तहकीकात न्यूज @ वेब डेस्क . बैकुन्ठपुर
समाज सहित देष-प्रदेष में अपनी पहचान दिलाने वाले महापुरुष केवल जयंती व पुण्य तिथि पर याद आते हैं। बाद में वर्ष भर इन्हें कोई याद नहीं करता। प्रतिमाएं सम्मान की प्रतीक हैं। हर चैक, चैराहों पर किसी न किसी महापुरुष की लगी प्रतिमाएं हमको उनके कार्यों और बलिदानों की याद कराती हैं। महापुरुषों की प्रतिमाओं की दुर्दशा को देखकर गौरवान्वित होने के बजाय शर्मिंदगी महसूस होती है।
बैकुन्ठपुर नगर पालिका क्षेत्र में आधा दर्जन महापुरुषों की प्रतिमाएं स्थापित हैं। सब की सब बदहाल स्थिति में हैं। गांधीजी पार्क में गांधी की प्रतिमा स्थापित है। इस प्रतिमा पर धूल की परत चढ़ी हुई है। इस प्रतिमा के आसपास पसरी गंदगी बापू के स्वच्छता के सपनों को मुंह चिढ़ाती है।
शहीदों व महापुरुषों की प्रतिमाओं के आसपास कचरे के ढेर लगे हैं। शहर के अंदर एसईसीएल आफिस के पास सुभाष चंद्र बोस चैक पर लगी सुभाष चन्द्र बोस की प्रतिमा, कचहरीपारा में जगदीष चन्द्र नामदेव आदि महापुरुषों की मूर्तियां सार्वजनिक स्थानों पर लगी हुई हैं लेकिन उनके इर्द-गिर्द सफाई नहीं की जाती।
इस वजह से वहां गंदगी के ढेर हमेशा लगे रहते हैं। इतिहास लिखने वालों ने कभी नहीं सोचा होगा कि जिस रास्ते से गुजरकर लोग महापुरुषों की मूर्तियों और स्मारक तक जाएंगे, वह गंदगी से इस कदर अटे होंगे। ऐतिहासिक स्मारक गंदगी और धूल की ऐसी ही परत से ढके हैं, लेकिन जिम्मेदारों ने इस ओर से आंखें मूंद ली हैं।
इस ओर नगर प्रशासन पूरी तरह से चुप है। देश के महानपुरुषों ने देशवासियों के लिए अपना जीवन व सब कुछ न्योछावर कर दिया। इसके बाबजूद भी इतने महान क्रांतिकारियों की मूर्तियों की रख-रखाव और साफ-सफाई रखने की जिम्मेदारी से प्रशासन व नगरपालिका परिषद पूरी तरह से सौतेला व्यवहार कर रहे हैं।
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