे। गौरतलब हो कि अंदोलन से सरकार लगातार दबाव में आ रही है, अब भारत बंद से एक बार फिर किसान केंद्र की मोदी सरकार को अपनी ताकत दिखा रहे हैं इस बंद को तमाम बड़े विपक्षी दलों ने अपना समर्थन दिया है। इसे लेकर अब बीजेपी की तरफ से विपक्ष पर जमकर हमला बोला गया। बीजेपी ने कहा कि इस किसान आंदोलन में गैर भाजपाई दल कूद रहे हैं।

प्रदेष के पूर्व श्रममंत्री भैयालाल राजवाडे ने कहा कि किसान नेताओं ने साफ किया है कि कोई भी नेता हमारे मंच पर नहीं आएंगे। लेकिन ये लोग कूद रहे हैं देष में मामला कृषि बील का हो या चाहे सीएए हो, कभी शाहीन बाग का विषय हो या फिर कोई और मुद्दा हो, ये लोग खड़े हो जाते हैं। कांग्रेस पार्टी की कभी-कभी कलाबाजी समझनी चाहिए।इस दौरान उन्होने कहा कि कांग्रेस पार्टी ने 2019 के चुनाव में अपने चुनाव घोषणा पत्र में साफ-साफ कहा है कि एग्रीकल्चर प्रोड्यूस मार्केट एक्ट को समाप्त करेगी और किसानों को अपनी फसलों के निर्यात और व्यापार पर सभी बंधनों से मुक्त करेगी। बीजेपी ने कहा कि राहुल गांधी ने 2013 में सभी मुख्यमंत्रियों की बैठक बुलाई थी जिसमें उन्होंने कहा था कि किसानों से सीधा अनाज खरीदा जा सकता है।

वही पर भाजपा किसान मोर्चा के प्रदेष अध्यक्ष ष्ष्याम बिहारी जायसवाल ने मोदी सरकार किसानो के हित में बील लेकर आई है। जिससे किसानो का भला होगा । उन्होने विपक्ष को याद कराते हुए उस समय के कृषि मंत्री एनसीपी नेता शरद पवार की उस चिट्ठी का भी जिक्र किया, जिसे पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर लगाता शेयर किया जा रहा है। उन्होने कहा कि, शरद पवार जब देश के कृषि और उपभोक्ता मामलों के मंत्री थे तो उन्होंने देश के सारे मुख्यमंत्रियों को चिट्ठी लिखी थी। जिसमें उन्होंने लिखा था कि मंडी एक्ट में बदलाव जरूरी है, प्राइवेट सेक्टर का आना जरूरी है, किसानों को कहीं भी अपनी फसल बेचने का अवसर मिलना चाहिए।
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