जिले को टीबी मुक्त करने को ,कोरोना काल में भी जारी रहा अभियान जनवरी से नवंबर तक 625 नए मरीज आये सामने

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तहकीकात न्यूज  @  वेब डेस्क . बैकुन्ठपुर


जिले को टीबी मुक्त करने के लिये चलाये जा रहे अभियान को कोरोना काल में भी जारी रखा गया है। स्वास्थ विभाग से प्राप्त जानकारी अनुसार कोरोना गाइड लाइन का पालन करते हुए टीबी उन्मूलन कार्यक्रम के तहत विगत जनवरी से नवंबर तक निजी और सरकारी जांच केंन्द्रो में 4,369 लोगो की टीबी की = जांच की गई जिसमें 625 नए रोगी सामने आये हैं। जिनका इलाज किया जा रहा है।
सीएमएचओ डा. रामेश्वर शर्मा ने बताया, “टीबी के मरीजो के चिन्हाकन के लिये क्षय नियंत्रण समिति के सदस्यो द्वारा टीबी रोगी खोज अभियान चलाया गया जिसके तहत अर्बन स्लम एरिया में कोरोना के नियमों का पालन करते हुए लोगों कीस्क्रीनिंग की गयी।
जानकारी देते हुए नोडल अधिकारी जिला क्षय नियंत्रण समिति डॉ अशोक सिंह ने बताया, “बलगम जांच के माध्यम से क्षय नियंत्रण समिति के सदस्य लोगों को स्क्रीनिंग करवाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं । जनवरी से नवंबर तक सरकारी अस्पतालो में 528 रोगी मिले वही निजी अस्पतालो में 97 मरीज सामने आये। कोरिया को टीबी फ्री जिला बनाने के लिए सघन टीबी जांच अभियान के तहत हमारी टीम निरंतर कार्य कर रही है। जनसमुदाय से अपील है कि जागरूक होकर सामने आयें और जांच कराकर हमारा सहयोग करे।
कैसे होता है टीबी
टी.बी. के बैक्टीरिया सांस द्वारा शरीर में प्रवेश करते हैं। किसी रोगी के खांसने, बात करने, छींकने या थूकने के समय बलगम व थूक की बहुत ही छोटी-छोटी बूंदें हवा में फैल जाती हैं, जिनमें उपस्थित बैक्टीरिया कई घंटों तक हवा में रह सकते हैं और स्वस्थ व्यक्ति के शरीर में सांस लेते समय प्रवेश करके रोग पैदा करते हैं। एक मरीज 15-20 लोगों को संक्रमित कर सकता है। टी.बी. के लक्षणों में शरीर का वजन घटना, भूख न लगना, थकावट का बने रहना आदि है । साथ ही दो हफ्ते तक लगातार बुखार आना और उतर जाना। इसे नजरंदाज न करें। यह कुछ ऐसे लक्षण हैं जो टीबी होने के संकेत देते हैं। टीबी होने की कोई उम्र नहीं होती। वृद्ध हो या युवा, किसी को भी यह बीमारी हो सकती है। निशुल्क उपलब्ध है टीबी का उपचार
टीबी का उपचार सभी सरकारी स्वास्थ केन्द्रों में निशुल्क उपलब्ध है और अगर नियमित दवा ली जाए तो यह रोग पूरी तरह से ठीक हो जाता है। उपचार के साथ, मरीज को उपचार की अवधि में निक्षय पोषण योजना के तहत 500 रुपये मासिक भत्ता भी दिया जाता है, ताकि वे आसानी से पौष्टिक आहार खरीद सकें। इसके अलावा घर या अस्पताल आने-जाने में आसानी से आवागमन कर सकें।

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