गुरूघासीदास राष्ट्रीय उद्यान वन क्षेत्र में अवैध रेत उत्खनन, शिकायतों पर नहीं हो रही कार्यवाही

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तहकीकात न्यूज  @  वेब डेस्क . बैकुन्ठपुर

कोरिया जिला के सीमावर्ती संरक्षित वन क्षेत्र के अंतर्गत ग्राम पंचायत-हरचोका में मवई नदी के रात-दिन हो रहे अवैध रेत उत्खनन को लेकर स्थानीय जनों में काफी रोष है । नियम विपरीत रेत उत्खनन को लेकर प्रशासनिक अमला की खामोशी भी कई प्रकार की शंकाओं को जन्म दे रही है । ग्राम पंचायत-हरचोका के निकट से बहने वाली मवई नदी म0प्र0 एवं छ0ग0 की सीमा कहलाती है । इस नदी पर ख0नं0 336 में रकबा 5 हे0 में रेत उत्खनन का ठेका कराया गया है । लेकिन संबंधित एजेंसी द्वारा संरक्षित वन क्षेत्र के प्रतिबंधित क्षेत्र में नियम विरूद्ध अवैध रेत उत्खनन कराया जा रहा है मवई नदी के उस पार संजय टाइगर रिजर्व पार्क का इलाका है और मवई नदी के इस पार छ0ग0 के कोरिया जिले का संरक्षित वन क्षेत्र का क्षेत्र आता है । जी0पी0एस0 रीडिंग के अनुसार संजय राष्ट्रीय उद्यान सीधी से लगभग दूरी 1200 मीटर के बताई जाती है ।

हाईटेक मशीनों से हो रहा है रेत उत्खनन, नदी का अस्तित्व खतरे में:- उक्त स्थल में हाईटेक मशीनों – जे0सी0बी0, 2 टेन आदि से रेत का खनन किया जा रहा है । प्रतिदिन सैकडों डम्फर रेत म0प्र0 की ओर ले जाई जा रही है । जिससे पर्यावरण को भी खतरा है और संरक्षित वन क्षेत्र में रहने वाले वन्य प्राणियों के लिए भी घातक है । अवैध रेत उत्खनन करने वालों ने मवई नदी के ऊपर ट्रक डंफर आने-जाने के लिये सड़क तक बना दी है । स्थानीय कुछ जागरूक लोगों का मत है कि, यह कहना अतिश्योक्ति पूर्ण नहीं होगा कि,यदि इसी गति से रेत उत्खनन होता रहा तो नदी का अस्तित्व ही संकट में पड़ जाएगा ।संरक्षित वन क्षेत्र और संजय टाइगर रिजर्व पार्क सीधी के अधिकारियों की चुप्पी भी रहस्यमयी बनी हुई है । संरक्षित वन क्षेत्र के नियमों के अनुसार पार्क क्षेत्र में सूखी पत्ती भी उठाकर नहीं ले जाई जा सकती है । लेकिन दिन दहाड़े, रात-दिन रेत उत्खनन का कारोबार जारी रहना आम आदमी की समझ के परे हैं ।

ग्रामीणों में आक्रोश अधिकारी गए थे समझाने – अवैध रेत उत्खनन को लेकर ग्राम पंचायत-हरचोका, माडीसरई सहित जनकपुर तहसील क्षेत्र में भारी रोष है । जिसे लेकर कई बार ग्रामीणों ने विरोध भी जताया है । लेकिन कार्यवाही करने के बजाए प्रशासनिक अधिकारी विरोध करने वाले ग्रामीणों को ही समझाने का प्रयास करते रहे । कुछ ग्रामीणों ने बताया कि, डेढ़-दो माह पूर्व उनके गांव में अपर कलेक्टर मनेन्द्रगढ़, एस0डी0एम0 जनकपुर सहित अधिकारियों का दल पहुंचा था । ग्रामीणों के सवालों का समाधान करने का बजाए उन्हें विरोध न करने की समझाइश देते रहे और कहा कि, रेत उत्खनन नियमों के तहत् ही हो रहा है । इसे लेकर आज भी ग्रामीण प्रशासनिक मिली भगत का आरोप लगाते रहते हैं ।

जारी पिट पास संदेह के दायरे में:- कुछ लोगों को संबंधित ठेकेदार के प्रतिनिधियों द्वारा जो पिट पास जारी किया जा रहा है उसे लेकर भी कई प्रकार के संदेह समाने आ रहे हैं । पिट पास में मात्रा का उल्लेख तो हैं लेकिन रकम का कालम खाली ही है । पिट पास मंे नियमानुसार जिला खनिज अधिकारी की पदमुद्रा अंकित होनी चाहिए लेकिन जारी पिटपास में ऐसा नजर नहीं आता है । कुछ भुक्तभोगियों ने बताया कि, शासन द्वारा रायल्टी 177 रूपए प्रति घन मीटर निर्धारित की गई है । हाईवा में 14 घन मीटर रेत आती है । जिसके अनुसार रायल्टी 2478 रूपए होनी चाहिए लेकिन 10-10 हजार रूपए वसूला जा रहा है ।

हरचोका ग्राम-पर्यटन क्षेत्र घोषित छ0ग0 सरकार द्वारा ग्राम पंचायत हरचोका को पर्यटन क्षेत्र घोषित किया गया है । यहां से श्रीराम वन पथ गमन योजना के तहत् सड़क का कार्य प्रारंभ किया गया है कहा जाता है कि, छ0ग0 में भगवान राम इसी स्थल से प्रवेश किए थे । इसी ग्राम पंचायत में सीतामढ़ी भी स्थित है । पर्यटन क्षेत्र घोषित होने के बावजूद इस इलाके को उजाड़ा जा रहा है जो स्थानीय लोगों के आक्रोश का प्रमुख कारण है । हरचोका के निकट से ही मवई नदी का उद्गम होता है । जो छ0ग0 और म0प्र0 के कई ग्रामों के लिए अति उपयोगी है ।

मुझे पता नहीं कहां हो रहा है रेत उत्खनन – खनिज अधिकारी


इस संबंध में जब जिला खनिज अधिकारी से चर्चा की गई तो उनका कहना था कि, मैं इस समय बैकुण्ठपुर में हूं । इस कारण यह बताना मेरे लिये असंभव है कि, रेत उत्खनन किस क्षेत्र में हो रहा है इस कार्य में वन विभाग द्वारा स्वीकृति प्रदान की गई है । इस संबंध में समय-समय पर मेरे द्वारा संबंधित खनन क्षेत्र का भ्रमण किया जाता है ।

हाईटेक मशीनें लगाना अनुचित –

इस संबंध में ग्राम पंचायत हरचोका की सरपंच श्रीमती पूनम सिंह का कहना है कि, रेत उत्खनन में कई प्रकार की अनियमितताएं की जा रही है । नदी में बड़ी-बड़ी मशीनें लगाना और नदी के उपर सड़क बना कर बड़े-बड़े डंफर चलवाना पूर्णतः अनुचित है । उन्होनें स्वीकार किया कि, जो पिट पास जारी किए जा रहे है वे संदेह के दायरे में आते हैं ।क्योंकि उनमें खनिज विभाग की सील व हस्ताक्षर आदि नहीं रहते हंै ।

निजी जमीन से हो रहा है उत्खनन:-

इस संबंध में उप वनमण्डलाधिकारी जनकपुर के0एस0 कंवर से पूछा गया तो उनका कहना था कि, संरक्षित वन क्षेत्र से रेत उत्खनन नहीं हो रहा है बल्कि संबंधित ठेकेदार द्वारा आसपास की निजी जमीन से उत्खनन कार्य किया जा रहा है । श्री कंवर के अनुसार उन्हें अभी तक इस संबंध में कोई शिकायत प्राप्त नहीं हुई है ।

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